Ram Mandir Trust Resignations: दान विवाद के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा; एसआईटी रिपोर्ट के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए छोड़ा पद
अयोध्या के श्री राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान राशि के कथित गबन विवाद ने अब एक बड़ा रूप ले लिया है. मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट और 8 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रमुख ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है.
अयोध्या/लखनऊ: अयोध्या के श्री राम मंदिर (Ayodhya Shri Ram Mandir) में भक्तों के चढ़ावे और दान राशि में कथित हेराफेरी के मामले में शुक्रवार, 26 जून 2026 को एक बहुत बड़ा प्रशासनिक उलटफेर देखने को मिला. मंदिर के खजाने और प्रबंधन की देखरेख करने वाले 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) ने नैतिक आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके साथ ही ट्रस्ट के एक और वरिष्ठ और महत्वपूर्ण सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा (Dr. Anil Mishra) ने भी अपना त्यागपत्र सौंप दिया है.
यह चौंकाने वाला घटनाक्रम राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने और उसके तुरंत बाद मंदिर के काउंटिंग रूम से जुड़े 8 कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय ने ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को अपना इस्तीफा भेजा है.
'निष्पक्ष जांच और मंदिर की शुचिता के लिए छोड़ा पद'
ट्रस्ट के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि वे इस पूरे मामले में किसी भी तरह की जांच को प्रभावित नहीं करना चाहते. चंपत राय ने अपने पत्र में लिखा कि वे भगवान राम के काज और मंदिर की पवित्रता को किसी भी राजनीतिक विवाद से दूर रखने के लिए, जांच पूरी होने तक नैतिक जिम्मेदारी (Moral Responsibility) लेते हुए पद छोड़ रहे हैं. हालांकि, उन्होंने अपने ऊपर लगे किसी भी प्रकार के सीधे आरोपों या गलत काम में संलिप्तता से पूरी तरह इनकार किया है.
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता चंपत राय साल 2020 में केंद्र सरकार द्वारा ट्रस्ट के गठन के समय से ही इसके महासचिव के रूप में दिन-प्रतिदिन के कार्यों और मंदिर निर्माण की कमान संभाल रहे थे.
8 कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा था दबाव
यह विवाद इस महीने की शुरुआत में तब गहराया जब समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडे और अन्य विपक्षी नेताओं ने मंदिर के चढ़ावे से करीब ₹7 करोड़ से ₹7.5 करोड़ रुपये गायब होने का आरोप लगाया था. इसके बाद सरकार ने 14 जून 2026 को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था.
गुरुवार देर रात एसआईटी की सिफारिश पर अयोध्या पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की. इसके कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने नामजद सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जिनमें कैश काउंटिंग स्टाफ और चंपत राय का पूर्व ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं. इस गिरफ्तारी के बाद विपक्ष और स्थानीय साधु-संतों ने निचले स्तर के कर्मियों को 'बलि का बकरा' बनाने का आरोप लगाते हुए ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व के इस्तीफे की मांग तेज कर दी थी.
चंपत राय ने महासचिव पद से इस्तीफा दिया
प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मांगी ऑडिट रिपोर्ट
विवाद की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया है. बताया जा रहा है कि पीएमओ ने राम मंदिर ट्रस्ट की बैलेंस शीट, बैंक जमा खातों और संपत्तियों का एक व्यापक और स्वतंत्र ऑडिट (Comprehensive Audit) कराने के निर्देश दिए हैं. विपक्ष के नेता अरविंद केजरीवाल और संजय राउत लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे और पूरे घोटाले की अदालती निगरानी में जांच की मांग कर रहे थे.
ट्रस्ट के पुनर्गठन और सीईओ की नियुक्ति पर विचार
चंपत राय और अनिल मिश्रा के अचानक इस्तीफे के बाद अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर प्रशासनिक फेरबदल और पुनर्गठन की तैयारियां शुरू हो गई हैं. सरकारी सूत्रों के संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस तरह की वित्तीय लापरवाहियों को रोकने और दान प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित करने के लिए सरकार समर्थित किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी या मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. आने वाले दिनों में होने वाली ट्रस्ट के बोर्ड सदस्यों की बैठक में इन इस्तीफों को औपचारिक मंजूरी देने के साथ ही नए उत्तराधिकारियों के नामों का फैसला किया जाएगा.