19 Minute 34 Second Viral Video: सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म्स—जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और टेलीग्राम—पर पिछले कुछ समय से "19: 34 वायरल वीडियो ओरिजिनल लिंक" (19: 34 Viral Video Original Link) सर्च कीवर्ड तेजी से ट्रेंड कर रहा है. नेटिजन्स एक कथित निजी वीडियो की लिंक और जानकारी तलाशने में लगे हुए हैं. हालांकि, किसी भी विश्वसनीय समाचार एजेंसी या जांच संस्था ने इस तरह के किसी वीडियो की पुष्टि नहीं की है.
अपुष्ट दावों के आधार पर शुरू हुए इस ट्रेंड ने सोशल मीडिया पर मीम्स, भ्रामक पोस्ट और साइबर ठगी के एक बड़े जाल को जन्म दे दिया है. कई निर्दोष महिलाओं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को इस वीडियो से जोड़कर फर्जी तरीके से बदनाम किया जा रहा है. यह भी पढ़ें: 19-Minute 34-Second Viral Video Link: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा 19 मिनट 34 सेकेंड का वीडियो, जानें क्यों शेयर करना पड़ सकता है भारी
क्या है 19 मिनट 34 सेकंड का कथित वीडियो?
इंटरनेट पर किए जा रहे दावों के मुताबिक, यह वीडियो कथित तौर पर 19 मिनट 34 सेकंड लंबा है और इसमें एक युवा जोड़े के व्यक्तिगत क्षणों को रिकॉर्ड करने की बात कही जा रही है. कुछ यूजर्स इसे बिना सहमति के बनाया गया वीडियो बता रहे हैं, तो कुछ इसे एआई-जनरेटेड (AI-generated) बता रहे हैं.
साइबर विशेषज्ञों और पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस नाम से इंटरनेट पर फैलाए जा रहे ज्यादातर वीडियो पूरी तरह से फर्जी (Fake) और डीपफेक (Deepfake) तकनीक से बनाए गए हैं. इसके अलावा, "सीजन 2" या "सीजन 3" के नाम से फैलाए जा रहे एडिटेड क्लिप्स भी केवल व्यूज हासिल करने और भ्रम फैलाने का जरिया हैं.
वीडियो लिंक के नाम पर साइबर स्कैम का खतरा
साइबर पुलिस ने चेतावनी दी है कि इस कीवर्ड की लोकप्रियता का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने धोखाधड़ी का जाल बिछाया है. Telegram, WhatsApp और संदिग्ध वेबसाइटों पर "ओरिजिनल लिंक" (Original Link) देने के नाम पर जो यूआरएल (URL) बांटे जा रहे हैं, वे असल में मालवेयर (Malware) या फिशिंग (Phishing) लिंक्स हैं.
इन संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक करने से यूजर्स के मोबाइल या कंप्यूटर का एक्सेस हैकर्स के पास जा सकता है, जिससे वित्तीय धोखाधड़ी (बैंक बैलेंस खाली होना) और निजी डेटा चोरी होने का सीधा खतरा बना रहता है.
लिंक सर्च या फॉरवर्ड करने पर हो सकती है जेल (कानूनी प्रावधान)
भारतीय कानून में किसी भी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी आक्रामक या अश्लील सामग्री (Non-Consensual Intimate Imagery) को देखना, डाउनलोड करना या किसी भी माध्यम से फॉरवर्ड करना एक गंभीर दंडनीय अपराध है.
- सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 67: किसी भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने पर पहली बार में 3 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
- IT अधिनियम की धारा 67A: यौन रूप से स्पष्ट (Sexually explicit) सामग्री को प्रसारित करने पर 5 साल तक का कारावास और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
- भारतीय न्याय संहिता (BNS): नए आपराधिक कानूनों के तहत निजता के उल्लंघन (Voyeurism) और मानहानि से जुड़े कड़े प्रावधान लागू होते हैं.
प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि यदि कोई व्यक्ति इस तरह के वीडियो का निर्माण नहीं भी करता, केवल उसे ग्रुप्स में फॉरवर्ड या शेयर करता है, तब भी उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
एआई (AI) और डीपफेक का बढ़ता दुरुपयोग
यह मामला इंटरनेट पर तेजी से फैल रहे एआई-जनरेटेड कंटेंट और फर्जी जानकारियों के खतरों को एक बार फिर रेखांकित करता है. टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक फोटो और एआई टूल के जरिए किसी भी निर्दोष व्यक्ति का चेहरा मॉर्फ करके फर्जी क्लिप्स बनाई जा सकती हैं.
सलाह: किसी भी अज्ञात या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें. सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के किसी भी आक्रामक सामग्री को खोजना या शेयर करना कानूनी मुसीबत का कारण बन सकता है.













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