FACT CHECK: रेलवे ट्रैक पर सोलर पैनल लगा रही भारत सरकार? सोशल मीडिया पर वायरल दावा निकला फर्जी, जानें सच्चाई
सोशल मीडिया पर हाल ही में एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया कि भारत में रेलवे ट्रैक के बीच में हटाए जा सकने वाले (removable) सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं.
FACT CHECK: सोशल मीडिया पर हाल ही में एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया कि भारत में रेलवे ट्रैक के बीच में हटाए जा सकने वाले (removable) सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं. इस पोस्ट में कहा गया कि यह काम एक भारतीय स्टार्टअप "Sun-Ways" कर रहा है, जो भारत की रेलवे को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है. पोस्ट में लिखा गया था कि इससे हर साल एक टेरावॉट-घंटा से ज्यादा बिजली उत्पन्न हो सकती है, जिससे 2 लाख से ज्यादा घरों को रोशनी दी जा सकेगी. दावा बहुत आकर्षक था लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग निकली.
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फैक्ट चेक में खुलासा
PTI की फैक्ट चेक टीम ने जब इस दावे की जांच की तो साफ हो गया कि यह खबर पूरी तरह से भ्रामक और झूठी है. असलियत यह है कि यह परियोजना भारत में नहीं, बल्कि स्विट्जरलैंड में चल रही है. और जिस "Sun-Ways" कंपनी का जिक्र हो रहा है, वह भी भारत की नहीं बल्कि स्विस स्टार्टअप है.
फैक्ट चेक टीम ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर को Google Reverse Image Search के जरिए खंगाला. उसी तस्वीर को स्विट्जरलैंड की न्यूज वेबसाइट swissinfo.ch की एक रिपोर्ट में पाया गया, जो अप्रैल 2025 में प्रकाशित हुई थी. रिपोर्ट में बताया गया था कि यह सोलर पैनल प्रोजेक्ट बटेस (Buttes) नामक स्विस शहर में ट्रायल के रूप में शुरू किया गया है.
भारतीय रेलवे से कोई संबंध नहीं
इसके अलावा, Indonesia Business Post की एक रिपोर्ट ने भी इस दावे की पुष्टि की कि यह प्रोजेक्ट स्विट्जरलैंड में चल रहा है और इसका भारत से कोई लेना-देना नहीं है.
PTI की टीम ने यह जानने के लिए भी खोजबीन की कि क्या भारतीय रेलवे ने कोई ऐसी योजना घोषित की है या भविष्य में ऐसा कोई प्रोजेक्ट लाने की बात कही है. लेकिन किसी भी विश्वसनीय स्रोत या खबर में ऐसा कोई संकेत नहीं मिला.
निष्कर्ष
यह दावा कि भारत में रेलवे ट्रैक के बीच में हटाए जा सकने वाले सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं, पूरी तरह गलत है. असल में यह प्रोजेक्ट स्विट्जरलैंड के Sun-Ways स्टार्टअप द्वारा चलाया जा रहा है और इसका भारत या भारतीय रेलवे से कोई संबंध नहीं है.
सोशल मीडिया पर झूठी सूचनाएं फैलाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है.