Chhath Puja 2025 Messages: हैप्पी छठ पूजा! प्रियजनों संग शेयर करें ये हिंदी WhatsApp Wishes, Quotes, HD Images और GIF Greetings
छठ पूजा के व्रत को काफी कठिन माना जाता है और इसके नियम भी काफी कठोर होते हैं, क्योंकि इस दौरान व्रती को 36 घंटे तक निर्जल व्रत रखना होता है. छठ पूजा महापर्व के पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन ऊषा अर्घ्य दिया जाता है. इस अवसर पर आप इन भक्तिमय विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स को भेजकर अपनों को छठ पूजा की शुभकामनाएं दे सकते हैं.
Chhath Puja 2025 Messages in Hindi: छठ पूजा (Chhath Puja) महापर्व का हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया जाता है, जिसे कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है, जबकि चार दिवसीय छठ पूजा का सबसे मुख्य पर्व कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है. छठ पूजा के पर्व को बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और नेपाल के तराई वाले क्षेत्रों में मनाया जाता है. इस पर्व को छठ पूजा, डाला छठ, छठी माई, छठ, छठ माई पूजा, सूर्य षष्ठी जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है. दरअसल, पांच दिवसीय दिवाली उत्सव (Diwali Utsav) को मनाने के बाद से ही लोग छठ पूजा की तैयारियों में जुट जाते हैं. इस साल छठ पूजा की शुरुआत 25 अक्टूबर 2025 को नहाय-खाय के साथ हुई है और समापन 28 अक्टूबर 2025 को ऊषा अर्घ्य के साथ होगा, जबकि 27 अक्टूबर 2025 को इस पर्व का सबसे मुख्य दिन मनाया जा रहा है.
छठ पूजा के व्रत को काफी कठिन माना जाता है और इसके नियम भी काफी कठोर होते हैं, क्योंकि इस दौरान व्रती को 36 घंटे तक निर्जल व्रत रखना होता है. छठ पूजा महापर्व के पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन ऊषा अर्घ्य दिया जाता है. इस अवसर पर आप इन भक्तिमय विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स को भेजकर अपनों को छठ पूजा की शुभकामनाएं दे सकते हैं.
ज्ञात हो कि छठ पूजा के पहले दिन यानी नहाय-खाय के दिन व्रती स्नान करने के बाद प्रसाद बनाना शुरु कर देते हैं और एक ही बार खाना खाते हैं. इस पर्व के दूसरे दिन खरना या लोहंडा पर व्रती गुड की खीर का प्रसाद खाते हैं और इसके बाद 36 घंटे का निर्जल व्रत शुरु हो जाता है. इस महापर्व का तीसरा दिन सबसे खास होता है, क्योंकि इसी दिन शाम के समय किसी पवित्र नदी या तालाब में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जिसे संध्या अर्घ्य कहा जाता है. आखिर में चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है.