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News Guidelines For Teachers: अब बच्चों को नहीं दे पाएंगे सजा, राज्य सरकार ने शिक्षकों और प्रिंसिपलों के लिए जारी की नई गाइडलाइन

राज्य सरकार ने स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा और मानसिक भलाई को लेकर एक अहम फैसला लिया है. महाराष्ट्र सरकार (State Government) ने नया शासन आदेश जारी करते हुए सभी स्कूलों में बाल-स्नेही माहौल (Child-Friendly Environment) बनाए रखना अनिवार्य कर दिया है.

News Guidelines For Teachers: अब बच्चों को नहीं दे पाएंगे सजा, राज्य सरकार ने शिक्षकों और प्रिंसिपलों के लिए जारी की नई गाइडलाइन
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

News Guidelines For Teachers: राज्य सरकार ने स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा और मानसिक भलाई को लेकर एक अहम फैसला लिया है. महाराष्ट्र सरकार (State Government) ने नया शासन आदेश जारी करते हुए सभी स्कूलों में बाल-स्नेही माहौल (Child-Friendly Environment) बनाए रखना अनिवार्य कर दिया है, ताकि विद्यार्थियों को स्कूल में डर नहीं, बल्कि अपनापन महसूस हो.नई नियमावली के अनुसार, शिक्षक (Teachers), मुख्याध्यापक (Headmaster) या फिर कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी (Contract Staff) किसी को भी विद्यार्थियों को सज़ा देने का अधिकार नहीं होगा.

शारीरिक दंड (Physical Punishment), मानसिक प्रताड़ना (Mental Harassment) और अपमानजनक व्यवहार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है.ये भी पढ़े:Mumbai: फ्री एजुकेशन कानून का उल्लंघन करने पर कार्रवाई, शिक्षा विभाग ने कांदिवली और वसई की स्कूलों की मान्यता की रद्द

सम्मान और संवेदनशीलता से पेश आना होगा जरूरी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों में बच्चों के साथ सम्मानपूर्वक (Respectful Behaviour) और संवेदनशील (Sensitive Approach) तरीके से व्यवहार करना अनिवार्य होगा. विद्यार्थियों को टोमने मारना, गाली-गलौज करना या उन्हें नीचा दिखाने वाला व्यवहार करना अब अपराध (Offence) की श्रेणी में आएगा.

आरटीई कानून के प्रावधानों को किया गया और सख्त

इस नए आदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right to Education Act – RTE), 2009 की धारा 17 पर फिर से जोर दिया गया है. इसके तहत किसी भी छात्र को मारपीट, डराने-धमकाने, मानसिक दबाव डालने या अपमानित करने की अनुमति नहीं होगी.सरकार ने यह भी साफ किया है कि शैक्षणिक प्रदर्शन, जाति (Caste), धर्म (Religion), लिंग (Gender), भाषा (Language), दिव्यांगता (Disability) या सामाजिक-आर्थिक स्थिति (Socio-Economic Status) के आधार पर अगर किसी छात्र के साथ भेदभाव किया गया, तो उसे गंभीर अपराध माना जाएगा.

सभी स्कूलों पर लागू होंगे नियम

ये नियम सरकारी (Government Schools), निजी (Private Schools) और सहायता प्राप्त (Aided Schools) — सभी शैक्षणिक संस्थानों पर समान रूप से लागू होंगे. सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और स्कूलों को सुरक्षित व सकारात्मक स्थान बनाना है.

 

(The above story first appeared on LatestLY on Dec 15, 2025 08:27 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).