TCS नासिक केस के बाद पुणे में नया मामला, Wipro की पूर्व कर्मचारी ने शारीरिक संबंध और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का लगाया आरोप, शिकायत दर्ज: VIDEO
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Pune Wipro Harassment: महाराष्ट्र के पुणे स्थित हिंजवडी आईटी पार्क की विप्रो टेक्नोलॉजीज (Wipro Technologies) की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने कंपनी और अपने वरिष्ठ सहयोगियों के खिलाफ धार्मिक भेदभाव और जबरन इस्तीफा लिखवाने के गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़ित महिला ने हिंजवडी पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और कंपनी को कानूनी नोटिस भी भेजा है. आईटी क्षेत्र में कार्यस्थल पर उत्पीड़न का यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में नासिक के टीसीएस (TCS) परिसर में हुए कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने कोर्ट में अपनी दूसरी चार्जशीट दाखिल की है.

वरिष्ठ सहयोगियों पर दबाव बनाने का आरोप

विप्रो की पूर्व कर्मचारी का आरोप है कि कंपनी में उनके शामिल होने के पहले दिन से ही विशिष्ट सहकर्मियों द्वारा उन्हें परेशान किया जाने लगा था. शिकायतकर्ता के अनुसार, शाहिना रफीक नामक एक कर्मचारी ने उन्हें लगातार प्रताड़ित किया. महिला का दावा है कि उन पर कुछ अनुचित मांगों को मानने और कंट्री हेड रामकुमार के साथ संबंध बनाने का दबाव डाला गया, ताकि उनका स्थानांतरण (ट्रांसफर) दुबई किया जा सके. पीड़िता का आरोप है कि उन्हें वहां किसी शेख से शादी करने और वित्तीय लाभ का लालच दिया गया, तथा बात न मानने पर नौकरी से हटाने की धमकी दी गई थी.

आंतरिक तंत्र की विफलता और बर्खास्तगी

शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने पिछले दस महीनों के दौरान इस मानसिक उत्पीड़न को सहन किया. उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस पूरे मामले की रिपोर्ट कंपनी के आंतरिक प्रशासन और मानव संसाधन (HR) विभाग को दी गई, तो उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे को गंभीरता से लेने के बजाय खारिज कर दिया. पीड़िता के अनुसार, 24 अप्रैल 2026 को इस्तीफा देने के बाद जब उन्होंने अपनी बर्खास्तगी का ठोस कारण मांगा, तो प्रबंधन ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया. महिला का कहना है कि उन्हें गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाला गया है.

पुलिस जांच और पीड़िता की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शिकायतकर्ता को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच और तथ्यों के सत्यापन के बाद औपचारिक रूप से प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जाएगी. शिकायतकर्ता की मुख्य मांग है कि उन्हें उनकी नौकरी वापस दी जाए. इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि सभी निजी क्षेत्र के संगठनों और आईटी कंपनियों के भीतर ऐसे गंभीर मामलों से निपटने के लिए एक समर्पित और पारदर्शी संस्थागत तंत्र (Institutional Mechanism) अनिवार्य रूप से स्थापित किया जाना चाहिए.

इससे पहले  टीसीएस नासिक जबरन धर्मांतरण का मामला

पुणे का यह मामला महाराष्ट्र के आईटी सेक्टर में चल रहे एक और बड़े विवाद के बीच सामने आया है. नासिक के देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में मार्च 2026 को टीसीएस (TCS) कंपनी से जुड़े एक परिसर में यौन उत्पीड़न और जबरन धार्मिक प्रथाएं थोपने का मामला दर्ज किया गया था. इस मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) ने हाल ही में नासिक कोर्ट में 8 आरोपियों के खिलाफ दूसरी चार्जशीट दाखिल की है.

इस मामले में पुलिस ने अब तक कुल 1,500 पन्नों की चार्जशीट पेश की है, जिसमें जबरन धार्मिक रूपांतरण के प्रयासों के सबूत मिलने का दावा किया गया है. राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए कंपनी में 'विषाक्त कार्य संस्कृति' और आंतरिक शिकायत समिति (POSH) के नियमों के उल्लंघन पर चिंता जताई थी. आईटी क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों में बैक-टू-बैक आए इन मामलों ने कॉर्पोरेट जगत में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और आंतरिक नियमों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.