Vat Purnima 2026 Messages: हैप्पी वट पूर्णिमा! सखी-सहेलियों संग शेयर करें ये चुनिंदा हिंदी Shayaris, WhatsApp Wishes और GIF Greetings
अखंड सौभाग्य का पावन त्योहार वट पूर्णिमा इस साल 29 जून 2026 को मनाया जा रहा है. महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह है. इस खास मौके पर सुहागन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं. इस पावन अवसर पर आप अपने प्रियजनों और सहेलियों को ये शानदार हिंदी विशेज, शायरियां और फोटो मैसेजेस भेजकर बधाई दे सकते हैं.
Vat Purnima 2026 Messages In Hindi: हिंदू धर्म में सुहागन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाने वाला वट पूर्णिमा (Vat Purnima) का व्रत इस वर्ष सोमवार, 29 जून 2026 को मनाया जा रहा है. ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार मुख्य रूप से महाराष्ट्र (Maharashtra), गुजरात (Gujarat) और दक्षिण भारतीय राज्यों में आस्था और समर्पण के साथ मनाया जाता है. इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और सोलह श्रृंगार करके वट वृक्ष (बरगद के पेड़) की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं. इस पावन सुहाग पर्व के मौके पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर अपनों को बधाई देने के लिए शुभकामना संदेशों, जीआईएफ (GIF) और शायरियों का चलन काफी बढ़ गया है.
ज्येष्ठ अमावस्या और पूर्णिमा के व्रतों का क्षेत्रीय महत्व
धार्मिक मान्यताओं और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार, पति की लंबी उम्र के लिए रखे जाने वाले इस व्रत को साल में दो बार अलग-अलग तिथियों पर मनाने का विधान है. ज्येष्ठ मास की अमावस्या को पड़ने वाले व्रत को 'वट सावित्री' कहा जाता है, जो उत्तर भारत के राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और ओडिशा में बेहद लोकप्रिय है.
इसके ठीक 15 दिन बाद ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन आने वाले व्रत को 'वट पूर्णिमा' के नाम से जाना जाता है. इस त्योहार को पश्चिमी और दक्षिणी भारत में सुहागन महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ मनाती हैं. हालांकि दोनों ही व्रतों का महत्व, पूजन विधि और पौराणिक कथा पूरी तरह एक समान हैं.
क्या है पौराणिक कथा और बरगद के पेड़ की पूजा का नियम?
प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, माता सावित्री ने अपने अटूट संकल्प और पतिव्रता धर्म के बल पर मृत्यु के देवता यमराज को पराजित किया था और अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थीं. तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है.
इस दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि के बाद नए और सुंदर वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद पूर्ण श्रृंगार कर वट वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा की जाती है. पूजा के दौरान बरगद के पेड़ को शुद्ध जल, कच्चा दूध, रोली और अक्षत अर्पित किए जाते हैं. इसके बाद सूत के कच्चे धागे को पेड़ के तने पर लपेटते हुए सात बार परिक्रमा की जाती है और सत्यवान-सावित्री की कथा सुनी जाती है. धार्मिक दृष्टि से वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है, इसलिए इसकी पूजा करने से वैवाहिक जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं.