Shivrajyabhishek Sohala 2026 Date: 353वां शिवराज्याभिषेक सोहळा, दुर्गराज रायगढ़ पर 5 और 6 जून को सजेगा ऐतिहासिक दरबार; जानें तारीख, महत्व और पूरा कार्यक्रम

मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के 353वें शिवराज्याभिषेक स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में महाराष्ट्र के ऐतिहासिक दुर्गराज रायगढ़ पर 5 और 6 जून 2026 को एक भव्य और ऐतिहासिक दो दिवसीय समारोह का आयोजन किया जा रहा है. अखिल भारतीय शिवराज्याभिषेक महोत्सव समिति और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से इस राष्ट्रीय उत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. इस वर्ष भी देश-विदेश से लाखों शिवभक्त, इतिहास प्रेमी और शोधकर्ता इस गौरवशाली क्षण के साक्षी बनने रायगढ़ पहुंच रहे हैं.

शिवराज्याभिषेक सोहळा 2026 (Photo Credits: File Image)

रायगढ़, 3 जून: महाराष्ट्र के आराध्य दैवत और हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) के राज्याभिषेक का 353वां वर्धापन दिन इस वर्ष भी पारंपरिक श्रद्धा, अद्वितीय उत्साह और भव्यता के साथ मनाने के लिए दुर्गराज रायगढ़ (Raigarh) पूरी तरह सज-धज कर तैयार है. अखिल भारतीय शिवराज्याभिषेक महोत्सव समिति (Akhil Bhartiya Shivrajyabhishek Mahotsav Samiti) के तत्वावधान में मुख्य समारोह आगामी शुक्रवार, 5 जून और शनिवार, 6 जून 2026 को आयोजित किया जाएगा. पूर्व सांसद युवराज संभाजीराजे छत्रपति के मार्गदर्शन में गठित लगभग 40 विभिन्न प्रशासनिक और सामाजिक समितियां इस महा-उत्सव के सुचारू संचालन के लिए दिन-रात जुटी हुई हैं. यह भी पढ़ें: Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti 2026: छत्रपति शिवाजी महाराज को पीएम मोदी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने दी श्रद्धांजलि, शौर्य और सुशासन के प्रतीक को देश ने किया नमन

दो दिवसीय समारोह का विस्तृत कार्यक्रम

बचाव और प्रबंधन व्यवस्थाओं की समीक्षा के बाद समिति द्वारा जारी आधिकारिक समय-सारणी के अनुसार, उत्सव की शुरुआत 5 जून को पाचाड स्थित राजमाता जिजाऊ के समाधी स्थल पर माल्यार्पण और अभिवादन के साथ होगी.

शिवराज्याभिषेक दिन का ऐतिहासिक महत्व

इतिहासकारों के अनुसार, 6 जून 1674 (शालिवाहन शके 1596 के ज्येष्ठ शुद्ध त्रयोदशी) को छत्रपति शिवाजी महाराज ने रायगढ़ दुर्ग पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अपना राज्याभिषेक करवाकर 'हिंदवी स्वराज्य' की संप्रभु घोषणा की थी. तत्कालीन मुग़ल और आदिलशाही सत्ताओं के दमनकारी दौर में, यह घटना केवल एक राजा के राज्यारोहण का उत्सव नहीं थी, बल्कि भारत के इतिहास में एक स्वतंत्र, धर्मनिरपेक्ष और लोक-कल्याणकारी लोकतांत्रिक राजसत्ता की स्थापना का ऐतिहासिक शंखनाद थी.

शिवाजी महाराज ने राज्याभिषेक के बाद 'राज्याभिषेक शक' नाम से एक नए कैलेंडर की शुरुआत की और अपनी संप्रभुता के प्रतीक के रूप में सोने (होन) और तांबे के विशेष सिक्के जारी किए. इसी दिन अष्टप्रधान मंडल (मंत्रिपरिषद) का औपचारिक गठन हुआ और प्रशासनिक कार्यों के लिए 'राज्य व्यवहार कोष' के माध्यम से मातृभाषा को बढ़ावा दिया गया.

प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता

इस बार भीषण गर्मी और मानसून पूर्व (Pre-monsoon) मौसम की आहट को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस बल ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं. रायगढ़ जाने वाले मार्गों पर वाहनों के सुचारू आवागमन, पीने के साफ पानी की व्यवस्था, स्वास्थ्य शिविर और आपातकालीन रेस्क्यू टीमों की तैनाती की गई है, ताकि दूर-दराज से आने वाले शिवभक्तों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े.

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