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किडनी की समस्याएं बढ़ाती हैं स्ट्रोक का खतरा: विशेषज्ञ

विशेषज्ञों ने कहा कि हाई ब्‍लड प्रेशर, हाई ब्‍लड शुगर, मोटापा और असामान्य कोलेस्ट्रॉल जैसे मेटाबोलिक रिस्क फैक्टर किडनी की समस्याओं से जुड़े हैं और यह किडनी रोग के मरीजों में स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाते हैं.

किडनी की समस्याएं बढ़ाती हैं स्ट्रोक का खतरा: विशेषज्ञ
Representational Image | Pixabay

नई दिल्ली, 4 नवंबर (आईएएनएस). विशेषज्ञों ने कहा कि हाई ब्‍लड प्रेशर, हाई ब्‍लड शुगर, मोटापा और असामान्य कोलेस्ट्रॉल जैसे मेटाबोलिक रिस्क फैक्टर किडनी की समस्याओं से जुड़े हैं और यह किडनी रोग के मरीजों में स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाते हैं. क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) स्वतंत्र रूप से स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाने के लिए जानी जाती है. यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित एक हालिया शोध से पता चला है कि किडनी फेलियर वाले लोगों में दिल का दौरा या स्ट्रोक होने की संभावना कई गुना अधिक होती है. अध्ययन से पता चला कि परिणामस्वरूप उनके मरने का जोखिम भी अधिक है.

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इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के न्यूरोलॉजी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. पीएन रेनजेन ने आईएएनएस को बताया, ''कम ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट वाले मरीजों (यह दर्शाता है कि गुर्दे अपशिष्ट को ठीक से फ़िल्टर नहीं कर रहे हैं) को स्ट्रोक का अनुभव होने की संभावना 40 प्रतिशत अधिक होती है. इसके अलावा सीकेडी की एक सामान्य विशेषता प्रोटीनुरिया (मूत्र में अतिरिक्त प्रोटीन) स्ट्रोक के जोखिम को लगभग 70 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है.''

रेनजेन ने कहा कि सी.के.डी. मेटाबोलिक सिंड्रोम और स्ट्रोक के बीच अंतर्संबंध महत्वपूर्ण और जटिल है. रेनजेन ने कहा कि सीकेडी, मेटाबॉलिक सिंड्रोम (मेट्स) और स्ट्रोक के बीच अंतर्संबंध महत्वपूर्ण और जटिल है.

मोटापा, उच्च रक्तचाप, डिस्लिपिडेमिया और इंसुलिन प्रतिरोध से चिह्नित मेटएस सी.के.डी. और स्ट्रोक सहित हृदय संबंधी बीमारियों के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है. शोध से पता चलता है कि मेट्स से पीड़ित व्यक्तियों में सीकेडी विकसित होने का खतरा उन लोगों की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक होता है, जो इस डिजीज से पीड़ित नहीं हैं.

रेनजेन ने बताया, "इन स्थितियों को जोड़ने वाले तंत्र में ऑक्सीडेटिव तनाव, सूजन और एंडोथेलियल डिसफंक्शन शामिल हैं, जो किडनी के कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाते हैं."

पी. डी. हिंदुजा अस्पताल और मेडिकल रिसर्च सेंटर के न्यूरोलॉजी सलाहकार डॉ. दर्शन दोशी ने आईएएनएस को बताया कि पुरानी सूजन, इंसुलिन प्रतिरोध और संवहनी क्षति स्ट्रोक और मेटाबोलिक सिंड्रोम के बीच संबंध स्थापित करती है.

दोशी ने कहा, "मेटाबोलिक सिंड्रोम वाले व्यक्तियों को अक्सर स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है और यह क्रोनिक किडनी रोग वाले लोगों में और भी अधिक बढ़ जाता है, विशेष रूप से डायलिसिस पर रहने वाले रोगियों में यह खतरा अधिक होता है, जो इस्कीमिक और हेमोरेजिक स्ट्रोक दोनों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं.'' विशेषज्ञों ने जोखिम को कम करने के लिए जीवनशैली में बदलाव के साथ ब्‍लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और वजन कम करने को कहा है.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 04, 2024 10:38 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).