सुप्रीम कोर्ट ने रैपिड रेल के लिए पूरा भुगतान न करने पर दिल्ली सरकार को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना के दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर के निर्माण के लिए अपने हिस्से का फंड देने के लिए उसके आदेश के "आंशिक अनुपालन" पर दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई.
नई दिल्ली, 28 नवंबर : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना के दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर के निर्माण के लिए अपने हिस्से का फंड देने के लिए उसके आदेश के "आंशिक अनुपालन" पर दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई. न्यायमूर्ति एस.के. कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा,“आपको वह पैसा देने होगा, जिसका भुगतान आप को करना है. बजटीय प्रावधान क्यों नहीं करते? आप विज्ञापनों के लिए 580 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान कर सकते हैं, लेकिन आप 400 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान नहीं कर सकते. कौल ने दिल्ली सरकार के वकील से यह बात तब कही जब उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी की सरकार रैपिड रेल परियोजना के लिए बजटीय आवंटन कर रही है. पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया भी शामिल थे, ने कहा कि उसने सरकार को "वे क्या कर रहे हैं" का एहसास कराने के लिए विज्ञापन उद्देश्यों के लिए आवंटित धन को आरआरटीएस परियोजना में स्थानांतरित करने का आदेश दिया.
इसमें कहा गया है कि दिल्ली सरकार चाहती है कि "सारा पैसा केवल पर्यावरण निधि से निकाला जाए और "बजटीय प्रावधान नहीं करना चाहती." शीर्ष अदालत के समक्ष राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आत्माराम नाडकर्णी ने कहा, “हम आपके आदेश के अनुपालन को लेकर चिंतित हैं. शीर्ष अदालत ने पूछा, क्या आपने भुगतान किया है या आपने भुगतान नहीं किया है? क्या आपने फंड ट्रांसफर किया है या नहीं.” 24 नवंबर को दिल्ली सरकार द्वारा जारी मंजूरी आदेश का हवाला देते हुए, नादकर्णी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आरआरटीएस के दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के निर्माण के लिए अपने हिस्से की पूर्ति के लिए 415 करोड़ का भुगतान करके केवल "आंशिक अनुपालन" किया गया है. यह भी पढ़ें : Uttarkashi Tunnel Rescue Operation: सुरंग में फंसे मजदूरों को बचाने की जगी उम्मीद, ड्रिलिंग का काम पूरा, बाहर आने पर श्रमिकों के स्वास्थ्य प्ररीक्षण के लिए ने पुख्ता इंतेजाम- VIDEO
उन्होंने कहा, "दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर के लिए 150 करोड़ रुपये का निपटान नहीं किया गया है." शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि स्वीकृत राशि एनसीआरटीसी के खाते में जमा नहीं की गई होगी - जो भारत सरकार और दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों की एक संयुक्त उद्यम कंपनी है और आरआरटीएस परियोजना को लागू कर रही है. हालांकि, मंजूरी आदेश में ही कहा गया है कि यह 'आंशिक अनुपालन' है. आंशिक अनुपालन का कोई सवाल ही नहीं हो सकता और पूर्ण अनुपालन तय कार्यक्रम के अनुसार होना चाहिए.' मामले की आगे की सुनवाई 7 दिसंबर को होगी.
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 28, 2023 04:33 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

