भोपाल, 23 मई: मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की संदिग्ध मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटी जांच एजेंसियों के हाथ एक महत्वपूर्ण तकनीकी साक्ष्य लगा है. घटना के दिन का एक नया सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) सामने आया है, जिसमें 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा भोपाल (Bhopal) के एक नामचीन ब्यूटी पार्लर (Beauty Parlour) में समय बिताती नजर आ रही हैं. पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीमें इस फुटेज का गहन विश्लेषण कर रही हैं ताकि मौत से ठीक पहले की उनकी मानसिक स्थिति और उनके अंतिम घटनाक्रम (Final Movements) की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा सके.
इसी बीच, मामले में दो बड़े घटनाक्रम हुए हैं—पहला, पिछले 10 दिनों से फरार चल रहे मुख्य आरोपी और ट्विशा के पति समर्थ सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है; और दूसरा, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) ने परिवार की याचिका पर मुहर लगाते हुए दिल्ली एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों की देखरेख में शव का दोबारा पोस्टमार्टम (Second Autopsy) कराने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया है. यह भी पढ़ें: Twisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने की CBI जांच की सिफारिश, हाईकोर्ट पहुंचा परिवार
ब्यूटी पार्लर के सीसीटीवी में शांत दिखीं ट्विशा
ताजा जांच रिपोर्टों के अनुसार, यह सीसीटीवी फुटेज 12 मई की दोपहर का है, जिस दिन कटारा हिल्स स्थित आवास पर ट्विशा का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था. फुटेज से साफ है कि ट्विशा ने 'एक्सप्रेशन ब्यूटी पार्लर' में करीब तीन घंटे का समय बिताया था.
पार्लर की मालिका किरन परिहार और वहां के स्टाफ ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि पार्लर में रहने के दौरान ट्विशा बेहद शांत और सामान्य दिख रही थीं. उन्होंने वहां हेड मसाज (सिर की मालिश) की सर्विस ली थी और वे किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव या अवसाद में नजर नहीं आ रही थीं. जांच अधिकारी इस फुटेज को इसलिए भी अहम मान रहे हैं क्योंकि यह मृतका की सास (पूर्व जज गिरिबाला सिंह) के उस बयान की पुष्टि करता है जिसमें उन्होंने ट्विशा के पार्लर जाने की बात कही थी.
हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, एम्स दिल्ली की टीम करेगी दूसरा पोस्टमार्टम
ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा द्वारा दायर की गई त्वरित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के जस्टिस ए.के. सिंह की पीठ ने शुक्रवार को शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की अनुमति दे दी. परिवार का आरोप था कि पहले पोस्टमार्टम में शरीर पर मौजूद चोट के निशानों (Blunt-force injuries) और संदिग्ध परिस्थितियों की अनदेखी की गई थी.
अदालत ने निर्देश दिया है कि यह दूसरा पोस्टमार्टम एम्स (AIIMS) भोपाल में ही आयोजित किया जाएगा, लेकिन इसमें दिल्ली एम्स के वरिष्ठ फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक विशेष टीम अनिवार्य रूप से मौजूद रहेगी. कोर्ट ने साफ किया कि इस आदेश का उद्देश्य पहले डॉक्टरों की योग्यता पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार की शंकाओं का निवारण और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है.
10 दिनों तक फरार रहने के बाद पति हिरासत में, वकालत का लाइसेंस निलंबित
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही लगातार ठिकाने बदल रहा मुख्य आरोपी समर्थ सिंह (पेशे से वकील) चारों तरफ से घिरने के बाद आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया है. शुक्रवार को समर्थ ने जबलपुर की एक जिला अदालत में आत्मसमर्पण (Surrender) करने का प्रयास किया था, लेकिन हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों के बाद भोपाल पुलिस की विशेष टीम ने उसे अदालत परिसर के बाहर से ही अपनी हिरासत में ले लिया.
इसके साथ ही, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए समर्थ सिंह का वकालत का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. पुलिस अब समर्थ को भोपाल लाकर आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करेगी. यह भी पढ़ें: Twisha Sharma Death Case: ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने ससुराल वालों पर प्रभाव डालने का लगाया आरोप, बोले- परिवार 'गहरे सदमे' से गुज़र रहा है (Watch Video)
ससुराल के सीसीटीवी और कॉल रिकॉर्ड्स पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस मामले में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब जांच टीम को पता चला कि ससुराल पक्ष के घर में लगा सीसीटीवी सिस्टम वास्तविक समय (Real Time) से दो दिन पीछे चल रहा था. मृतका के परिवार ने आरोप लगाया है कि घटना के तुरंत बाद पूर्व जिला जज (सास) ने सीसीटीवी ऑपरेटरों और तकनीशियनों से संपर्क किया था, जो साक्ष्यों के साथ संभावित छेड़छाड़ (Tampering of Evidence) की ओर इशारा करता है.
घर के सीसीटीवी के मुताबिक, ट्विशा 12 मई की शाम करीब 7:20 बजे छत की सीढ़ियों की तरफ जाती दिखी थीं और उसके करीब एक घंटे बाद उनके पति और दो अन्य लोग उनके अचेत शरीर को नीचे लाते नजर आए. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि उस एक घंटे के भीतर बंद कमरे में वास्तव में क्या हुआ था और तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय घर की सीढ़ियों पर ही सीपीआर (CPR) क्यों दिया जा रहा था. राज्य सरकार पहले ही इस पूरे मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की सिफारिश कर चुकी है.












QuickLY