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Jitiya Vrat 2026 Wishes: जितिया व्रत के इन हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, Facebook Greetings के जरिए दें शुभकामनाएं

संतान की दीर्घायु, निरोगी काया और सुख-समृद्धि की कामना के लिए माताओं द्वारा रखा जाने वाला अत्यंत कठिन 'जीवित्पुत्रिका' यानी 'जितिया व्रत' इस वर्ष 3 अक्टूबर 2026 को रखा जा रहा है. इस अवसर पर माताएं राजा जीमूतवाहन और चील-सियारिन की पूजा करती हैं, वहीं परिवारजन और रिश्तेदार सोशल मीडिया व मैसेजिंग ऐप के जरिए एक-दूसरे को जितिया पर्व की मंगलकामनाएं भेज रहे हैं.

Jitiya Vrat 2026 Wishes: जितिया व्रत के इन हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, Facebook Greetings के जरिए दें शुभकामनाएं
जीवित्पुत्रिका व्रत 2026 (Photo Credits: File Image)

Jitiya Vrat 2026 Wishes: सनातन परंपरा में मातृत्व, त्याग और संतान रक्षा का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाने वाला जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत इस वर्ष अक्टूबर के पहले सप्ताह में पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है. विशेष रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह पर्व बड़े उत्साह से मनाया जाता है.

यह व्रत कठिन उपवासों में से एक है, क्योंकि इसमें माताएं पूरे 24 घंटे से अधिक समय तक अन्न और जल का त्याग कर निर्जला व्रत रखती हैं.

तीन दिवसीय पर्व का शेड्यूल: नहाय-खाय से पारण तक

जितिया व्रत तीन चरणों में विधिवत पूरा किया जाता है:

  • 2 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) - नहाय-खाय: पर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होगी. इस दिन व्रती महिलाएं सुबह पवित्र नदियों या जलाशयों में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं. परंपरा के अनुसार, इस दिन मडुआ (रागी) की रोटी, नोनी का साग और झिंगनी (तोरई) की सब्जी का सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है.
  • 3 अक्टूबर 2026 (शनिवार) - निर्जला व्रत एवं ओठगन: 3 अक्टूबर की भोर में ब्रह्म मुहूर्त से पहले व्रती महिलाएं 'ओठगन' (सरगही) करती हैं. इसके बाद सूर्योदय के साथ 24 घंटे का अखंड निर्जला व्रत शुरू होता है.
  • 4 अक्टूबर 2026 (रविवार) - पारण: व्रत का समापन 4 अक्टूबर को सूर्योदय के पश्चात होगा. सुबह पूजा-अर्चना और दान-पुण्य के बाद ही व्रती महिलाएं पारण कर व्रत खोलेंगी.

जितिया पर्व पर अपनों को भेजें ये प्रेरक शुभकामनाएं

जितिया के पावन अवसर पर व्रती माताओं और परिजनों के बीच साझा करने के लिए लोकप्रिय संदेश:

1- चिराग हो तुम घर का

राग हो तुम मन का

रहो सलामत युगों-युगों तक

फैलाओ यश कीर्ति, धरती से फलक तक

जीवित्पुत्रिका व्रत की शुभकामनाएं

जीवित्पुत्रिका व्रत 2026 (Photo Credits: File Image)

2- आपके व्रत का तप रंग लाए

भगवान आप पर आशीर्वाद बरसाए

आप और आपका बच्चा खुशहाल रहे !

जीवित्पुत्रिका व्रत की शुभकामनाएं

जीवित्पुत्रिका व्रत 2026 (Photo Credits: File Image)

3- जितिया व्रत है, गवाह ममत्व का

मां को नमन है, जो प्रतिरूप हैं ईश्वर का

नमन मां तुमको, बारम्बार नमन है !

जीवित्पुत्रिका व्रत की शुभकामनाएं

जीवित्पुत्रिका व्रत 2026 (Photo Credits: File Image)

4- बच्चों को मिले सेहत

संतान को मिले लंबी उम्र

बच्चों को मिले खुशियां अपार

मुबारक हो आपको जितिया का त्यौहार !

जीवित्पुत्रिका व्रत की शुभकामनाएं

जीवित्पुत्रिका व्रत 2026 (Photo Credits: File Image)

5- पूरी हो आपकी मनचाही मुराद

संतान को मिले अब लंबी उम्र

सुख, सौभाग्य और संतति दें प्रभु

जीवित्पुत्रिका व्रत की शुभकामनाएं

जीवित्पुत्रिका व्रत 2026 (Photo Credits: File Image)

  1. "चिरायु हों आपके बच्चे, सदा बना रहे मां का दुलार; भगवान जीमूतवाहन की कृपा से महके आपका संसार। जितिया व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं!"
  2. "मातृत्व की तपस्या और त्याग का यह महापर्व आपकी संतान को यश, स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करे। हैप्पी जितिया 2026!"
  3. "निर्जला रहकर जो मां संजोती है संतानों का कल, उस पावन ममता को शत-शत नमन। जीवित्पुत्रिका पर्व की मंगलकामनाएं!"

तिथि और शुभ मुहूर्त का समय

पंचांग गणना के अनुसार अष्टमी तिथि और पूजा के शुभ समय इस प्रकार हैं:

अनुष्ठान / मुहूर्त तिथि एवं समय
अष्टमी तिथि प्रारंभ 3 अक्टूबर 2026, सुबह 7:59 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त 4 अक्टूबर 2026, सुबह 5:51 बजे
उदयातिथि व्रत 3 अक्टूबर 2026 (शनिवार)
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:53 बजे से 5:41 बजे तक
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:51 बजे तक
पारण का शुभ समय 4 अक्टूबर 2026, सुबह 6:15 बजे के बाद

धार्मिक महत्व: राजा जीमूतवाहन और चील-सियारिन की कथा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जितिया व्रत में गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन की कुश से प्रतिमा बनाकर विधि-विधान से पूजा की जाती है:

  • संतान रक्षा का वरदान: पौराणिक कथा के अनुसार, राजा जीमूतवाहन ने अपने प्राणों की आहुति देकर पक्षीराज गरुड़ से नाग जाति के बच्चों की रक्षा की थी.
  • चील और सियारिन की पूजा: पूजा के दौरान मिट्टी या गाय के गोबर से चील और सियारिन की आकृतियां बनाई जाती हैं और उन्हें सिंदूर व अक्षत अर्पित किया जाता है. माना जाता है कि कथा श्रवण करने से बच्चों पर आने वाले संकट दूर होते हैं और उन्हें दीर्घायु प्राप्त होती है.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 02, 2026 03:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).