Vaibhav Sooryavanshi Child Labour Concerns: वैभव सूर्यवंशी को लेकर राजस्थान रॉयल्स की मुश्किलें बढ़ीं, बाल श्रम के आरोप में FIR की चेतावनी

राजस्थान रॉयल्स के युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी के चयन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बाल श्रम कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए फ्रेंचाइजी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है.

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आईपीएल 2026 सीजन के बीच राजस्थान रॉयल्स की टीम एक कानूनी विवाद में फंसती नजर आ रही है. टीम के युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी के पेशेवर क्रिकेट खेलने को लेकर एक सामाजिक कार्यकर्ता ने गंभीर सवाल उठाए हैं. कार्यकर्ता का दावा है कि इतनी कम उम्र में एक बच्चे से पेशेवर और व्यावसायिक स्तर पर क्रिकेट खिलवाना बाल श्रम (Child Labour) की श्रेणी में आता है. इस मामले में राजस्थान रॉयल्स फ्रेंचाइजी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की धमकी दी गई है.

बाल श्रम और शोषण के आरोप

शिकायतकर्ता का तर्क है कि 14-15 वर्ष की आयु के बच्चे को अत्यधिक शारीरिक दबाव और व्यावसायिक अनुबंधों के तहत रखना उसके अधिकारों का उल्लंघन है. कार्यकर्ता के अनुसार, आईपीएल जैसे उच्च-तनाव वाले टूर्नामेंट में एक किशोर का उपयोग व्यावसायिक लाभ के लिए करना 'शोषण' की श्रेणी में आ सकता है. कार्यकर्ता ने मांग की है कि बीसीसीआई और संबंधित अधिकारियों को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि कम उम्र के एथलीटों के हितों की रक्षा की जा सके.

राजस्थान रॉयल्स और बीसीसीआई का रुख

फिलहाल राजस्थान रॉयल्स की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. आमतौर पर, बीसीसीआई के नियमों के अनुसार, यदि कोई खिलाड़ी आयु पात्रता मानदंडों को पूरा करता है और चिकित्सकीय रूप से फिट है, तो वह खेल सकता है. हालांकि, यह विवाद अब खेल के मैदान से निकलकर कानूनी दायरे में पहुंच गया है, जिससे फ्रेंचाइजी की ब्रांड छवि पर असर पड़ सकता है.

वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन और पृष्ठभूमि

वैभव सूर्यवंशी ने हाल के घरेलू सत्रों में अपने शानदार प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा था, जिसके बाद उन्हें आईपीएल नीलामी में राजस्थान रॉयल्स ने शामिल किया. वह इस लीग के इतिहास के सबसे युवा खिलाड़ियों में से एक हैं. जहां एक तरफ क्रिकेट जगत उन्हें एक उभरता हुआ सितारा मान रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस कानूनी विवाद ने पेशेवर खेलों में बच्चों की भागीदारी और उनके संरक्षण पर एक नई बहस छेड़ दी है.

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी जानकारों का मानना है कि भारत में बाल श्रम कानून मुख्य रूप से खतरनाक उद्योगों और अनिवार्य शिक्षा पर केंद्रित हैं. हालांकि, मनोरंजन और खेल क्षेत्र में बच्चों की भागीदारी के लिए विशिष्ट दिशा-निर्देश मौजूद हैं. यदि यह मामला अदालत तक पहुंचता है, तो यह देखा जाएगा कि क्या फ्रेंचाइजी ने आवश्यक अनुमति ली थी और क्या खिलाड़ी के शिक्षा और स्वास्थ्य के अधिकारों का संतुलन बनाए रखा गया है.

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