Mahalaya 2026 Wishes: महालया के इन शानदार हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, GIF Greetings के जरिए दें प्रियजनों को शुभकामनाएं
धार्मिक मान्यता के अनुसार, महालया के दिन दोपहर तक पितरों को तर्पण देकर विदाई दी जाती है और संध्याकाल में मां दुर्गा कैलाश पर्वत से पृथ्वी पर पधारती हैं. इसके अगले दिन यानी 11 अक्टूबर से नौ दिवसीय शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होगी. इस अवसर पर लोग एक-दूसरे को 'शुभ महालया' के भक्तिमय संदेश भेजकर पर्व की शुभकामनाएं दे रहे हैं.
Mahalaya 2026 Wishes in Hindi: शक्ति साधना और उत्सव का सबसे बड़ा पर्व दुर्गा पूजा महालया के साथ अपने औपचारिक स्वरूप में प्रवेश करने जा रहा है. पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में महालया 10 अक्टूबर (शनिवार) को मनाया जाएगा.
महालया का दिन हिंदू धर्म में दो महत्वपूर्ण आध्यात्मिक परंपराओं का संगम है—एक ओर जहां यह पितरों की विदाई का दिन 'सर्वपितृ अमावस्या' है, वहीं दूसरी ओर यह महिषासुरमर्दिनी मां दुर्गा के पृथ्वी पर आगमन का सूचक 'देवी पक्ष' की शुरुआत है.
महालया पर अपनों को भेजें ये भक्तिमय हिंदी शुभकामनाएं
महालया के इस पावन पर्व पर श्रद्धालु अपने परिजनों और मित्रों को सोशल मीडिया व मैसेजिंग ऐप्स के जरिए इन लोकप्रिय संदेशों से शुभकामनाएं दे रहे हैं:





- "ढाक की थाप और काश के फूलों की महक, मां दुर्गा के आगमन से महके आपका आंगन। शुभ महालया 2026!"
- "पितरों का मिले आशीर्वाद और मां जगदंबा की बरसे कृपा; हर संकट दूर हो और जीवन में सुख-समृद्धि आए। आपको और आपके परिवार को महालया की हार्दिक बधाई!"
- "सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते। मां दुर्गा आपके जीवन से समस्त अंधेरा दूर कर खुशियों का प्रकाश भरें। हैप्पी महालया!"
- "कैलाश से पधार रही हैं मां भवानी, धरती पर गूंज रहा है देवी का नाम; भक्ति और उल्लास से सजे आपका हर दिन। शुभ महालया!"
पितरों की विदाई और देवी दुर्गा का आह्वान: एक दिन, दो परंपराएं
महालया के दिन की धार्मिक रूपरेखा दो अलग-अलग चरणों में विभाजित होती है:
- दोपहर तक पितृ विदाई (तर्पण): आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या होने के कारण सुबह से दोपहर तक श्रद्धालु पवित्र नदियों, सरोवरों और गंगा तटों पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करते हैं. सर्वपितृ अमावस्या पर उन सभी ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के लिए जल अर्पण किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती.
- संध्याकाल में देवी का आगमन: शास्त्रों के अनुसार, तर्पण काल समाप्त होने के बाद शाम को मां दुर्गा अपने बच्चों—श्रीगणेश, कार्तिकेय, माता लक्ष्मी और माता सरस्वती—के साथ कैलाश पर्वत से अपने मायके यानी पृथ्वी लोक के लिए प्रस्थान करती हैं. वे अगले दस दिनों तक भक्तों के बीच रहकर उनकी बाधाएं दूर करती हैं.
'चक्षुदान' की परंपरा और मूर्तियों को अंतिम रूप
महालया के दिन पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित कुम्हारटोली सहित देश भर के मूर्तिकार कार्यशालाओं में एक विशेष अनुष्ठान संपन्न होता है:
- चक्षुदान (Chokkhu Daan): इस दिन मूर्तिकार पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ मां दुर्गा की विशाल प्रतिमाओं की आंखें खींचते हैं और उनमें रंग भरते हैं. इसे 'चक्षुदान' कहा जाता है.
- यह माना जाता है कि इस अनुष्ठान के बाद मिट्टी की मूर्तियों में प्राण-प्रतिष्ठा का आध्यात्मिक मार्ग खुल जाता है और पंडालों में सजावट अंतिम चरण में पहुंच जाती है.
11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा का कार्यक्रम
महालया के अगले दिन यानी आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नौ दिवसीय शारदीय नवरात्रि की विधिवत शुरुआत होगी:
- 11 अक्टूबर 2026 (रविवार): घटस्थापना (कलश स्थापना) और शारदीय नवरात्रि का पहला दिन.
- महा षष्ठी से विजयदशमी: दुर्गा पूजा का मुख्य सार्वजनिक उत्सव षष्ठी तिथि से दशमी तक मनाया जाएगा, जिसका समापन आश्विन शुक्ल दशमी को बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक विजयादशमी (दशहरे) और सिंदूर खेला के साथ होगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 09, 2026 02:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

