Pakistani Teacher-Student Video: 'पाकिस्तानी टीचर और स्टूडेंट' वायरल वीडियो के नाम पर बड़ा ऑनलाइन स्कैम; फर्जी AI क्लिप्स और फिशिंग लिंक से डेटा चोरी का खतरा
सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर कथित 'पाकिस्तानी टीचर और स्टूडेंट वायरल वीडियो' के नाम से प्रसारित हो रहे लिंक और क्लिप्स के जरिए बड़े साइबर फ्रॉड और डेटा चोरी का खेल चल रहा है. फैक्ट-चेक और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन पोस्ट्स में इस्तेमाल की जा रही सामग्री या तो स्क्रिप्टेड है या जेनेरेटिव एआई (AI) द्वारा तैयार की गई फर्जी क्लिप है.
नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स (जैसे टेलीग्राम और वॉट्सऐप) पर पिछले कुछ दिनों से एक कथित 'पाकिस्तानी टीचर और स्टूडेंट वायरल वीडियो' (Pakistani Teacher-Student Viral Video) से जुड़े कीवर्ड्स और लिंक्स तेजी से शेयर किए जा रहे हैं. हालांकि, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और फैक्ट-चेकर्स की जांच में सामने आया है कि इस वायरल ट्रेंड के पीछे कोई वास्तविक घटना या लीक नहीं है, बल्कि यह उपयोगकर्ताओं का निजी डेटा और बैंकिंग क्रेडेंशियल्स चुराने के लिए तैयार किया गया एक सुनियोजित साइबर फिशिंग और मैलवेयर स्कैम है.
साइबर अपराधियों द्वारा लोगों की उत्सुकता का फायदा उठाकर सनसनीखेज और भ्रामक थंबनेल के साथ खतरनाक लिंक फैलाए जा रहे हैं, जिन पर क्लिक करते ही यूजर गंभीर ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं. यह भी पढ़ें: Pakistani Teacher and Student Viral Video: 'पाकिस्तानी टीचर-स्टूडेंट' के नाम से वायरल वीडियो का सच; AI कंटेंट और खतरनाक फिशिंग लिंक को लेकर साइबर विशेषज्ञों की चेतावनी
स्क्रिप्टेड फुटेज और AI से तैयार फर्जी क्लिप्स
जांच रिपोर्टों के अनुसार, इंटरनेट पर चल रहे इन वीडियो क्लिप्स का किसी स्कूल या क्लासरूम की वास्तविक घटना से कोई संबंध नहीं है:
- स्क्रिप्टेड कंटेंट का दुरुपयोग: जालसाज व्यावसायिक एडल्ट वेबसाइट्स या पुरानी स्क्रिप्टेड वीडियो क्लिप्स को काटकर भ्रामक शीर्षकों के साथ नए वीडियो के रूप में पेश कर रहे हैं.
- जेनेरेटिव एआई का इस्तेमाल: क्लिकबेट बढ़ाने के लिए जेनेरेटिव एआई (Generative AI) टूल्स का उपयोग करके फर्जी थंबनेल, ऑडियो ट्रैक और सनसनीखेज वीडियो प्रीव्यू बनाए जा रहे हैं ताकि यूजर्स बिना सोचे-समझे लिंक पर क्लिक कर दें.
फिशिंग लिंक पर क्लिक करने से क्या हैं बड़े खतरे?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इन पोस्ट्स में दिए गए लिंक्स किसी वीडियो तक नहीं ले जाते, बल्कि अज्ञात व असुरक्षित थर्ड-पार्टी वेबसाइट्स पर रीडायरेक्ट करते हैं। इससे निम्नलिखित खतरे उत्पन्न होते हैं:
- क्रेडेंशियल हार्वेस्टिंग (पासवर्ड चोरी): वीडियो दिखाने या उम्र सत्यापित करने (Age Verification) के नाम पर फर्जी लॉगिन पेज खोले जाते हैं, जहां सोशल मीडिया आईडी या ईमेल पासवर्ड दर्ज करते ही अकाउंट हैकर्स के कब्जे में चला जाता है.
- मैलवेयर और स्पायवेयर का खतरा: इन असुरक्षित वेबपेजों पर जाने से डिवाइस में बैकग्राउंड में ऑटोमैटिक दुर्भावनापूर्ण एपीके (Malicious APK) फाइलें डाउनलोड हो जाती हैं, जो कीस्ट्रोक्स रिकॉर्ड कर ऑनलाइन बैंकिंग और यूपीआई विवरण चुरा सकती हैं.
- प्रीमियम सब्सक्रिप्शन स्कैम: यूजर्स को जबरन भ्रामक विज्ञापनों के नेटवर्क में फंसाकर या अनजाने में प्रीमियम एसएमएस बिलिंग सेवाओं में सब्सक्राइब कराकर वित्तीय नुकसान पहुंचाया जाता है.
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी और कानूनी प्रावधान
डिजिटल राइट्स संगठनों और पुलिस साइबर सेल ने आम जनता को किसी भी असत्यापित या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने की सख्त सलाह दी है:
- फॉरवर्ड करने से बचें: किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक या गैर-सहमति वाली सामग्री (चाहे वह वास्तविक हो, स्क्रिप्टेड हो या एआई-जनरेटेड) को खोजना या आगे साझा करना सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम और डिजिटल गोपनीयता कानूनों के तहत दंडनीय अपराध है.
- रिपोर्ट करें: यदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे सनसनीखेज दावे या लिंक्स नजर आते हैं, तो उन पर क्लिक करने या फॉरवर्ड करने के बजाय सीधे प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट (Report) दर्ज कराएं.
अस्वीकरण: यह समाचार विशुद्ध रूप से साइबर सुरक्षा जागरूकता और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है. किसी भी प्रकार की गैर-सहमति वाली या आपत्तिजनक सामग्री को खोजना, देखना या साझा करना कानूनी रूप से प्रतिबंधित है.