World Toilet Day 2023: आज दुनिया भर में मनाया जाएगा विश्व शौचालय दिवस! जानें भारत में शौचालयों की क्या है स्थिति!

साल 2011 की जनगणना के अनुसार करीब 1.1 अरब लोगों में से आधे से अधिक लोग भारत के रहने वाले थे, क्योंकि 18.6 प्रतिशत घरों में शौचालय नहीं थे. लेकिन साल 2013 के पश्चात खुले में शौच को समाप्त करने में तेजी से प्रगति हुई है. स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) ने शौचालय तक पहुंच और उनके इस्तेमाल के बारे में लाखों लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाने का काम किया.

विश्व शौचालय दिवस (File Photo)

साफ-सफाई प्रत्येक मनुष्य का बुनियादी अधिकार है. स्थान कोई भी हो, उसकी स्वच्छता सर्वोपरि है. यह उपयुक्त समय है, जब आम लोगों को समझना होगा कि खेत-खलिहान, रेलवे ट्रैक अथवा किसी भी खुले स्थान में शौच करना संक्रामक एवं गंभीर रोगों को आमंत्रण करने जैसा है, जहां तक भारत की बात है तो विगत कुछ वर्षों से शहरी क्षेत्रों में थोड़ा सुधार आया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी खुले में शौच और बुनियादी स्वच्छता का अभाव देखा जा सकता हैविश्व शौचालय दिवस का मूल उद्देश्य शौचालयों की स्थिति में सुधार लाने, खुले शौचालयों पर रोक एवं आम लोगों को स्वास्थ्य की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना है. विश्व शौचालय दिवस शौचालयों तक उचित पहुंच की आवश्यकता और दैनिक जीवन में स्वच्छता के महत्व को परिभाषित करता है. आइये बात करते हैं, प्रत्येक वर्ष 19 नवंबर को मनाए जाने वाले विश्व शौचालय दिवस से संबंधित कुछ कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर..

विश्व शौचालय दिवस का इतिहास

सिंगापुर के एक परोपकारी व्यक्ति जैक सिम ने 19 नवंबर 2001 को विश्व शौचालय संगठन की स्थापना की थी, उनके इस सामाजिक उत्थान के प्रयास की सराहना तो दुनिया भर के लोगों ने की थी. लेकिन संयुक्त राष्ट्र संगठन ने साल 2013 इस दिवस विशेष को मान्यता देते हुए 19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस घोषित किया. इसी साल सिंगापुर सरकार और विश्व शौचालय संगठन ने सिंगापुर के पहले संयुक्त राष्ट्र संकल्प का नेतृत्व किया, जिसे सभी के लिए स्वच्छता’ की जरूरत पर प्रकाश डाला गया. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 67वें सत्र में 122 देशों द्वारा इस प्रस्ताव पर स्वीकृति की मुहर लगाई.

विश्व शौचालय दिवस का महत्व

  विश्व शौचालय दिवस सेलिब्रेशन का मुख्य उद्देश्य स्वच्छतासुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति शहर से ग्रामीण अंचल तक के लोगों को जागरूक करना है. इसके साथ-साथ खुले में शौच के दरम्यान महिलाओं के यौन शोषण के बढ़ते ग्राफ पर भी नियंत्रण करना है. इसके साथ ही खुले में शौच से संक्रमण एवं विषैले कीड़े-मकोड़े के काटने का भी खतरा रहता है. इससे बचने के लिए जागरूक होना जरूरी है. यही नहीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देते थे, उन्होंने अपने एक वक्तव्य में कहा भी था कि स्वच्छता ही सेवा है, इसलिए देश भर में गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत मिशन चलाया जाता है.

खुले में शौचालय और भारत

साल 2011 की जनगणना के अनुसार करीब 1.1 अरब लोगों में से आधे से अधिक लोग भारत के रहने वाले थे, क्योंकि 18.6 प्रतिशत घरों में शौचालय नहीं थे. लेकिन साल 2013 के पश्चात खुले में शौच को समाप्त करने में तेजी से प्रगति हुई है. स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) ने शौचालय तक पहुंच और उनके इस्तेमाल के बारे में लाखों लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाने का काम किया. साल 2014 से अब तक करीब 50 करोड़ लोगों ने खुले में शौच करना बंद कर दिया हैजो 55 करोड़ से घट कर अब करोड़ हो गया है. 

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