Pakistani Teacher-Student Viral Video: 'पाकिस्तानी टीचर-स्टूडेंट' के नाम से वायरल वीडियो का सच; AI क्लिप्स और खतरनाक फिशिंग लिंक को लेकर साइबर विशेषज्ञों की चेतावनी
सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर 'पाकिस्तानी टीचर और स्टूडेंट' के नाम से वायरल हो रहे वीडियो के पीछे साइबर जालसाजों का बड़ा नेटवर्क सामने आया है. जांच के अनुसार, ये वीडियो पूरी तरह स्क्रिप्टेड और एआई-मॉर्फ्ड हैं, जिनका इस्तेमाल यूजर्स का निजी डेटा चुराने, मैलवेयर इंस्टॉल करने और ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए क्लिकबेट के रूप में किया जा रहा है.
- Read in
- English
Pakistani Teacher-Student Viral Video: दक्षिण एशिया में सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्मों और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स पर पिछले कुछ दिनों से तथाकथित "पाकिस्तानी टीचर और स्टूडेंट वायरल वीडियो" (Pakistani Teacher-Student Viral Video) को लेकर सर्च और शेयर किए जा रहे लिंक्स में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हालांकि, फैक्ट-चेकिंग जांच और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि ये दावे पूरी तरह मनगढ़ंत, स्क्रिप्टेड और एआई (AI) तकनीक की मदद से तैयार किए गए हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी सनसनीखेज शीर्षकों और भ्रामक थंबनेल का सहारा लेकर इंटरनेट यूजर्स को क्लिकबेट (Clickbait) के जरिए ऐसे खतरनाक लिंक्स पर भेज रहे हैं, जिनका मकसद निजी डेटा चुराना और मैलवेयर इंस्टॉल कराना है. यह भी पढ़ें: Pakistani Teacher and Student Viral Video: 'पाकिस्तानी टीचर-स्टूडेंट' के नाम से वायरल वीडियो का सच; AI कंटेंट और खतरनाक फिशिंग लिंक को लेकर साइबर विशेषज्ञों की चेतावनी
स्क्रिप्टेड फुटेज और एआई डीपफेक का इस्तेमाल
फैक्ट-चेक जांच से पुष्टि हुई है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे इन वीडियो का किसी वास्तविक क्लासरूम या वास्तविक घटना से कोई संबंध नहीं है. असामाजिक तत्व व्यावसायिक एडल्ट वेबसाइटों या अन्य पुराने वीडियो फुटेज को भ्रामक शीर्षकों के साथ दोबारा प्रसारित कर रहे हैं.
इसके अलावा, साइबर शोधकर्ताओं ने पाया है कि जेनेरेटिव एआई टूल्स का उपयोग करके वीडियो के थंबनेल बदले जा रहे हैं और नकली ऑडियो व प्रिव्यू तैयार किए जा रहे हैं. इन एडिटेड क्लिप्स का मुख्य उद्देश्य लोगों में उत्सुकता जगाकर उनसे लिंक्स पर क्लिक करवाना होता है.
फिशिंग स्कैम और डेटा चोरी का गंभीर खतरा
इस वायरल ट्रेंड के साथ सबसे बड़ा जोखिम पोस्ट और ग्रुप्स में साझा किए जा रहे अज्ञात वेब लिंक्स (URLs) से जुड़ा है. ये लिंक किसी वीडियो तक ले जाने के बजाय यूजर्स को असुरक्षित थर्ड-पार्टी वेबसाइटों पर रीडायरेक्ट करते हैं:
- क्रेडेंशियल चोरी (Credential Harvesting): इन फर्जी वेब पेजों पर वीडियो देखने से पहले 'उम्र सत्यापन' (Age Verification) के नाम पर यूजर्स से उनके सोशल मीडिया या ईमेल आईडी और पासवर्ड मांगे जाते हैं, जिससे हैकर्स को अकाउंट्स का सीधा एक्सेस मिल जाता है.
- मैलवेयर और स्पाईवेयर डाउनलोड: असुरक्षित वेबसाइटों पर क्लिक करते ही बैकग्राउंड में अज्ञात एपीके (APK) फाइलें या हानिकारक सॉफ्टवेयर डाउनलोड हो जाते हैं, जो यूजर के फोन की निगरानी करने, कीस्ट्रोक्स रिकॉर्ड करने और ऑनलाइन बैंकिंग डिटेल्स चुराने में सक्षम होते हैं.
- अनचाहे पेड सब्सक्रिप्शन: कई मामलों में यूजर्स को जबरन विज्ञापन नेटवर्क से गुजारा जाता है या उनकी जानकारी के बिना प्रीमियम एसएमएस सेवाओं में नामांकित कर दिया जाता है, जिससे उनके मोबाइल बैलेंस से पैसे कटने लगते हैं.
संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक न करने की सख्त सलाह
डिजिटल अधिकार संगठनों और साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने आम जनता को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे संदिग्ध लिंक्स या अनधिकृत चैनलों से पूरी तरह दूर रहें. किसी भी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी पहचान या मॉर्फ्ड तस्वीरों को साझा करना आईटी एक्ट और डिजिटल गोपनीयता कानूनों के तहत दंडनीय अपराध है.
विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि जब भी सोशल मीडिया पर इस प्रकार के आपत्तिजनक या सनसनीखेज दावे दिखें, तो उन पर क्लिक करने या आगे फॉरवर्ड करने के बजाय संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तुरंत 'Report' करें ताकि ऐसे साइबर अपराधों पर रोक लगाई जा सके.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 18, 2026 01:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

