Fact Check: चित्रकूट देवांगना घाटी गैंगरेप के नाम पर वायरल वीडियो पर पुलिस का स्पष्टीकरण; भ्रामक खबर फैलाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई

सोशल मीडिया (X, फेसबुक और इंस्टाग्राम) पर देवांगना घाटी में हुई गैंगरेप की घटना से जोड़कर प्रसारित किया जा रहा एक वीडियो पूरी तरह असत्य और भ्रामक पाया गया है. चित्रकूट पुलिस ने नागरिकों से झूठी और भ्रामक जानकारी शेयर न करने की अपील करते हुए कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है.

फैक्ट चेक (Photo Credits: X)

चित्रकूट: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों—X (पूर्व में ट्विटर), फेसबुक और इंस्टाग्राम—पर चित्रकूट की देवांगना घाटी में हुई गैंगरेप की घटना से जोड़कर एक वीडियो तेजी से प्रसारित किया जा रहा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इंटरनेट पर साझा किया जा रहा संबंधित वीडियो पूर्णतः असत्य, भ्रामक और असत्यापित है.

पुलिस प्रशासन ने नागरिकों और सोशल मीडिया यूज़र्स को आगाह किया है कि बिना जांच-परख के ऐसे भ्रामक व संवेदनशील वीडियो शेयर करना कानूनन दंडनीय अपराध है. यह भी पढ़ें: Chitrakoot Gang-Rape: चित्रकूट गैंगरेप कांड के बाद महिला सुरक्षा पर उठे सवाल, अभिभावकों में बढ़ी चिंता

पुलिस प्रशासन का स्पष्टीकरण और चेतावनी

चित्रकूट पुलिस विभाग ने आधिकारिक बयान जारी कर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दावे का खंडन किया है. पुलिस के अनुसार, कुछ असामाजिक तत्व पुरानी या असंबंधित घटनाओं के वीडियो को हालिया घटना से जोड़कर सनसनी फैलाने और अफवाह का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया:

भ्रामक खबर फैलाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई

वास्तविक घटना और पुलिस की कार्रवाई

उल्लेखनीय है कि चित्रकूट के देवांगना क्षेत्र में बीते दिनों घटी वास्तविक आपराधिक घटना में पुलिस पहले ही त्वरित और कड़ी कार्रवाई कर चुकी है. पुलिस टीमों ने 48 घंटे के भीतर मुख्य आरोपियों की पहचान कर मुठभेड़ के बाद मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि अन्य सहयोगियों के खिलाफ विधिक प्रक्रिया जारी है.

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक मामले में वैधानिक कार्रवाई जारी है, ऐसे में जनता को किसी भी फर्जी या भ्रामक वीडियो के बहकावे में नहीं आना चाहिए.

सोशल मीडिया यूज़र्स के लिए एडवाइजरी

पुलिस और साइबर सेल ने आम जनता से अपील की है कि:

  1. किसी भी अनधिकृत या संदिग्ध वीडियो और खबर को बिना आधिकारिक पुष्टि के फॉरवर्ड न करें.
  2. संवेदनशील मामलों में केवल पुलिस और प्रशासनिक बुलेटिन पर ही विश्वास करें.
  3. अफवाह फैलाने वाले लिंक या पोस्ट की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को दें.

Share Now