Ravivar Vrat: आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति के लिए अचूक है रविवार का व्रत, जानें पूजन विधि और महत्व
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

Sunday Fast: पौष माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रविवार सुबह 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगी. इसके बाद द्वितीया तिथि लग जाएगी. इस दिन सूर्य और चंद्रमा धनु राशि में रहेंगे. द्रिक पंचांग के अनुसार, रविवार के दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय शाम 4 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. इस तिथि पर कोई विशेष पर्व नहीं है. यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य कमजोर है, तो वे रविवार का व्रत रख सकते हैं.

पौराणिक ग्रंथों में रविवार व्रत का उल्लेख मिलता है, जिसमें बताया गया है कि यह व्रत किसी भी मास के शुक्ल पक्ष के पहले रविवार से शुरू किया जाता है. इस व्रत को करने मात्र से जातक के जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है. साथ ही यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर है. यह भी पढ़ें: Kharmas: आखिर क्यों खरमास में शुभ और मांगलिक कार्यों को करना है वर्जित? जानें इससे जुड़ी मान्यता

व्रत को शुरू करने के लिए जातक ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें, उसके बाद एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें, फिर व्रत कथा सुनें और सूर्य देव को तांबे के बर्तन में जल भरकर उसमें फूल, अक्षत और रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें. ऐसा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.

इसके अलावा रविवार के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने और सूर्य देव के मंत्र 'ऊं सूर्याय नमः' या 'ऊं घृणि सूर्याय नमः' का जप करने से भी विशेष लाभ मिलता है. रविवार के दिन गुड़ और तांबे के दान का भी विशेष महत्व है. इन उपायों को करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता मिलती है.

एक समय भोजन करें, जिसमें नमक का सेवन न करें. यह व्रत का उद्यापन 12 व्रतों के बाद किया जाता है.

नोट- इस लेख में दी गई तमाम जानकारियों को प्रचलित मान्यताओं के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है और यह लेखक की निजी राय है. इसकी वास्तविकता, सटीकता और विशिष्ट परिणाम की हम कोई गारंटी नहीं देते हैं. इसके बारे में हर व्यक्ति की सोच और राय अलग-अलग हो सकती है.