Hal Shashti 2025 Wishes: शुभ हल षष्ठी! प्रियजनों संग शेयर करें ये शानदार WhatsApp Stickers, GIF Greetings, HD Images और Wallpapers
श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी शेषनाग के अवतार माने जाते हैं, कहा जाता है कि जब भी श्रीहरि पृथ्वी पर मानव अवतार में प्रकट होते हैं तो बलराम जी भी उनके साथ अवश्य ही अवतार लेते हैं. बलराम जयंती यानी हल षष्ठी के इस खास अवसर पर आप प्रियजनों संग इन शानदार हिंदी विशेज, वॉट्सऐप स्टिकर्स, जीआईएफ ग्रीटिंग्स, एचडी इमेजेस और वॉलपेपर्स को शेयर करके उनसे शुभ हल षष्ठी कह सकते हैं.
Hal Shashti 2025 Wishes in Hindi: भगवान श्रीकृष्ण (Bhagwan Shri Krishna) के बड़े भाई बलराम जी की जयंती (Balram Jayanti) हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है, जिसे हल षष्ठी (Hal Shashti), हर छठ, ललही छठ, लाला छठ, चंद्र षष्ठी और रंधन छठ जैसे कई नामों से जाना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि हल षष्ठी का व्रत संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है, इसलिए महिलाएं इस दिन व्रत करके अपनी संतान की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं. ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से इस साल 14 अगस्त 2025 को हल षष्ठी यानी बलराम जयंती का पर्व मनाया जा रहा है. राजस्थान में महिलाएं इसे चंद्र षष्ठी के तौर पर मनाती हैं तो वहीं गुजरात में इस रंधन छठ के नाम से जाना जाता है और ब्रज में इस उत्सव को बलदेव छठ के तौर पर धूमधाम से मनाया जाता है.
श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी शेषनाग के अवतार माने जाते हैं, कहा जाता है कि जब भी श्रीहरि पृथ्वी पर मानव अवतार में प्रकट होते हैं तो बलराम जी भी उनके साथ अवश्य ही अवतार लेते हैं. बलराम जयंती यानी हल षष्ठी के इस खास अवसर पर आप प्रियजनों संग इन शानदार हिंदी विशेज, वॉट्सऐप स्टिकर्स, जीआईएफ ग्रीटिंग्स, एचडी इमेजेस और वॉलपेपर्स को शेयर करके उनसे शुभ हल षष्ठी कह सकते हैं.
हल षष्ठी के दिन व्रती महिलाओं को प्रात:काल स्नानादि से निवृत्त होने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए. इसके बाद घर के आंगन को गोबर से लीप कर एक चौक बनाना चाहिए, फिर भगवान बलराम के प्रतीक को चौकी पर स्थापित करना चाहिए. अब विधि-विधान से उनका पूजन करना चाहिए. इस दिन हल का उपयोग नहीं किया जाता है. व्रती महिलाएं इस दिन बिना हल से निकले हुए अनाज और फलों का ही सेवन करती हैं. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने वाली महिलाओं की संतान को सुरक्षा और दीर्घायु होने का आशीर्वाद मिलता है. इसके साथ ही इससे संतान को रोग, भय और अनिष्ट से मुक्ति मिलती है. इतना ही नहीं इससे घर परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन भी होता है.