ST Bus Service News: महाराष्ट्र में बढ़ेगी ‘लाल परी’ की संख्या, एसटी महामंडल के बेड़े में शामिल होंगी 5,000 नई बसें
महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (MSRTC) के बेड़े में जल्द ही 5,000 नई बसें शामिल की जाएंगी. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिससे ग्रामीण इलाकों में बस सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी.
ST Bus Service News: महाराष्ट्र के ग्रामीण और शहरी इलाकों में आम यात्रियों की जीवनरेखा मानी जाने वाली महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (MSRTC) की एसटी बसों के बेड़े को नया रूप मिलने जा रहा है. परिवहन मंत्री और एसटी महामंडल के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक ने जानकारी दी है कि 5,000 नई बसों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है.
न्यूनतम बोली के साथ टाटा मोटर्स जैसी प्रतिष्ठित कंपनी ने इस टेंडर में सबसे कम दर का प्रस्ताव दिया है. महामंडल का दावा है कि नई बसों की गुणवत्ता और यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. यह भी पढ़े: MSRTC Bus: स्कूलों की पिकनिक के लिए अब केवल एसटी बस, प्राइवेट बसों का इस्तेमाल करने पर होगी कार्रवाई, जानें क्या है सरकार का नया नियम
पुरानी और खटारा बसों की समस्या से मिलेगी मुक्ति
अगले छह महीनों के दौरान लगभग 5,000 से अधिक पुरानी एसटी बसें अपनी सेवा अवधि पूरी कर स्क्रैप (भंगार) में जाने वाली हैं. ऐसे में नई बसों के आने से पुरानी गाड़ियों पर से परिचालन का दबाव कम होगा और तकनीकी खराबी के कारण बसें बंद होने की समस्या पर अंकुश लगेगा.
इससे पहले 2x2 सीटिंग अरेंजमेंट वाली 2,640 'लाल परी' बसें बेड़े में शामिल की जा चुकी हैं, जबकि 3x2 सीटिंग वाली 3,000 'राजमाता जिजाऊ' बसों को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है.
ग्रामीण इलाकों और स्कूली छात्रों को होगी आसानी
वर्तमान में बसों की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में अचानक बस फेरियां रद्द होने और छात्रों को स्कूल आने-जाने में होने वाली समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था.
परिवहन मंत्री ने आश्वासन दिया है कि नई बसों का बेड़ा उपलब्ध होने के बाद मांग के अनुसार बस फेरियां (मागेल त्याला बस) उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा, जिससे ग्रामीण महाराष्ट्र में कनेक्टिविटी बेहतर होगी.
भविष्य में ई-बसों पर रहेगा ध्यान
5,000 पारंपरिक डीजल बसों का यह चरण एसटी महामंडल के परिवहन इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है.
एसटी महामंडल प्रशासन के अनुसार, इस चरण के बाद महामंडल पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक बसों (E-Buses) को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा. इससे यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी.