योगी आदित्यनाथ ने सिर्फ दिल्ली की हवा को दमघोंटू क्यों कहा?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली की हवा को दमघोंटू बताकर एक नई बहस छेड़ दी है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली की हवा को दमघोंटू बताकर एक नई बहस छेड़ दी है. चूंकि यूपी के भी कई शहरों में प्रदूषण का हाल लगभग यही है.दिल्ली में दमघोंटू हवा से पिछले कई महीने से लोग परेशान हैं, हर इन दिनों परेशान रहते हैं लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हवा सिर्फ दिल्ली की ही खराब है. कई और शहरों की भी हवा दमघोंटू वाली स्थिति में रहती है और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300-400 तक या उससे भी ज्यादा चला जाता है. उन शहरों में यूपी के भी कई शहर हैं और सिर्फ दिल्ली से लगे शहर यानी एनसीआर के ही शहर नहीं बल्कि दूसरे शहरों का भी हाल कोई बहुत अच्छा नहीं है.

लेकिन गोरखपुर के एक कार्यक्रम में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली के वायु प्रदूषण का जिक्र करते हुए कहा, "दिल्ली में घुटन भरी जिंदगी हो गई है. ऐसा लगता है जैसे गैस चेंबर में हों. एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से ऊपर है. दम घुटता है, आंखों में जलन होती है. सांस लेने में दिक्कत होती है.”

दरअसल, नवंबर की शुरुआत से लेकर जनवरी-फरवरी तक दिल्ली और आसपास के इलाकों की हवा बहुत ज्यादा प्रदूषित रहती है, इसमें कोई संदेह नहीं है. पिछले दिनों तो एक्यूआई लगातार चार सौ के ऊपर बना रहा और अभी भी दिल्ली-एनसीआर में यह तीन सौ के करीब बना हुआ है जबकि मौसम में कुछ बदलाव भी हुआ है.

दरअसल, एक्यूआई यदि शून्य से 50 के बीच में है, तभी ठीक माना जाता है. हालांकि 50 से 100 की स्थिति भी सामान्य जैसी ही होती है लेकिन 100 से ऊपर की स्थिति तो खराब होती है और फिर आगे उतनी ही खराब होती जाती है. लेकिन 100 के नीचे की स्थिति तो दिल्ली में शायद ही कभी आती हो.

योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर लोगों ने सोशल मीडिया पर तंज कसना शुरू कर दिया लेकिन लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या यूपी के शहरों में हवा बहुत साफ है?

बयान पर सवाल

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर योगी आदित्यनाथ का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "दिल्ली में घुटन भरी जिंदगी हो गई है, ऐसा लगता है जैसे गैस चैंबर में हों, AQI 400 से ऊपर है. दिल्ली में दम घुटता है, आंखों में जलन होती है, सांस लेने में दिक्कत होती है, डॉक्टर को कहना पड़ता है कि घर से बाहर मत निकलिए. लग रहा आदित्यनाथ जी भूल गए कि दिल्ली में बीजेपी की ही सरकार है या इन्होंने जानबूझकर मोदी और रेखा गुप्ता को एक्सपोज करने के लिए ये बयान दिया है.”

दरअसल, नवंबर-दिसंबर में यूपी की राजधानी लखनऊ समेत कई शहरों, मसलन- प्रयागराज, कानपुर, मेरठ, बुलंदशहर और यहां तक कि वाराणसी में हवा की गुणवत्ता कुछ इसी तरह की थी और हर साल यही हाल रहता है. दिल्ली से लगे शहरों- नोएडा, गाजियाबाद की हालत तो दिल्ली से भी ज्यादा खराब रहती है. गाजियाबाद को तो कई बार देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर का तमगा मिलता रहता है.

भारत में धूम्रपान नहीं करने वाले भी लंग कैंसर की चपेट में

दिल्ली में पिछले साल लंबे समय बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी. इससे पहले दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी. प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार हमेशा आलोचना के केंद्र में रहती है क्योंकि दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में दिल्ली शीर्ष दस शहरों में शामिल है. यही नहीं, यमुना का प्रदूषण भी पिछले कई दशक से दिल्ली में एक बड़ा मुद्दा रहा है.

चूंकि लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी यहां सरकार में नहीं रही है, इसलिए दिल्ली सरकार को घेरती रही है लेकिन अब जबकि दिल्ली में भी बीजेपी की ही सरकार है तो योगी आदित्यनाथ के निशाने पर उन्हीं की पार्टी आ गई. अब सवाल ये भी है कि योगी आदित्यनाथ ने ऐसा जानबूझकर कहा या फिर उसी गलतफहमी के शिकार हो गए कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी या कांग्रेस की सरकार है.

दिल्ली-एनसीआर तक की हवा को प्रदूषण से बचाने में लगे पंजाब के किसान

लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ल लंबे समय से बीजेपी और राज्य सरकार को कवर कर रहे हैं. उनकी नजर में किसी की आलोचना से ज्यादा अपनी तारीफ का भाव ज्यादा रहा होगा क्योंकि योगी आदित्यनाथ अक्सर ऐसा करते हैं.

टकराव या आत्ममुग्धता?

ज्ञानेंद्र शुक्ल के मुताबिक, "मुझे लगता है कि यह आत्ममुग्धता है. अपने प्रदेश की तारीफ करने के चक्कर में ध्यान ही न रहा होगा कि अपनी ही पार्टी की सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं. सही है कि यूपी के कई शहरों में भी वायु गुणवत्ता ठीक नहीं है लेकिन लखनऊ और दिल्ली की तुलना में तो लखनऊ बेहतर है ही. कुल मिलाकर यह खुद की नकारात्मकता को छिपाने और अपने को बेहतर बताने की कोशिश ही है. ऐसा कुछ नहीं लगता कि ये केंद्रीय नेतृत्व से सीधे टकराव लेने के मूड से दिया गया कोई सोचा-समझा बयान है.”

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह दिल्ली-एनसीआर और अन्य बड़े शहरों में प्रदूषण के चलते ज्यादातर अपने गांव में रहते हैं. दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी पर वो तंज कसते हुए कहते हैं, "योगी जी ने कोई विशेष लेप तो तैयार किया नहीं है कि यूपी में दम नहीं घुटेगा. हां, कुछ शहरों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं. वाहनों का घनत्व या प्रदूषक जहां ज्यादा हैं, हवा यहां भी सांस लेने लायक नहीं है. लेकिन अपनी तारीफ करने की उन्हें ऐसी आदत है कि कई बार सीमा लांघ जाते हैं. इस बार ऐसी सीमा लांघी कि याद भी नहीं रहा कि हमला तो अपने यहां ही हो गया.”

दिल्ली में प्रदूषण से त्रस्त जनता बोली, "हमें सांस लेने दो"

शीतल पी सिंह इस बात को तो स्वीकार करते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व और योगी आदित्यनाथ के बीच टकराव है लेकिन प्रदूषण पर उनके बयान के पीछे इस टकराव को नहीं देखते. वो कहते हैं. "कड़वाहट तो है ही. उसी कड़वाहट के चलते दोनों तरफ से निशाने भी साधे जाते हैं. कई बार निशाने लग भी जाते हैं. जैसा कि इस बार हुआ है. लेकिन आखिरकार हैं सब एक ही.”

शंकराचार्य का अपमान

हालांकि दिल्ली के वायु प्रदूषण को लेकर राजनीति पिछले दिनों काफी गर्म रही है और बीजेपी के भी कई नेता पर्दे के पीछे अपनी सरकार को कोसते रहे. लेकिन योगी आदित्यनाथ की तरह अब तक किसी ने ऐसा हमला नहीं किया था. पिछले कुछ दिनों से योगी आदित्यनाथ के इसके अलावा भी कुछ बयान ऐसे आए हैं जो पार्टी को परेशान करने वाले रहे. चाहे मामला शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अपमान का हो या फिर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय की पत्नी को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी.

शंकराचार्य के अपमान पर तो उनके दोनों उप मुख्यमंत्रियों की राय उनसे अलग है. केशव प्रसाद मौर्य के बाद अब ब्रजेश पाठक ने भी शंकराचार्य के शिष्यों के साथ हुए दुर्व्यवहार को ‘महापाप' बताया है. ज्ञानेंद्र शुक्ल कहते हैं, "शंकराचार्य का मामला वास्तव में प्रशासनिक से ज्यादा व्यक्तिगत खुन्नस का मामला है. बटुकों की शिखा खींचना निश्चित तौर पर ऐसा कृत्य है जिसकी ब्राह्मण समाज ही नहीं पूरा हिन्दू समाज निंदा कर रहा है. ब्रजेश पाठक का बयान भी उसी संदर्भ में है. उनके ऊपर अपने समुदाय का भी दबाव है, कर भी क्या सकते हैं. इस कृत्य का विरोध करना ही पड़ेगा. दरअसल, इस मामले में समग्र हिन्दू समाज की आस्था बनाम योगी आदित्यनाथ की व्यक्तिगत नाराजगी दिख रही है.”

Share Now

\