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भारत में सोने की मांग में भारी गिरावट: आयात शुल्क बढ़ने से 70% तक घटा गोल्ड का कारोबार, ईटीएफ की तरफ बढ़ा निवेशकों का रुझान

भारत सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद घरेलू बाजार में भौतिक सोने की मांग में लगभग 70% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। टैक्स का कुल बोझ बढ़कर 18.45% होने और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण खुदरा खरीदारों ने दूरी बना ली है। हालांकि, इस नीतिगत बदलाव के बीच डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है.

भारत में सोने की मांग में भारी गिरावट: आयात शुल्क बढ़ने से 70% तक घटा गोल्ड का कारोबार, ईटीएफ की तरफ बढ़ा निवेशकों का रुझान
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

बिजनेस डेस्क, 2 जून: भारत के सर्राफा बाजार (Bullion Market) से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ सोने पर आयात शुल्क (Import Duty on Gold) में की गई भारी बढ़ोतरी के बाद इसकी मांग में लगभग 70% की ऐतिहासिक संकुचन (Contraction) देखा गया है. हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, 27 मई को समाप्त हुए पखवाड़े में सोने की घरेलू मांग घटकर महज 7.5 टन रह गई, जो पिछले वर्ष की इसी समान अवधि में लगभग 25 टन थी. हाल के वर्षों में यह भारतीय स्वर्ण बाजार में दर्ज की गई सबसे तेज गिरावटों में से एक है, जिसने आभूषण उद्योग को गहरे असमंजस में डाल दिया है. यह भी पढ़ें: Gold Price Today: शादी के सीजन के बीच सोने की कीमतों में गिरावट, दिल्ली, मुंबई और चेन्नई समेत बड़े शहरों में जानें 22K और 24K गोल्ड के ताजा रेट

नीतिगत बदलाव के बाद टैक्स का बोझ हुआ दोगुना

सोने की मांग में आई इस भारी गिरावट का मुख्य कारण सरकार द्वारा इसी महीने (13 मई को) लिया गया वह नीतिगत फैसला है, जिसके तहत सोने पर बुनियादी आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर सीधे 15% कर दिया गया था. इस वृद्धि के बाद, 3% माल एवं सेवा कर (GST) को मिलाकर उपभोक्ताओं पर सोने की खरीद पर लगने वाला कुल प्रभावी टैक्स बोझ 9.18% से बढ़कर अब 18.45% हो गया है, जो कि लगभग दोगुना है.

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, सरकार का यह कदम भारतीय रुपये को मजबूती देने, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के प्रभाव को कम करने और मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे भू-राजनीतिक संकटों से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया गया था. हालांकि, बाजार में इसका तत्काल असर खुदरा आभूषण क्षेत्र की भारी सुस्ती के रूप में सामने आया है.

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एमसीएक्स पर सोने-चांदी में उतार-चढ़ाव

घरेलू टैक्स संरचना में बदलाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. 1 जून को कमोडिटी बाजार में वायदा कारोबार के दौरान एमसीएक्स गोल्ड जून वायदा में आंशिक गिरावट देखी गई और यह ₹1,54,725 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था. वहीं दूसरी ओर, चांदी का जुलाई वायदा मामूली बढ़त के साथ ₹2,67,980 प्रति किलोग्राम पर दर्ज किया गया. यह मिश्रित रुझान निवेशकों के बदलते रुख और घरेलू स्तर पर मांग की अनिश्चित स्थितियों को दर्शाता है.

ज्वैलरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट, डिजिटल गोल्ड ईटीएफ चमके

आयात शुल्क बढ़ने का सीधा असर शेयर बाजार में सूचीबद्ध प्रमुख आभूषण निर्माता कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ा है. लागत बढ़ने और खुदरा मांग घटने की आशंका के चलते कल्याणी ज्वैलर्स (Kalyan Jewellers), थंगमयिल ज्वैलर्स (Thangamayil Jewellers) और टाइटन कंपनी (Titan Company) जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों पर भारी बिकवाली का दबाव देखा गया.

इसके विपरीत, भौतिक सोना न खरीदकर कागजी या डिजिटल सोने में निवेश करने के माध्यम यानी गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (Gold ETFs) में निवेशकों की भारी आमद देखी गई है. निप्पॉन इंडिया गोल्ड ईटीएफ, टाटा गोल्ड ईटीएफ, एचडीएफसी गोल्ड ईटीएफ और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ जैसे प्रमुख फंड्स में 4% से 6% तक की शानदार बढ़त दर्ज की गई है.  इसी तरह सिल्वर ईटीएफ भी 4% से 6% की रेंज में मजबूत हुए हैं.

बाजार विश्लेषकों का नजरिया

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च आयात शुल्क, महंगे वैश्विक दाम और भू-राजनीतिक तनाव के इस त्रिकोणीय प्रभाव ने आभूषणों के प्रति आम खरीदार के आकर्षण को अस्थाई रूप से कम कर दिया है. विश्लेषकों का कहना है कि जब तक टैक्स नीतियों में दोबारा स्थिरता नहीं आती या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें कम होकर आम खरीदारों के बजट में नहीं बैठतीं, तब तक भौतिक सोने का बाजार आने वाले कुछ समय तक इसी तरह सुस्त बना रह सकता है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 02, 2026 12:27 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).