Maghi Ganesh Jayanti 2026: माघी गणेश जयंती 22 या 23 जनवरी को? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

माघ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जाता है. साल 2026 में गणेश जयंती की तारीख को लेकर उलझन की स्थिति है, जिसे पंचांग की गणना के आधार पर इस लेख में स्पष्ट किया गया है.

माघी गणेश जयंती 2026 (Photo Credits: File Image)

Maghi Ganesh Jayanti 2026: हिंदू धर्म में 'प्रथम पूज्य' भगवान गणेश (Bhagwan Ganesh) के जन्मोत्सव का पर्व गणेश जयंती (Ganesh Jayanti) बेहद श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.  माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व को माघी गणेश जयंती (Maghi Ganesh Jayanti) या वरद चतुर्थी भी कहा जाता है. इस साल यानी साल 2026 में इस त्योहार की सटीक तारीख को लेकर श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. लोग 22 जनवरी या 23 जनवरी को यह पर्व मनाएं, इसे लेकर उनके मन में असमंजस है. यहां हम आपको बता दें कि ज्योतिषीय गणना और उदया तिथि के अनुसार, इस वर्ष यह महापर्व 22 जनवरी 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा. मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था. यह भी पढ़ें: Maghi Ganesh Jayanti 2026 Marathi Invitation Card: 22 जनवरी को मनाया जाएगा बाप्पा का जन्मोत्सव, जानें शुभ मुहूर्त और डिजिटल आमंत्रण के नए ट्रेंड्स

तिथि और शुभ मुहूर्त का समय

वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का समय इस प्रकार है:

चूंकि चतुर्थी तिथि का सूर्योदय 22 जनवरी को हो रहा है, इसलिए उदया तिथि के नियम के अनुसार इसी दिन व्रत और पूजन करना शास्त्रसम्मत माना गया है.

गणेश जयंती की सरल पूजा विधि

इस विशेष दिन पर भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्त निम्नलिखित विधि अपना सकते हैं:

महत्व: क्यों कहलाती है 'तिलकुंद चतुर्थी'?

माघी गणेश जयंती को 'तिलकुंद चतुर्थी' भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन तिल का विशेष महत्व है. इस दिन तिल का दान करना और तिल से बने व्यंजनों का सेवन करना शुभ माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजन करने से कुंडली के बुध दोष शांत होते हैं और व्यक्ति को बुद्धि व विद्या का वरदान मिलता है.

चंद्र दर्शन को लेकर विशेष सावधानी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी की तिथि पर चंद्रमा के दर्शन करना वर्जित माना गया है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा को देखने से व्यक्ति पर 'मिथ्या कलंक' यानी झूठे आरोप लगने का भय रहता है। अतः भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे इस रात चंद्र दर्शन से बचें.

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