Ramadan 2026: रमजान के पाक महीने की शुरुआत जल्द, जानें रोजे के नियम और किन गलतियों से बचना है जरूरी
रमजान 2026 की शुरुआत 19 फरवरी से होने की संभावना है. रोजे के दौरान अक्सर लोग चिकित्सा उपचार और स्वच्छता को लेकर दुविधा में रहते हैं. इस गाइड में जानें कि किन चीजों से रोजा टूटता है और किनसे नहीं.
Ramadan 2026 : दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के लिए इबादत और बरकत का महीना 'रमजान' अब बेहद करीब है. भौगोलिक गणना के अनुसार, भारत में रमजान का पहला रोजा गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को होने की उम्मीद है. हालांकि, इसकी सटीक शुरुआत 18 फरवरी की शाम को चांद दिखने के बाद घोषित की जाएगी. रोजा रखने का अर्थ केवल भूखा-प्यासा रहना नहीं है, बल्कि यह तन और मन की शुद्धि का मार्ग है. रोजेदारों के लिए यह जानना आवश्यक है कि किन वजहों से रोजा टूट सकता है और किन स्थितियों में रियायत दी गई है. Ramadan 2026Ramadan 2026 Date? साल 2026 में रमजान कब शुरू होगा? जानें किस आधारों पर तय होती है रमजान की तिथियां!
किन कारणों से टूट सकता है रोजा?
इस्लामिक विद्वानों और धार्मिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, जानबूझकर किए गए निम्नलिखित कार्यों से रोजा अमान्य हो जाता है:
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जानबूझकर खान-पान: सेहरी और इफ्तार के बीच जानबूझकर भोजन करना या पानी पीना रोजा तोड़ देता है.
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धूम्रपान और नशा: सिगरेट, बीड़ी या ई-सिगरेट का धुआं फेफड़ों तक ले जाना रोजे की स्थिति में वर्जित है.
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पोषण देने वाले इंजेक्शन: ग्लूकोज ड्रिप, सलाइन या विटामिन के वे इंजेक्शन जो भोजन का विकल्प बनते हैं, रोजा तोड़ देते हैं.
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जानबूझकर उल्टी करना: यदि कोई व्यक्ति खुद से कोशिश करके (Inducing vomiting) उल्टी करता है, तो रोजा टूट जाता है.
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वैवाहिक संबंध: रोजे के दौरान शारीरिक संबंध बनाना वर्जित है; ऐसा करने पर रोजे की कजा के साथ भारी कफारा (प्रायश्चित) देना होता है.
इन चीजों से नहीं टूटता रोजा (रियायतें)
आधुनिक दौर में कई ऐसी बातें हैं जिन्हें लेकर रोजेदार अक्सर भ्रमित रहते हैं. धार्मिक शोध के अनुसार, इनसे रोजा सुरक्षित रहता है:
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भूलकर खा लेना: यदि कोई व्यक्ति भूलवश कुछ खा या पी लेता है और याद आते ही रुक जाता है, तो उसका रोजा बरकरार रहता है.
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जरूरी दवाइयां: इंसुलिन (शुगर के मरीजों के लिए), सामान्य टीकाकरण (Vaccination) और आंखों में डालने वाले ड्रॉप से रोजा नहीं टूटता.
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अस्थमा इन्हेलर: अधिकांश विद्वानों का मत है कि सांस की बीमारी के लिए इन्हेलर का उपयोग जायज है क्योंकि यह पेट के बजाय फेफड़ों में जाता है.
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स्वच्छता: ब्रश करना (बशर्ते पेस्ट निगला न जाए), नहाना और इत्र (Perfume) लगाने से रोजा नहीं टूटता.
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थूक निगलना: अपना थूक निगलना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, इससे रोजे पर कोई असर नहीं पड़ता.
रोजा टूटने से कैसे बचें? (सावधानियां)
रोजे की रूह को बचाने के लिए केवल शारीरिक संयम ही काफी नहीं है, बल्कि आचरण की शुद्धता भी जरूरी है:
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जुबान पर नियंत्रण: झूठ बोलना, गाली-गलौज करना या किसी की पीठ पीछे बुराई (गीबत) करने से रोजे का आध्यात्मिक लाभ खत्म हो जाता है.
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इंद्रियों का संयम: गलत चीजें देखने या सुनने से बचें. विद्वानों के अनुसार, "अल्लाह को ऐसे व्यक्ति के भूखे रहने की जरूरत नहीं, जो बुराई न छोड़ सके."
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धैर्य रखें: भूख-प्यास के कारण होने वाली चिड़चिड़ाहट पर काबू पाएं और दूसरों के साथ विनम्र रहें.
किन्हें है रोजा न रखने की छूट?
इस्लाम में उन लोगों को विशेष रियायत दी गई है जिनके लिए रोजा रखना स्वास्थ्य के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है. इनमें गंभीर रूप से बीमार, बुजुर्ग, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं, और लंबी यात्रा पर निकले मुसाफिर शामिल हैं. ऐसे लोग बाद में इन रोजों की भरपाई (कजा) कर सकते हैं.