Tulsidas Jayanti 2025 Messages in Hindi: मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के भक्त, महाकवि और संत गोस्वामी तुलसीदास जी (Goswami Tulsidas) की इस साल 528वीं जयंती मनाई जा रही है. हिंदू पंचांग के अनुसार, गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती (Goswami Tulsidas Jayanti) हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है, जबकि ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से इस साल 31 जुलाई 2025 को तुलसीदास जयंती मनाई जा रही है. अपनी रचनाओं के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन से लोगों को अवगत कराने वाले महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म संवत 1554 में सावन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के चित्रकूट (Chitrakoot) स्थित राजापुर गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम आत्माराम दुबे और माता का नाम हुलसी थी. उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेकों ग्रंथों और पुस्तकों की रचना की थी, लेकिन उन्होंने भगवान राम के जन्म से राज्याभिषेक तक की घटनाओं को दोहा, चौपाई और छंद के जरिए रामचरितमानस जैसे महाकाव्य के रूप में लोगों तक पहुंचाया.
महाकवि गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस की रचना के बाद विनय पत्रिका नामक एक महत्वपूर्ण काव्य की रचना की थी. इसके अलावा उन्होंने हनुमान चालीसा और अन्य काव्यों की भी रचना की थी. देश में गोस्वामी तुलसीदास की जयंती को हर्षोल्लास से मनाया जाता है. ऐसे में आप इन शानदार हिंदी मैसेजेस, कोट्स, वॉट्सऐप विशेज, जीआईएफ ग्रीटिंग्स के जरिए प्रियजनों से हैप्पी तुलसीदास जयंती कह सकते हैं.
उनकी रचनाओं में छुपा है भक्ति का चरित्र दर्पण,
रामचरितमानस की गूंज से रौशन हुआ संसार,
तुलसीदास की वाणी में बसी है प्रेम की अमृत धारा.

भक्ति और प्रेम से भरा उनके जीवन का रास्ता,
तुलसीदास जी की जयंती पर, खुशियों की हो बौछार,
राम भक्ति की रोशनी से, हर दिल हो साकार.

जयंती पर हम दें उन्हें श्रद्धांजलि, हर दिल में रहे उनके प्रेम का उजाला,
राम भक्ति की जो पथ पर, तुलसीदास जी ने दीप जलाया,
उनकी जयंती पर हम सभी ने, उनके मार्ग पर चलने की शपथ दोहराया.

इन सबका त्याग करके तुलसीदास जयंती पर भगवान राम की आराधना करें.


कहा जाता है कि जन्म के तुरंत बाद रोने के बजाय तुलसीदास जी के मुख से राम नाम का शब्द निकला था. जन्म से ही उनके 32 दांत थे और उन्हें बचपन में रामबोला कहकर बुलाया जाता है. उनके जन्म के कुछ दिन बाद ही उनकी मां का निधन हो गया था, जिसके चलते उनके पिता ने उन्हें अमंगल समझकर उनका त्याग कर दिया था.
गोस्वामी तुलसीदास को लेकर ऐसा भी कहा जाता है कि उन्हें भगवान श्रीराम और उनके परमभक्त हनुमान जी ने दर्शन दिए थे. दरअसल, तुलसीदास तीर्थ यात्रा के लिए काशी गए थे और अपनी यात्रा के दौरान वे निरंतर राम नाम का जप करते रहे. इसके बाद उन्हें श्रीराम के परमभक्त हनुमान जी के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ. जब हनुमान जी ने उन्हें दर्शन दिए तब उन्होंने उनसे श्रीराम के दर्शन पाने की प्रार्थना की. उनके आग्रह करने पर हनुमान जी ने बताया कि श्रीराम चित्रकूट में मिलेंगे. कहा जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन चित्रकूट में तुलसीदास को भगवान श्रीराम ने दर्शन दिए थे.













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