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Guru Purnima Speech: गुरु पूर्णिमा पर ऐसे दें भाषण; जानें विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए खास ड्राफ्ट

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व गुरु-शिष्य परंपरा और ज्ञान के महत्व को समर्पित है. वर्ष 2026 में 29 जुलाई को मनाए जाने वाले इस अवसर पर स्कूलों और संस्थानों में दिए जाने वाले भाषणों के प्रभावी ड्राफ्ट और मुख्य बिंदु जानें.

Guru Purnima Speech: गुरु पूर्णिमा पर ऐसे दें भाषण; जानें विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए खास ड्राफ्ट
गुरु पूर्णिमा 2026 (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली: भारतीय संस्कृति में गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध को समर्पित गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) का पर्व इस वर्ष 29 जुलाई 2026 (बुधवार) को मनाया जा रहा है. आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती (Maharshi Vedavyasa Jayanti) के रूप में भी प्रसिद्ध है.

इस शुभ अवसर पर देश भर के विद्यालयों, कॉलेजों और आध्यात्मिक संस्थानों में गुरु पूजन तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. इन आयोजनों के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों द्वारा दिए जाने वाले भाषणों का प्रारूप यहां देखा जा सकता है.

विद्यार्थियों के लिए भाषण का प्रारूप

स्कूल व कॉलेज में आयोजित कार्यक्रमों में विद्यार्थी अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए निम्नलिखित प्रारूप का उपयोग कर सकते हैं:

संबोधन व शुरुआत:

"आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सम्मानित गुरुजन एवं मेरे प्रिय सहपाठियों, आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं. 

आज हम सभी गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने के लिए एकत्र हुए हैं. हमारे शास्त्रों में कहा गया है—'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः'. माता-पिता हमें जन्म देते हैं, लेकिन गुरु हमें जीवन जीने की सही दिशा और संस्कार प्रदान करते हैं. आप सभी गुरुजनों के मार्गदर्शन के लिए हम सहृदय धन्यवाद ज्ञापित करते हैं."

शिक्षकों के लिए भाषण का प्रारूप

शिक्षकों द्वारा अपने विद्यार्थियों के मार्गदर्शन और इस दिन के महत्व को रेखांकित करने के लिए भाषण का रूपरेखा:

संबोधन व संदेश:

"आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सम्मानित सहकर्मियों एवं मेरे प्यारे विद्यार्थियों, आप सभी को गुरु पूर्णिमा पर्व की शुभकामनाएं

गुरु पूर्णिमा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुशासन और भारतीय ज्ञान-परंपरा का स्मरणोत्सव है. एक शिक्षक के रूप में हमारी सबसे बड़ी पूंजी विद्यार्थियों की सफलता और उनका उत्तम चरित्र निर्माण है. शिक्षा का ध्येय केवल अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन में सत्य, ईमानदारी और जिम्मेदारी के मूल्यों को अपनाना है."

भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान

सनातन संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी उच्च स्थान दिया गया है. संत कबीरदास के प्रसिद्ध दोहे "गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय..." के माध्यम से भी यह स्पष्ट किया गया है कि अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के मार्ग पर ले जाने वाले गुरु ही श्रेष्ठ हैं.

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर लोग अपने शिक्षकों, आध्यात्मिक गुरुओं और माता-पिता का आशीर्वाद लेकर उनके बताए मार्गों पर चलने का संकल्प लेते हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 28, 2026 08:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).