World Aids Day 2019: वर्ल्ड एड्स डे 1 दिसंबर को, आखिर क्यों और कैसे हुई इस दिवस की शुरुआत, जानें इसका इतिहास और महत्व

अधिकांश लोग एचआईवी और एड्स को एक ही बीमारी समझने की बड़ी भूल कर जाते हैं. बता दें कि एचआईवी एक वायरस है जो एड्स नाम की बीमारी को जन्म दे सकता है, इसलिए इस बीच के अंतर को समझाने और इस जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है

विश्व एड्स दिवस 2019 (Photo Credits: Pixabay)

World Aids Day 2019: आमतौर पर एचआईवी/एड्स (HIV/AIDS) का नाम सुनते ही लोगों के हावभाव बदल जाते हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण है लोगों के बीच इस जानलेवा बीमारी के बारे में जागरूकता की कमी होना. अधिकांश लोग एचआईवी (HIV) और एड्स (AIDS) को एक ही बीमारी समझने की बड़ी भूल कर जाते हैं. बता दें कि एचआईवी एक वायरस है जो एड्स नाम की बीमारी को जन्म दे सकता है, इसलिए इसके अंतर को समझाने और इस जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस (World Aids Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य एचआईवी संक्रमण की वजह से होनेवाली बीमारी एड्स के बारे में जागरुकता बढ़ाना है.

दरअसल, एड्स वर्तमान समय की सबसे बड़ी और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है. यूनिसेफ (UNICEF) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में करीब 36.9 मिलियन लोग एचआईवी के शिकार हो चुके हैं, जबकि भारत सरकार द्वारा जारी आंकडों के मुताबिक, भारत में एचआईवी के करीब 2.1 मिलियन मरीज हैं.

विश्व एड्स दिवस का इतिहास

साल 1987 में जेम्स डब्ल्यू बुन (James W Bunn) और थॉमस नेटर (Thomas Netter) नाम के व्यक्ति ने सबसे पहले विश्व एड्स दिवस मनाया था. दरअसल, जेम्स डब्ल्यू बुन और थॉमस नेटर विश्व स्वास्थ्य संगठन में एड्स पर ग्लोबल कार्यक्रम के लिए जिनेवा, स्विटजरलैंड में अधिकारियों के रूप में नियुक्त हुए थे. उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के ग्लोबल प्रोग्राम ऑन एड्स के डायरेक्टर जोनाथन मान के सामने विश्व एड्स दिवस मनाने का सुझाव रखा. यह सुझाव जोनाथन को अच्छा लगा और उन्होंने 1 दिसंबर 1988 को एड्स दिवस मनाए जाने की घोषणा की. इसके बाद से हर साल 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाने लगा.

कैसे होता है एचआईवी/एड्स ?

एचआईवी/एड्स के लक्षण

गौरतलब है कि एचआईवी/ एड्स का पूरी तरह से इलाज असंभव है, लेकिन दवाइयों और एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी की मदद से मरीज अधिक आयु तक जी सकता है. इस रोग से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है इसके प्रति जागरुकता और सावधानी, इसलिए दुनिया भर के लोगों को एचआईवी/एड्स के प्रति जागरुक करने के लिए 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है. इस दिन जन जागरुकता के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और इस बीमारी के बारे में विस्तार से बताया जाता है.

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