Sugar Price Hike: चीनी की कीमतों में बड़ा उछाल; क्या इथेनॉल की ओर डायवर्जन की वजह से सिर्फ़ 12 दिनों में खुदरा कीमतों में आया है 20% का उछाल?
त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले देश के प्रमुख शहरों में चीनी के खुदरा भाव में पिछले 12 दिनों के भीतर लगभग 20 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. चालू चीनी सत्र (2025–26) में कम उत्पादन, गन्ने से एथेनॉल बनाने के लिए हुआ डायवर्जन और साल के अंत में रिकॉर्ड-लो क्लोजिंग स्टॉक की आशंकाओं के चलते यह मूल्य वृद्धि देखी जा रही है.
नई दिल्ली: आगामी त्योहारी सीजन (रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी और दिवाली) से ठीक पहले आम उपभोक्ताओं की जेब पर महंगाई का नया बोझ पड़ा है. देश भर के प्रमुख खुदरा बाजारों में पिछले 12 दिनों (7 अगस्त के बाद) के भीतर चीनी की कीमतों में 19 से 21 प्रतिशत का तीव्र उछाल दर्ज किया गया है. महज दो हफ्तों के भीतर खुदरा चीनी के दाम (Sugar Price) ₹52 से बढ़कर ₹60 से ₹62 प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच गए हैं.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चालू चीनी सीजन में कम उत्पादन के आंकड़े, गन्ने का एथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्जन और रिकॉर्ड-लो क्लोजिंग स्टॉक को लेकर चल रही सट्टेबाजी ने कीमतों को तेजी से ऊपर धकेला है. हालांकि, केंद्र सरकार ने बाजार में पर्याप्त उपलब्धता का दावा करते हुए 30 नवंबर 2026 तक डीलरों पर सख्त स्टॉक लिमिट लागू कर रखी है, लेकिन बाजार की धारणा पर इसका सीमित असर दिखाई दे रहा है. यह भी पढ़ें: Sugar Supply India: भारत में चीनी संकट का कोई खतरा नहीं; बलरामपुर चीनी मिल्स बोली- नवंबर तक का स्टॉक पर्याप्त
क्यों उछल रही हैं कीमतें? उत्पादन और मांग का गणित
चालू चीनी विपणन वर्ष (अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026) के दौरान घरेलू आपूर्ति और खपत के बीच का अंतर कीमतों में तेजी का मुख्य कारण बनकर उभरा है:
- कम उत्पादन: चीनी उद्योग ने शुरुआत में 342 लाख मीट्रिक टन (LMT) उत्पादन का अनुमान लगाया था. इसके आधार पर सरकार ने दो चरणों में 20 LMT चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी.
- वास्तविक आंकड़े: बाद में वास्तविक उत्पादन घटकर केवल 308 LMT रह गया.
- एथेनॉल के लिए डायवर्जन: कुल 308 LMT उत्पादन में से लगभग 28 LMT चीनी के बराबर शीरा/गन्ना एथेनॉल सम्मिश्रण (Ethanol Blending) के लिए डायवर्ट कर दिया गया, जिससे घरेलू बाजार के लिए केवल 280 LMT चीनी बची.
- घरेलू मांग: देश में प्रति माह लगभग 24 LMT (सालाना करीब 285–290 LMT) चीनी की खपत होती है. जब तक सरकार ने मई में निर्यात पर रोक लगाई, तब तक 8 LMT चीनी पहले ही देश से बाहर जा चुकी थी.
2010 के बाद सबसे कम क्लोजिंग स्टॉक का अनुमान
बाजार रिपोर्टों के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को चालू सत्र समाप्त होने पर देश का अंतिम चीनी भंडार (Closing Stock) रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ सकता है.
विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 सितंबर को देश के पास लगभग 32 लाख मीट्रिक टन (LMT) का स्टॉक बचेगा, जबकि सामान्य परिस्थितियों में अगले पेराई सत्र की शुरुआत तक बाजार स्थिरता के लिए कम से कम 60 LMT के बफर स्टॉक की आवश्यकता होती है. पिछले साल यह क्लोजिंग स्टॉक 47 LMT था। वर्ष 2010 के बाद यह अब तक का सबसे कम साल-अंत स्टॉक होने का अनुमान है.
सट्टेबाजी और गलत अनुमानों पर विशेषज्ञों की राय
कमोडिटी बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि सीजन के अंत में उपलब्ध वास्तविक मात्रा को लेकर व्यापारियों और मिलों के बीच भारी अनिश्चितता और सट्टेबाजी है.
उद्योग सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में उद्योग संगठनों द्वारा उत्पादन के अधिक अनुमान पेश किए गए थे, जिसके कारण निर्यात और एथेनॉल डायवर्जन की छूट दी गई. अब जब वास्तविक आपूर्ति कम पड़ रही है, तो थोक मंडियों (जैसे महाराष्ट्र और दिल्ली) में एक्स-मिल कीमतें बढ़ने का सीधा असर खुदरा भाव पर पड़ रहा है.
सरकार की कार्रवाई: स्टॉक लिमिट और आयात की समीक्षा
मूल्य वृद्धि पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने कई एहतियाती कदम उठाए हैं:
- स्टॉक लिमिट लागू: आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत चीनी डीलरों और थोक व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 400 टन (4,000 क्विंटल) और अधिकतम होल्डिंग अवधि 30 दिन तय की गई है.
- साप्ताहिक स्टॉक घोषणा: सभी व्यापारियों को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर अपने स्टॉक की साप्ताहिक जानकारी देना अनिवार्य किया गया है.
- आयात व एथेनॉल समीक्षा: त्योहारी मांग को देखते हुए सरकार सीमित मात्रा में शुल्क-मुक्त चीनी आयात की संभावना और आगामी सत्र में एथेनॉल के लिए गन्ने के डायवर्जन को सीमित करने पर भी विचार कर रही है ताकि घरेलू बाजार में कीमतें नियंत्रित रह सकें.