SIR: मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा बड़ा फैसला
भारत का सर्वोच्च न्यायालय बुधवार, 27 मई 2026 को उन याचिकाओं पर अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिनमें भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन यानी एसआईआर कराने के फैसले को चुनौती दी गई है. इस प्रक्रिया में मतदाताओं से साल 2002 या 2003 की मतदाता सूची से अपनी पैतृक कड़ियाँ साबित करने की शर्त रखी गई थी, जिस पर विवाद खड़ा हुआ था.
नई दिल्ली, 27 मई: भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) आज बुधवार को एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाने जा रहा है. शीर्ष अदालत भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर अपना निर्णय स्पष्ट करेगी. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ इस संवेदनशील विषय पर फैसला सुनाएगी. इस साल की शुरुआत में देश भर के कई राज्यों से आए वकीलों और चुनाव आयोग की लंबी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. यह भी पढ़ें: SIR In Karnataka: कर्नाटक में विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान शुरू, 5.55 करोड़ से अधिक मतदाताओं को किया जाएगा कवर
क्या है 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) का मुख्य विवाद?
यह पूरा कानूनी विवाद निर्वाचन आयोग द्वारा लागू की गई एक विशेष शर्त को लेकर शुरू हुआ था. चुनाव आयोग ने नियम बनाया था कि जिन मतदाताओं के नाम साल 2002 की मतदाता सूची (या कुछ राज्यों में साल 2003 की सूची) में दर्ज नहीं थे, उन्हें भारत का वैध नागरिक और मतदाता साबित होने के लिए एक कठिन प्रक्रिया से गुजरना होगा. उन्हें ऐसे व्यक्ति के साथ दस्तावेजी रूप से अपनी पैतृक कड़ियाँ (वंशानुगत संबंध) साबित करनी होंगी, जिसका नाम उस दौर की मतदाता सूची में पहले से शामिल था.
याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी थी कि यह शर्त पूरी तरह से असंवैधानिक है. इससे वास्तविक भारतीय नागरिकों और मतदाताओं के मताधिकार छिनने (Disenfranchise) का गंभीर खतरा पैदा हो गया है, विशेषकर समाज के हाशिए पर रहने वाले गरीब, अशिक्षित और प्रवासी (Migrant) मजदूरों के पास अपनी पीढ़ियों के पुराने दस्तावेजी सबूत खोजना और उन्हें पेश करना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है.
चुनाव आयोग की शक्तियों को चुनौती; सुप्रीम कोर्ट ने जोड़ा था पहचान का विकल्प
अदालत में दायर याचिकाओं में चुनाव आयोग की इस विशेष संशोधन कवायद की वैधानिकता पर सीधे सवाल उठाए गए थे. याचिकाकर्ताओं का रुख था कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 (वयस्क मताधिकार), जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और उसके तहत बनाए गए स्थापित नियमों के दायरे से बाहर जाती है, यानी आयोग अपनी शक्तियों का अतिक्रमण कर रहा है.
इस लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने बीच-बीच में कई अंतरिम निर्देश (Interim Directions) भी जारी किए थे ताकि आम जनता को होने वाली परेशानियों को कम किया जा सके और इस प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जा सके. शुरुआत में निर्वाचन आयोग ने सत्यापन के लिए केवल 11 विशिष्ट दस्तावेजों को ही मान्यता दी थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने बाद में हस्तक्षेप करते हुए इस प्रक्रिया में देश के एक अन्य प्रमुख आधिकारिक पहचान पत्र को भी एक अतिरिक्त वैध दस्तावेज के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया था, ताकि नागरिकों को राहत मिल सके.
बिहार से शुरू होकर कई राज्यों तक फैला मामला; जनवरी में सुरक्षित हुआ था फैसला
इस बड़े कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि साल 2025 के मध्य से जुड़ी हुई है। अधिकांश याचिकाएं जून पिछले साल (2025) तब दायर की गई थीं, जब निर्वाचन आयोग ने सबसे पहले बिहार में इस विशेष गहन संशोधन (SIR) को लागू करने का निर्णय लिया था.
बिहार के बाद इस कवायद का विस्तार देश के कई अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी कर दिया गया, जिनमें पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्य शामिल थे. दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने अदालत में इस फैसले का पुरजोर बचाव किया था. आयोग का तर्क था कि इस संशोधन का एकमात्र उद्देश्य मतदाता सूचियों की 'शुद्धता और पवित्रता' सुनिश्चित करना है, ताकि फर्जी मतदाताओं, दोहरे पंजीकरण (Duplication) और अपात्र लोगों को सूची से पूरी तरह बाहर किया जा सके. दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद, सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बीती 29 जनवरी 2026 को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जो आज सार्वजनिक किया जाएगा.
(The above story first appeared on LatestLY on May 27, 2026 08:34 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

