क्या अमूल की तरह कामयाबी के झंडे गाड़ेगी सहकारी 'भारत टैक्सी'?
देश में सहकारिता के आधार पर पहली कैब सर्विस भारत टैक्सी की औपचारिक शुरुआत हो गई है.
देश में सहकारिता के आधार पर पहली कैब सर्विस भारत टैक्सी की औपचारिक शुरुआत हो गई है. आम लोगों को महंगे किराए से राहत दिलाने और ड्राइवरों की आय बढ़ाने के मकसद से शुरू यह सेवा कितना कारगर होगी?करीब दो महीने तक एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर परखने के बाद 5 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने औपचारिक तौर पर इस टैक्सी सेवा का उद्घाटन किया. भारत में ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऐप-आधारित टैक्सी सेवाएं पहले से ही हैं, लेकिन यात्रियों को उनसे काफी शिकायत रहती है.
मिसाल के तौर पर ड्राइवर की ओर से बार-बार बुकिंग रद्द करने और पीक आवर्स में किराया कई गुना बढ़ने जैसी शिकायतें तो आम हैं. लेकिन भारत टैक्सी का संचालन करने वाली सोसाइटी का दावा है कि इसका मकसद आम लोगों के साथ ही ड्राइवरों को भी राहत पहुंचाना है. इसके ड्राइवरों को सारथी कहा जाता है.
खास बात यह है कि इनमें महिला सारथी भी रहेंगी और किसी अकेली महिला के बुकिंग करने की स्थिति में उसे महिला सारथी भेजने की ही कोशिश की जाएगी. इसके अलावा पीक आवर में भी इसका किराया जस का तस रहेगा. ड्राइवरों के लिए राहत की बात यह है कि ओला या उबर की तरह उनसे कोई कमीशन नहीं लिया जाएगा. यानी जितना किराया मिलेगा, वो ड्राइवर या सारथी की जेब में ही जाएगा. सोसाइटी का कहना है कि उसका लक्ष्य ग्राहकों के लिए सबसे सस्ता होना नहीं बल्कि उनको सबसे उचित और अनुमानित किराया बताना है.
फिलहाल यह सेवा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अलावा गुजरात में उपलब्ध होगी. लेकिन सोसाइटी ने अगले दो-तीन साल में इसे पूरे देश में शुरू करने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है.
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यह देश की पहली सरकार समर्थित सहकारिता आधारित टैक्सी सेवा है. सहकार टैक्सी कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड की ओर से संचालित इस सेवा का पूरा ढांचा सहकारिता पर आधारित दूध उत्पादक अमूल की तर्ज पर बनाया गया है. ऐसा होना स्वाभाविक भी है. इस सोसाइटी के संचालन का जिम्मा अमूल के प्रबंध निदेशक जयेन मेहता पर है. सोसाइटी के बाकी नौ सदस्यों को भी देश की विभिन्न सहकारी समितियों से चुना गया है.
बाकियों से कैसे अलग है यह राइड-हेलिंग सेवा?
इसकी शुरुआत के मौके पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह देश में मौजूद बाकी राइड-हेलिंग टैक्सी सेवाओं से कई मायनों में अलग है. इसमें सारथी ही मालिक होंगे. बाकी सेवाओं में ड्राइवरों से उनकी कमाई का 20 से 25 फीसदी हिस्सा कमीशन लिया जाता है. लेकिन भारत टैक्सी के तहत काम करने वाले सारथियों को कोई कमीशन नहीं देना होगा. इससे उनकी आय बढ़ेगी और ज्यादा से ज्यादा लोग इस सेवा में पंजीकरण कराएंगे.
लेकिन फिर सहकारिता समिति को कैसे फायदा होगा? सोसाइटी ने बताया है कि ड्राइवरों से मामूली शुल्क लिया जाएगा. ड्राइवरों को रोजाना भारत टैक्सी ऐप के लिए 30 रुपए का भुगतान करना होगा. वो चाहें तो साप्ताहिक या मासिक आधार पर भी इसका भुगतान कर सकते हैं. इस सेवा के तहत आटो या तिपहिया स्कूटर चलाने वालो को रोजाना सिर्फ 18 रुपए ही देने होंगे. इसके लिए पंजीकरण की प्रक्रिया भी आसान है. ड्राइवर भारत टैक्सी ऐप डाउनलोड कर पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन कर सकते हैं. इससे ऐप के प्रबंधन और सेवाओं के विस्तार में मदद मिलेगी.
वैसे, भारत में यह अपने किस्म का भले पहला मॉडल हो, अमेरिका में ऐसे सहकारिता आधारित सेवा पहले से है. मिसाल के तौर पर अमेरिका के न्यूयार्क शहर में वर्ष 2021 में ड्राइवर्स कोआपरेटिव के बैनर तले शुरू होने वाली ऐसी सेवा कई बड़ी राइड-हेलिंग कंपनियों को बराबरी का टक्कर दे रही है.
सोसाइटी का कहना है कि भारत टैक्सी का मकसद ओला, उबर और रैपिडो जैसे राइड-हेलिंग सेवाओं का मजबूत विकल्प मुहैया कराना है. ओला और उबर की तर्ज पर ही ही आम लोग एक ऐप के जरिए इस सेवा की बुकिंग कर सकते हैं. इसके तहत हर सारथी को सोसाइटी के पांच फीसदी शेयर दिए जाएंगे. यानी वह महज एक टैक्सी चालक नहीं होगा, सोसाइटी में उसकी हिस्सेदारी भी रहेगी. सोसाइटी के एक सदस्य बताते हैं कि इसके कारण ड्राइवरों में भारत टैक्सी का मालिक होने की भावना मजबूत होगी.
ड्राइवरों और यात्रियों को राहत
सोसाइटी का कहना है कि ड्राइवरों को चूंकि कोई कमीशन देना होगा, इसी वजह से यात्रियों को भी बाकी सेवाओं के मुकाबले भारत टैक्सी की किराया सस्ता पड़ेगा. उसका दावा है कि बाकियों के मुकाबले भारत टैक्सी के किराए कम से कम 30 फीसदी कम होंगे. भारत टैक्सी ऐप में सुरक्षा संबंधी फीचर के साथ ही एक हेल्पलाइन नंबर भी हैं जहां यात्री शिकायत कर सकते हैं. दिल्ली में यात्रियों की शिकायतों और चिंता के त्वरित समाधान के लिए सोसाइटी ने दिल्ली पुलिस के साथ मिल कर 35 विशेष बूथ स्थापित किए गए हैं.
सोसाइटी का कहना है कि इस सेवा के तहत अब तक चार लाख से ज्यादा ड्राइवरों ने पंजीकरण कराया है. इसके और बढ़ने की उम्मीद है.
कोलकाता में एक राइड-हेलिंग सर्विस के तहत टैक्सी चलाने वाले बिहार में मुंगेर के रघुबीर नाथ डीडब्ल्यू से कहते हैं, "फिलहाल कंपनी के कमीशन काटने और गाड़ी की मासिक किस्त चुकाने के बाद जेब में ज्यादा पैसे नहीं बचते. उम्मीद है भारत टैक्सी सेवा कोलकाता में भी जल्दी ही शुरू होगी."
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परिवहन उद्योग से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि यह सेवा भी अमूल की तर्ज पर कामयाब होगी. इसका फायदा ड्राइवरों के अलावा आम लोगों को भी मिलेगा. लेकिन इसके लिए अभी इसे लंबा रास्ता तय करना है. पूरे देश में नेटवर्क का विस्तार किए बिना इसका खास फायदा नहीं होगा.
कोलकाता की टैक्सी यूनियन के एक सदस्य नरेंद्र घोष सवाल करते हैं कि भारी भरकम राइड-हेलिंग सेवाएं देने वाली भारी-भरकम कंपनियों के मुकाबले यह प्रतिस्पर्धा में कितना टिक पाएगी?
इस सवाल का जवाब तो आने वाले दिनों में ही मिलेगा. लेकिन फिलहाल इस नई सेवा ने टैक्सी चलाने को रोजगार के तौर पर अपनाने वाले लाखों लोगों के मन में उम्मीद की एक नई किरण तो पैदा कर ही दी है.