Varuthini Ekadashi 2025 Wishes: शुभ वरुथिनी एकादशी! प्रियजनों संग शेयर करें ये भक्तिमय हिंदी Quotes, WhatsApp Message और Facebook Greetings
वरुथिनी एकादशी के व्रत से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और मृत्यु के बाद विष्णुलोक में स्थान प्राप्त होता है. इस व्रत को करने से कन्यादान और अनेक वर्षों के तप के समान पुण्य प्राप्त होता है.यह एकादशी सौभाग्य देने वाली और समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी जाती है. ऐसे में इस खास अवसर पर आप इन भक्तिमय विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स को शेयर कर वरुथिनी एकादशी की शुभकामनाएं दे सकते हैं.
Varuthini Ekadashi 2025 Wishes in Hindi: हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi) का व्रत किया जाता है, जबकि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस साल 24 अप्रैल 2025 को वरुथिनी एकादशी मनाई जा रही है. इस दिन श्रीहरि के भक्त जीवन में सुख-शांति और समृद्धि पाने के लिए भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी (Mata Lakshmi) की पूजा करते हैं. कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखकर श्रीहरि और माता लक्ष्मी की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस दिन जल के दान का विशेष महत्व बताया जाता है, क्योंकि इस दौरान गर्मी चरम पर होती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन जल से भरा घड़ा दान करने और राहगीरों के लिए सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ लगवाने से कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं, साथ ही लक्ष्मी-नारायण की कृपा प्राप्त होती है.
वरुथिनी एकादशी के व्रत से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और मृत्यु के बाद विष्णुलोक में स्थान प्राप्त होता है. इस व्रत को करने से कन्यादान और अनेक वर्षों के तप के समान पुण्य प्राप्त होता है.यह एकादशी सौभाग्य देने वाली और समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी जाती है. ऐसे में इस खास अवसर पर आप इन भक्तिमय विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स को शेयर कर वरुथिनी एकादशी की शुभकामनाएं दे सकते हैं.





वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए, फिर द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को भोजन कराने और दक्षिणा देने के बाद अपने व्रत का पारण करना चाहिए. इस व्रत को करने वाले भक्तों को दशमी तिथि की रात में सात्विक भोजन करना चाहिए. व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वस्छ वस्त्र धारण करें, फिर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें.
एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद दीप प्रज्जवलित कर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें, फिर भगवान विष्णु को गंगाजल से स्नान कराएं और उन्हें चंदन, अक्षत, पुष्प अर्पित करते हुए तुलसी दल चढ़ाएं. फिर फल, मिष्ठान्न इत्यादि का भोग लगाएं. पूजन के दौरान विष्णु सहस्त्रनाम, विष्णु स्तोत्र या गीता का पाठ करें, आखिर में आरती उतारें.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 24, 2025 06:00 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

