Pitru Paksha 2022: कब शुरू हो रहा है पितृपक्ष? जानें पितृपक्ष का महत्व!, कैसे और कब करें तर्पण? देखें श्राद्ध की 16 तिथियां!
हिंदी पंचांग के अनुसार अनंत चतुर्दशी पर गणपति बप्पा की विदाई के अगले दिन से पितृ पक्ष प्रारंभ हो जाता है. हिंदू धर्म में पितृपक्ष का बहुत महत्व है, क्योंकि इस दिन से तिथि अनुसार पितरों की मुक्ति के लिए उपयुक्त कार्य किये जाते हैं. इस पर्व का संदेश यही है कि दिवंगत होकर भी हमारे पूर्वज हमारे परिवार का हिस्सा हैं.
हिंदी पंचांग के अनुसार अनंत चतुर्दशी पर गणपति बप्पा की विदाई के अगले दिन से पितृ पक्ष प्रारंभ हो जाता है. हिंदू धर्म में पितृपक्ष का बहुत महत्व है, क्योंकि इस दिन से तिथि अनुसार पितरों की मुक्ति के लिए उपयुक्त कार्य किये जाते हैं. इस पर्व का संदेश यही है कि दिवंगत होकर भी हमारे पूर्वज हमारे परिवार का हिस्सा हैं. मान्यता है कि परिवार के दिवंगत सदस्य अपनी शांति के लिए बच्चों के पास आते हैं और बच्चों द्वारा किये गये उनकी शांति कर्म से प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देकर पितृलोक वापस चले जाते हैं. जिनके बच्चे दिवंगतों की सुध नहीं लेते, उनसे वे निराश होकर लौटते हैं, कहते हैं कि इस वजह से संतान पितृ दोष से पीड़ित रहता है, और जीवन में किसी भी कार्य को सफलता के साथ पूरी करने में असमर्थ रहता है. यहां बात करेंगे पितृपक्ष के महत्व का एवं जानें तिथिवार तर्पण की पूरी सूची!
पितृ पक्ष का महत्व
भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक के 16 दिवसीय पर्व को पितृपक्ष के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि दिवंगत हो चुके माता-पिता, दादा-दादी आदि जिन्हें पितर की श्रेणी में रखा जाता है, पितृलोक से अपने पारिवारिक सदस्यों के घर आवास करते हैं, और तर्पण एवं श्राद्ध आदि कर्म की उम्मीद करते हैं, इससे उन्हें शांति प्राप्त होती है. 16 दिन के पश्चात पितर ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ वापस चले जाते हैं. इस तरह जीवित सदस्य पितृ-ऋण से मुक्त हो जाते हैं, लेकिन जिनके माता-पिता जीवित हैं, या जिन स्त्रियों के सास-ससुर जीवित हैं, उनके ऊपर पितृपक्ष के नियम लागू नहीं होते. इस बार पितृ पक्ष 10 सितंबर से 25 सितंबर तक रहेगा.
पितृपक्ष में ऐसे करें पितरों की सेवा
पितृ पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या श्राद्ध (अंतिम दिन) तक पितरों को जल अर्पित करें. जल में काला तिल मिलायें. हाथ में कुश लेकर दोपहर के समय दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके जल अर्पित करें. जिस तिथि में किसी का निधन होता है, उसी तिथि में निर्धनों को एवं गाय, कुत्ता तथा कौवे को भोजन कराने के बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए. नवमी तिथि (19 सितंबर, 2022) को विवाहित महिलाएं अपनी सास का तर्पण करती हैं, और अंतिम यानी अमावस्या के दिन मुख्य रूप से सभी अपने पिता के नाम तर्पण करते हैं तथा कौवा, गाय और कुत्ते को भोजन करवाते हैं, इसके पश्चात ही घर के लोग भोजन करते हैं. हिंदी पंचांग के अनुसार अनंत चतुर्दशी पर गणपति बप्पा की विदाई के अगले दिन से पितृ पक्ष प्रारंभ हो जाता है. हिंदू धर्म में पितृपक्ष का बहुत महत्व है, क्योंकि इस दिन से तिथि अनुसार पितरों की मुक्ति के लिए उपयुक्त कार्य किये जाते हैं. इस पर्व का संदेश यही है कि दिवंगत होकर भी हमारे पूर्वज हमारे परिवार का हिस्सा हैं. यह भी पढ़ें : Jivitputrika Vrat 2022: कब है जीवित्पुत्रिका व्रत? जानें हिंदू धर्म के इस सबसे कठिन व्रत का महात्म्य, मुहूर्त, पूजा-विधि एवं पौराणिक कथा!
पितृ पक्ष का शुभ मुहूर्त एवं इसके नियम
हिंदू धर्म के अनुसार श्राद्ध-तर्पण आदि करने का शुभ समय कुतुप मुहूर्त और रोहिना मुहूर्त होता है. ये दोनों शुभ मुहूर्त अपराह्न काल तक चलता है. श्राद्ध क्रिया के पश्चात तर्पण क्रिया की जाती है. तर्पण की क्रिया सूर्य की तरफ मुंह करके शुद्ध कुश से करते हैं. पितरों (पुरुष सदस्य) का श्राद्ध उनकी मृत्यु तिथियों के अनुसार किया जाता है. उदाहरण अगर किसी की मृत्यु 13 अगस्त के दिन हुई है, और हिंदी कैलेंडर के अनुरूप वह तृतीया तिथि है, तो पितृ पक्ष काल की तृतीया के दिन पितर का श्राद्ध करते हैं. अब आइये जानें कुतुप एवं रोहिना मुहूर्त कब से कब तक रहेगा. उसी काल में श्राद्ध अनुष्ठान करना चाहिए.
कुतुप मुहूर्तः 12.11 P.M. से 01.00 P.M. तक
रोहिना मुहूर्तः 01.00 P.M. से 01.49 P.M. तक
अपराह्न मुहूर्तः 01.49. P.M. से 04.17 P.M. तक
पितृपक्ष में श्राद्ध की तिथियां!
प्रतिपदा श्राद्ध: 10 सितंबर 2022, शनिवार
द्वितीया श्राद्ध: 11 सितंबर 2022, रविवार
तृतीया श्राद्ध: 12 सितंबर 2022, सोमवार
चतुर्थी श्राद्ध: 13 सितंबर 2022, मंगलवार
पंचमी श्राद्ध: 14 सितंबर 2022, बुधवार
षष्ठी श्राद्ध: 15 सितंबर 2022, बृहस्पतिवार
सप्तमी श्राद्ध: 16 सितंबर 2022, शुक्रवार
अष्टमी श्राद्ध: 18 सितंबर 2022, रविवार
नवमी श्राद्ध: 19 सितंबर 2022, सोमवार
दशमी श्राद्ध: 20 सितंबर 2022, मंगलवार
एकादशी श्राद्ध: 21 सितंबर 2022, बुधवार
द्वादशी श्राद्ध: 22 सितंबर 2022, बृहस्पतिवार
त्रयोदशी श्राद्ध: 23 सितंबर 2022, शुक्रवार
चतुर्दशी श्राद्ध: 24 सितंबर 2022, शनिवार
अमावस्या श्राद्ध: 25 सितंबर 2022, रविवार
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 09, 2022 05:12 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

