Chhath Puja 2020: छठ पूजा महापर्व का तीसरा दिन, आज डूबते हुए सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य, जानें क्या है शुभ मुहूर्त

आस्था के महापर्व छठ पूजा का आज तीसरा दिन है और आज शाम तमाम व्रती सूर्यास्त के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगे. छठ पूजा के तीसरे दिन यानी कि षष्ठी तिथि के दिन संध्या अर्घ्य दिया जाता है. सूर्यदेव को संध्या अर्घ्य कार्तिक शुक्ल की षष्ठी के दिन दिया जाता है.

छठ पूजा 2020 (Photo Credits: File Image)

Chhath Puja 2020: आस्था के महापर्व छठ पूजा (Chhath Puja) का आज तीसरा दिन है और आज शाम तमाम व्रती सूर्यास्त के समय डूबते हुए सूर्य को संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya) देंगे. पांच दिवसीय दिवाली उत्सव के छह दिन बाद मनाए जाने वाले छठ पूजा के पर्व की बिहार (Bihar), उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), झारखंड और नेपाल (Nepal) के तराई वाले क्षेत्रों अनोखी छटा देखने को मिलती है. हिंदू पंचांग के अनुसार, छठ मैया और सूर्य देव की उपासना के पर्व की शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है और समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को होती है, जबकि कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को छठ पूजा का मुख्य पर्व मनाया जाता है.

छठ पूजा का मुख्य दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह तिथि आज यानि 20 नवंबर, 2020 (शुक्रवार) को है. आज सूर्योदय प्रात: 06:48 बजे हुआ है और सूर्यास्त का समय 05:26 बजे का है. आज छठ पूजा का मुख्य प्रसाद (ठेकुआ) और चावल के लड्डू बनाए जायेंगे. बांस की टोकरी में प्रसाद और फल सजा कर पूजा स्थल पर लाया जाएगा. आज सभी व्रतधारी किसी तालाब, नदी या घाट पर संध्या के समय पानी में खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देंगे. कहा जाता है कि छठ पूजा का व्रत रखने और सूर्यदेव की उपासना करने से परिवार में सुख-शांति, धन और समृद्धि आती है.

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संध्या अर्घ्य मुहूर्त:

संध्या अर्घ्य: 20 नवंबर, 2020 (शुक्रवार) सूर्योदय: 06:48 बजे और सूर्यास्त: 05:26 बजे

संध्या अर्घ्य विधि

संध्या अर्घ्य देने के लिए शाम के समय सूप में बांस की टोकरी में ठेकुआ, चावल के लड्डू और कुछ फल लिए रखें जायेंगे, जिसके बाद पूजा का सूप सजाया जाएगा. किसी तालाब, नदी या घाट पर संध्या के समय पानी में खड़े होकर लोटे में जल और दूध भरकर सूर्यदेव को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा. इसी के साथ सूप की सामग्री के साथ भक्त और व्रतधारी छठी मैया की भी पूजा अर्चना करेंगे. रात में छठी माई के भजन गाये जायेंगे और व्रत कथा सुनाई जाएगी.

छठ पूजा संध्या अर्घ्य महत्त्व

छठ पूजा के तीसरे दिन यानी कि षष्ठी तिथि के दिन संध्या अर्घ्य दिया जाता है. सूर्यदेव को संध्या अर्घ्य कार्तिक शुक्ल की षष्ठी के दिन दिया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य षष्ठी यानी कि छठ पूजा के तीसरे दिन शाम के वक्त सूर्यदेव अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं. इसीलिए संध्या अर्घ्य देने से प्रत्यूषा को अर्घ्य प्राप्त होता है. प्रत्यूषा को अर्घ्य देने से लाभ की प्राप्ति होती है. ऐसी भी मान्यता है कि संध्या अर्घ्य देने और सूर्य की पूजा अर्चना करने से जीवन में तेज बना रहता है और यश, धन , वैभव की प्राप्ति होती है.

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