खांसी, बुखार को न समझे सामान्य बीमारी, दिखने लगे ये लक्षण तो फौरन कराएं स्वाइन फ्लू की जांच
अगर किसी व्यक्ति को खांसी, गले में दर्द, बुखार, सिरदर्द, मतली और उल्टी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय फौरन स्वाइन फ्लू की जांच करानी चाहिए. इस स्थिति में दवाई केवल चिकित्सक की निगरानी में ही ली जानी चाहिए.
नई दिल्ली : अगर किसी व्यक्ति को खांसी, गले में दर्द, बुखार, सिरदर्द, मतली और उल्टी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय फौरन स्वाइन फ्लू की जांच करानी चाहिए. इस स्थिति में दवाई केवल चिकित्सक की निगरानी में ही ली जानी चाहिए. हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने एक बयान में कहा है कि स्वाइन फ्लू में खांसी या गले में खरास के साथ 1000 फारेनहाइट से अधिक तक बुखार हो सकता है. निदान की पुष्टि आरआरटी या पीसीआर तकनीक से किए गए लैब टैस्ट से होती है.
उन्होंने कहा कि हल्का फ्लू या स्वाइन फ्लू बुखार, खांसी, गले में खरास, नाक बहने, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, ठंड और कभी-कभी दस्त और उल्टी के साथ आता है. हल्के मामलों में, सांस लेने में परेशानी नहीं होती है. लगातार बढ़ने वाले स्वाइन फ्लू में छाती में दर्द के साथ उपरोक्त लक्षण, श्वसन दर में वृद्धि, रक्त में ऑक्सीजन की कमी, कम रक्तचाप, भ्रम, बदलती मानसिक स्थिति, गंभीर निर्जलीकरण और अंतर्निहित अस्थमा, गुर्दे की विफलता, मधुमेह, दिल की विफलता, एंजाइना या सीओपीडी हो सकता है.
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि गर्भवती महिलाओं में, फ्लू भ्रूण की मौत सहित अधिक गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है. हल्के-फुल्के मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन गंभीर लक्षण होने पर मरीज को भर्ती करने की आवश्यकता हो सकती है. यह भी पढ़ें: दिल्लीवासियों पर मंडरा रहा है स्वाइन फ्लू का खतरा, H1N1 वायरस के कई मामले आए सामने
उन्होंने कहा कहा कि 23-27 अक्टूबर तक यहां तालकटोरा स्टेडियम में 25वें परफेक्ट हेल्थ मेले में स्वाइन फ्लू पर चर्चा होगी. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सितंबर माह में बेंगलुरू में सकारात्मक एच1एन1 मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है. अक्टूबर के पहले सप्ताह के दौरान 68 सकारात्मक मामले सामने आए थे, जो कुछ ही दिनों में 21 और बढ़ गए। ऐसे में सावधानी सबसे बड़ा उपाय है.
गौरतलब है कि स्वाइन फ्लू इन्फ्लूएंजा-ए वायरस के एक स्ट्रेन के कारण होती है और सुअरों से इंसानों में संचरित होती है. समय पर इलाज नहीं होने पर एच1एन1 घातक भी हो सकता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 21, 2018 05:02 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

