स्विस बैंक की पोल पट्टी खोलने वाले जर्मन वकील पर स्विटजरलैंड में मुकदमा
टैक्स चुकाए बिना ही उसका रिटर्न डकार लिया गया.
टैक्स चुकाए बिना ही उसका रिटर्न डकार लिया गया. यूरोप में इसी तरह से करीब 140 अरब यूरो की धांधली हुई. इस पर्दाफाश करने वाले जर्मन वकील पर अब स्विट्जरलैंड मुकदमा बहाल कर रहा है. जर्मन वकील टेंशन फ्री हैं.एकार्ट जाइथ, जर्मनी में एक जाने माने और लोकप्रिय कॉरपोरेट वकील हैं. कंपनियों को टैक्स, पॉलिसी और श्रम कानूनों के मामले में सलाह मशविरा देने वाले जाइथ को टैक्स चोरों का भांडा फोड़ने वाले साहसी वकील के तौर पर भी देखा जाता है.
अब स्विट्जरलैंड में 69 साल के इसी वकील के खिलाफ मुकदमा शुरू होने जा रहा है. स्विट्जरलैंड के सुप्रीम कोर्ट ने इसकी अनुमति दे दी है. यह जानकारी सामने आने के बाद जाइथ ने कहा कि वह इस फैसले से बिल्कुल भी हैरान नहीं हैं.
स्विस प्रशासन का आरोप है कि जाइथ ने आर्थिक जासूसी करते हुए स्विस बैंक के इंटरनल डॉक्यूमेंट्स जर्मन अधिकारियों को दिए. इन दस्तावेजों के आधार पर 2012 में जर्मनी और यूरोप में टैक्स रिटर्न धांधली के एक बड़े मामले का पर्दाफाश हुआ. लाभांश कर (डिविडेंड टैक्स) से जुड़ी इस धांधली ने यूरोप की अलग अलग ट्रेजरियों को करीब 140 अरब यूरो की चपत लगाई. जर्मनी को 30 अरब यूरो से ज्यादा का नुकसान हुआ.
कैसे हो रही थी टैक्स धांधली
असल में 2012 से पहले टैक्स सिस्टम में एक बड़ी कमजोरी मौजूद थी. तब टैक्स सर्टिफिकेट जारी होते थे और इनसे दावा किया जा सकता था कि कंपनी या शेयरों के लाभांश पर टैक्स चुकाया गया है. बैंक, शेयर कारोबारी और निवेशक, लाभांश भुगतान की तारीख के आस पास बहुत ही जटिल तरीके से स्टॉक ट्रेडिंग करते थे. इस दौरान हुए सौदों के दस्तावेज से पता ही नहीं चलता था कि शेयर का असली मालिक कौन है.
डिविडेंड के साथ और डिविडेंड के बिना वाले, शेयरों की खरीद फरोख्त इतनी तेजी से होती थी कि टैक्स विभाग, रास्ता भटक जाता था. इसके बाद कई मामलों में एक ही स्टॉक से हुए फायदे पर चुकाए टैक्स को लेकर दो पार्टियों ने कैपिटल गेन टैक्स का रिटर्न फाइल किया. दोनों को टैक्स रिटर्न का पैसा मिला, जबकि हकीकत में कैपिटल गेन टैक्स सिर्फ एक ही पार्टी ने या कुछ मामलों में किसी ने भी नहीं चुकाया था. इस धांधली को 'कम-एक्स फ्रॉड स्कैंडल' नाम दिया गया.
2012 में जर्मन प्रशासन ने टैक्स सिस्टम में मौजूद इस छेद को बंद कर दिया. लेकिन तब तक हुई जांच में पता चला कि जर्मनी को करीब 36 अरब यूरो का नुकसान हो चुका है. यह जर्मन इतिहास की सबसे बड़ी टैक्स धांधली है. फ्रांस, इटली, डेनमार्क और बेल्जियम को भी इस तरीके से बड़ी चपत लगाई गई.
जाइथ ने कैसे खोली स्विस स्टाइल टैक्स चोरी की पोल
स्विट्जरलैंड के कानून के तहत बैंक, अपने ग्राहकों की वित्तीय सूचना और पहचान को गोपनीय रखने के लिए बाध्य हैं. 2013 में जर्मन फॉर्मेंसी स्टोर कारोबारी एरविन म्युलर के केस की पैरवी करते समय एक स्विस बैंक के ऐसे ही दस्तावेज जाइथ के हाथ लग गए. स्विस बैंक की कम-एक्स डीलों की वजह से म्युलर को लाखों यूरो का नुकसान हुआ था और जाइथ इसी केस को देख रहे थे.
जांच के दौरान पता चला कि म्युलर ने स्विट्जरलैंड के बैंक जाराजिन के एक फंड में निवेश किया था. इस पैसे को बैंक ने म्युलर को बिना बताए कम-एक्स लेन देनों में गैरकानूनी ढंग से इनवेस्ट किया. जब इन लेन देनों को पता चला को म्युलर को लाखों यूरो का नुकसान झेलना पड़ा. दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान, कई देशों तक फैले अरबों यूरो की धांधली का पता चला.
स्विस सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जर्मन शहर श्टुटगार्ट में रहने वाले जाइथ ने कहा, "बहुत ही गंभीर अपराधों की जांच, जिसमे गोपनीय जानकारी रखने वाले भी शामिल हों, इसकी कामना भी की जाती है और यूरोपीय कानूनी तंत्र के तहत इसकी अनुमति भी है. मुझे नहीं लगता कि स्विट्जरलैंड खुद, यूरोपीय लीगल सिस्टम से बाहर रहना पसंद करेगा."
ओबामा और यूरोपीय संघ ने कैसे टैक्स चोरी की पनाहगाह रहे देशों को कसा
1713 में जिनेवा के प्रशासन ने एक नियम बनाया कि वे अपने ग्राहकों की जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखेंगे. इसके बाद यूरोप के राजा और कुलीन वर्ग के बीच स्विट्जरलैंड पैसा जमा करने की सबसे सुरक्षित तिजोरी बन गया. 1934 में स्विट्जरलैंड ने आधिकारिक रूप से इस नियम को बैंक सीक्रेसी कानून में बदल दिया. इसके बाद अगले 70 बरसों में स्विट्जरलैंड की कुल बैंक संपत्ति का आधा हिस्सा विदेशी खाताधारकों का बैंक बैलेंस था. स्विट्जरलैंड की देखा देखी लक्जमबर्ग और लिष्टेनश्टाइन जैसे यूरोपीय देशों ने भी की और इन देशों को टैक्स हेवेन कहा जाने लगा.
सन 2000 के बाद स्विस बैंकों ने दुनिया भर के अमीरों के बीच यह प्रचार शुरू किया कि उनके बैंक में रखे धन की जानकारी ग्राहक के अलावा और किसी को नहीं होती है. सीक्रेसी कानून और अमीरों के बीच ऐसे प्रचार ने स्विट्जरलैंड को टैक्स चोरी और काले धन का मुख्य अड्डा बना दिया. 2007 के आस पास अमेरिकी अधिकारियों ने स्विटजरलैंड में पैसा छुपाने वाले अमेरिकियों की जांच शुरू की. इसमें सामने आए मामलों की गंभीरता को देखते हुए 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने FATCA नाम का कानून बनाया. इसके तहत सभी विदेशी संस्थानों को अमेरिकी करदाताओं से जुड़ी जानकारी अमेरिका की इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (IRS) को देनी ही होगी.
काले धन और टैक्स चोरी के मामले में ओबामा का साथ तत्कालीन जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल व अन्य यूरोपीय नेताओं ने भी दिया. इन पक्षों ने आनाकानी कर रही स्विस सरकार पर इतना दबाव डाला कि स्विट्जरलैंड को कई विदेशी नागरिकों से जुड़ी जानकारी देने पर सहमत होना पड़ा.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 23, 2026 10:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

