TCS नासिक जबरन धर्मांतरण और उत्पीड़न मामला: SIT ने नासिक कोर्ट में 8 आरोपियों के खिलाफ दायर की दूसरी चार्जशीट

नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की शाखा में महिला कर्मचारियों के कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने महाराष्ट्र की नासिक अदालत में अपनी दूसरी चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें कुल 8 आरोपियों के खिलाफ प्रताड़ना और धार्मिक जबरदस्ती के गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

टीसीएस नासिक (Photo Credits: File Image)

नासिक/नई दिल्ली, 29 मई: आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (Tata Consultancy Services) यानी टीसीएस (TCS) के नासिक (Nashik) केंद्र में महिला कर्मचारियों के कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण (Sexual Harassment and Forced Conversion) के प्रयासों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है. एसआईटी ने गुरुवार, 28 मई को महाराष्ट्र की नासिक अदालत (Nashik Court) में इस मामले से जुड़ी अपनी दूसरी चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस नए आरोप पत्र में आरोपियों द्वारा किए गए कथित शोषण, मानसिक प्रताड़ना और धार्मिक जबरदस्ती (Religious Coercion) के तरीकों का सिलसिलेवार विवरण दिया गया है. यह भी पढ़ें: TCS Nashik Case: कौन हैं एचआर मैनेजर निदा खान? यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण मामले में गिरफ्तारी के बाद बढ़ीं मुश्किलें

8 एफआईआर के आधार पर 8 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नासिक के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश की गई यह दूसरी चार्जशीट मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज आठ अलग-अलग प्राथमिकियों (FIRs) पर आधारित है. इस आरोप पत्र में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आठ लोगों को नामजद किया गया है.

आरोपियों की सूची में रजा रफीक मेमन, शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी, अश्विनी अशोक चैनानी, तौसीफ बिलाल अत्तार, शफी भीकन शेख, दानिश एजाज शेख और निदा एजाज खान सहित कुछ अन्य नाम शामिल हैं. इन सभी पर कार्यस्थल पर अपनी स्थिति का दुरुपयोग करने और महिला सहकर्मियों को प्रताड़ित करने का आरोप है.

व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए टारगेट करने और खान-पान बदलने का दबाव

एसआईटी के समक्ष दर्ज कराई गई शिकायतों के अनुसार, नासिक यूनिट में कार्यरत कई महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि उन्हें काम के दौरान लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था. शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आरोपियों ने कर्मचारियों को लक्षित करने के लिए विशेष व्हाट्सएप ग्रुप (WhatsApp Groups) बना रखे थे.

इन ग्रुप्स और कार्यस्थल पर महिलाओं पर विशेष प्रकार की धार्मिक प्रार्थनाएं करने, खान-पान की आदतें बदलने (गैर-शाकाहारी भोजन करने का दबाव) और विशिष्ट धार्मिक प्रतीकों को पहनने के लिए मजबूर किया जाता था. ऐसा न करने पर उनके करियर को नुकसान पहुंचाने और कार्यस्थल पर माहौल खराब करने की धमकियां दी जाती थीं.

देवलाली कैंप मामले में पहले ही दाखिल हो चुकी है 1,500 पन्नों की चार्जशीट

इससे पहले, 22 मई को एसआईटी ने देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज एक अलग मामले में नासिक अदालत के समक्ष 1,500 पन्नों की अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की थी. उस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के प्रावधान भी शामिल किए गए थे.

उस पहली चार्जशीट में दानिश एजाज शेख, तौसीफ बिलाल अत्तार, निदा एजाज खान और एआईएमआईएम (AIMIM) के स्थानीय कॉर्पोरेटर मतीन मजीद पटेल को आरोपी बनाया गया था. यह भी पढ़ें: TCS Nashik Case: टीसीएस नासिक धर्मांतरण और उत्पीड़न मामला, आरोपों की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश और पूर्व IPS अधिकारी की समिति गठित

एआईएमआईएम कॉर्पोरेटर मतीन पटेल से 9 घंटे पूछताछ, दोबारा समन

इस मामले के तार स्थानीय राजनीतिक रसूख से भी जुड़ रहे हैं. पुलिस ने एआईएमआईएम (AIMIM) कॉर्पोरेटर मतीन पटेल से इस मामले की मुख्य आरोपी निदा खान को फरार रहने के दौरान कथित रूप से शरण देने के आरोप में लंबी पूछताछ की है.

अधिकारियों ने बताया कि 25 मई को मतीन पटेल से करीब नौ घंटे तक सघन पूछताछ की गई थी.  जांच टीम ने इस मामले में आगे की कड़ियों को जोड़ने के लिए उन्हें आगामी 1 जून को दोबारा पेश होने के लिए समन जारी किया है. एसआईटी का कहना है कि वे मामले की तह तक जाने के लिए सभी तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों को बारीकी से खंगाल रहे हैं.

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