Monsoon Session 2026: क्या मानसून सत्र में आएंगे महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक? केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने दिया बड़ा बयान
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने संसद के आगामी मानसून सत्र में महिला आरक्षण और निर्वाचन क्षेत्र परिसीमनविधेयकों को पेश किए जाने की अटकलों पर विराम लगा दिया है. नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में अभी तक कैबिनेट स्तर पर कोई चर्चा नहीं हुई है.
नई दिल्ली, 17 जून: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री (Union Parliamentary Affairs Minister) किरेन रीजीजू (Kiren Rijiju) ने संसद के आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) में महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) विधेयकों को पेश किए जाने की अटकलों पर बुधवार को विराम लगा दिया है. नई दिल्ली में आयोजित 'न्यूज18 इंडिया अमृत भारत सम्मान 2026' कार्यक्रम में बोलते हुए रीजीजू ने स्पष्ट किया कि इन दोनों प्रस्तावों पर सरकार ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट में अभी तक इन विषयों पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है, इसलिए वे फिलहाल यह पुष्टि नहीं कर सकते कि आगामी सत्र के दौरान इन विधेयकों को संसद के पटल पर रखा जाएगा या नहीं. यह भी पढ़ें: PM Modi Speech: कांग्रेस ‘एंटी-रिफॉर्म और स्वार्थी’, नकारात्मक राजनीति से देश को नुकसान पहुंचा रही- पीएम नरेंद्र मोदी (Watch Video)
कैबिनेट में अभी तक कोई चर्चा नहीं
संसद के मानसून सत्र की विधायी प्राथमिकताओं को लेकर राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के बीच संसदीय कार्य मंत्री का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है. रीजीजू ने कहा, "मैं अभी यह नहीं कह सकता कि मानसून सत्र के दौरान संसद में कौन से विधेयक लाए जाएंगे."
उन्होंने साफ किया कि महिला आरक्षण विधेयक या परिसीमन प्रक्रिया को लेकर कैबिनेट के भीतर फिलहाल कोई बातचीत नहीं चल रही है. मंत्री ने संकेत दिया कि इन विधेयकों को पेश करने का निर्णय आंतरिक विचार-विमर्श के बाद उचित समय पर ही लिया जाएगा.
महिला आरक्षण के प्रति सरकार प्रतिबद्ध
मानसून सत्र के एजेंडे पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार करते हुए भी किरेन रीजीजू ने विधायिकाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया. इस प्रस्ताव को लेकर पूर्व में हुई बहसों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अतीत में इस उपाय को पर्याप्त समर्थन न मिल पाने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से निराशा हुई थी.
उन्होंने कहा, "जब महिला आरक्षण विधेयक पास नहीं हो पाया था तो मुझे बहुत बुरा लगा था, क्योंकि हमने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा किया था. उस समय मैंने कहा था कि हम इसका बदला लेंगे. मेरे कहने का मतलब यह था कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यह विधेयक किसी दिन जरूर पास हो."
कांग्रेस सांसदों पर लगाया बड़ा आरोप
अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री रीजीजू ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर भी निशाना साधा. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कई सांसद व्यक्तिगत रूप से महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व के दबाव के कारण वे इसका समर्थन नहीं कर पाए.
रीजीजू ने आरोप लगाते हुए कहा, "कांग्रेस के कम से कम सात या आठ सांसद मेरे पास आए थे और उन्होंने कहा था कि वे महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करना चाहते हैं. लेकिन उनके नेताओं ने उनसे साफ कह दिया था कि वे लोकसभा में इस बिल का समर्थन न करें." हालांकि, कांग्रेस पार्टी की ओर से इस दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
बदल रहे हैं संसद के समीकरण
यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आ रहा है जब देश के विधायी ढांचे में बड़े सुधारों को लेकर चर्चाएं तेज हैं. राजनीतिक विश्लेषक संसद के भीतर बदलते समीकरणों और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की मजबूत होती स्थिति के बीच बड़े संवैधानिक सुधारों की संभावनाओं को करीब से देख रहे हैं. हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) जैसे विपक्षी दलों के भीतर मची अंदरूनी कलह और राजनीतिक पुनर्गठन की खबरों ने भी संसद के अंकगणित को प्रभावित किया है. बहरहाल, संसदीय कार्य मंत्री के ताजा बयान से साफ है कि सरकार ने आगामी सत्र के लिए फिलहाल इन दोनों बड़े विधेयकों को लेकर अपनी ओर से कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं की है.