National Youth Day 2026 Wishes: राष्ट्रीय युवा दिवस की बधाई! प्रियजनों संग शेयर करें ये हिंदी Quotes, WhatsApp Messages और Facebook Greetings
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को बंगाल के कोलकाता में हुआ था. उनका असली नाम नरेंद्रनाथ दत्त था. उनके जन्मदिन पर मनाया जाने वाला राष्ट्रीय युवा दिवस देश के तमाम युवाओं को समर्पित है, जो भारत के उज्जवल भविष्य के निर्माण में अहम भूमिका निभा सकते हैं. इस खास अवसर पर आप इन हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए प्रियजनों को राष्ट्रीय युवा दिवस की बधाई दे सकते हैं.
National Youth Day 2026 Wishes in Hindi: हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जयंती (Swami Vivekananda Jayanti) मनाई जाती है, जिसे जिसे राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) यानी नेशनल यूथ डे के तौर पर भी जाना जाता है. दरअसल, साल 1984 में स्वामी विवेकानंद जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाने की शुरुआत हुई थी और तब से यह सिलसिला बरकरार है. उस वक्त की तत्कालीन भारत सरकार द्वारा कहा गया था कि स्वामी विवेकानंद के दर्शन, आदर्श, उनके महान विचार और उनके द्वारा किए गए सराहनीय कार्य के तरीके देश के तमाम युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हो सकते हैं, इसलिए भारत सरकार ने स्वामी विवेकानंद जी की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया. इसमें कोई दो राय नहीं है कि देश का युवा वर्ग स्वामी विवेकानंद के आदर्शों, विचारों को अपने जीवन का हिस्सा बनाते हुए देश और समाज के विकास में अपना योगदान दे सकता है.
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को बंगाल के कोलकाता में हुआ था. उनका असली नाम नरेंद्रनाथ दत्त था. उनके जन्मदिन पर मनाया जाने वाला राष्ट्रीय युवा दिवस देश के तमाम युवाओं को समर्पित है, जो भारत के उज्जवल भविष्य के निर्माण में अहम भूमिका निभा सकते हैं. इस खास अवसर पर आप इन हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए प्रियजनों को राष्ट्रीय युवा दिवस की बधाई दे सकते हैं.
स्वामी विवेकानंद जी का मानना था कि युवा होने की परिपूर्णता उन्हीं लोगों में है, जो बिना रुके, बिना थके निरंतर संघर्ष करने का जज्बा रखते हैं. देश के युवाओं में इतनी ताकत है कि वो असफलताओं के अंधेरों को चीरकर सफलता के प्रकाश फैला सकते हैं. स्वामी विवेकानंद को धर्म, दर्शन, इतिहास, कला, सामाजिक विज्ञान, साहित्य का ज्ञाता भी कहा जाता है. पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति और आध्यात्म की एक अमिट छाप छोड़ने वाले स्वामी विवेकानंद जी बचपन से ही आध्यात्म के प्रति गहरी रुचि रखते थे, इसलिए उन्होंने 25 साल की उम्र में सांसारिक मोह माया का त्याग करते हुए संन्यास ले लिया और नरेंद्रनाथ दत्त से स्वामी विवेकानंद बन गए.