HUL Share Price: प्रिया नायर बनीं HUL की नई बॉस, निवेशकों ने दिखाया भरोसा, शेयर 4% उछला

प्रिया नायर हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) की नई एमडी और सीईओ नियुक्त हुई हैं, जिससे कंपनी के शेयरों में 4% का उछाल आया. निवेशक उनसे उम्मीद कर रहे हैं कि वे कंपनी की धीमी ग्रोथ, सुस्त मांग और बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों से निपटेंगी. नायर HUL का नेतृत्व करने वाली पहली महिला हैं और उन पर कंपनी को फिर से तेज़ ग्रोथ की राह पर लाने की बड़ी ज़िम्मेदारी है.

नई दिल्ली: हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL), जो देश की सबसे बड़ी कंज्यूमर सामान बनाने वाली कंपनियों में से एक है, को जल्द ही एक नई मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) मिलने वाली हैं. प्रिया नायर 1 अगस्त से यह ज़िम्मेदारी संभालेंगी. इस घोषणा के अगले ही दिन, यानी शुक्रवार को कंपनी के शेयरों में 4.6% तक की ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई.

बाजार के जानकारों (Analysts) ने इस बदलाव का स्वागत किया है. उनका मानना है कि यह इस बात का संकेत है कि HUL की पैरेंट कंपनी यूनिलीवर, भारत में अपनी ग्रोथ को फिर से पटरी पर लाने के लिए बहुत गंभीर है. भारत यूनिलीवर के लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है.

कौन हैं प्रिया नायर?

प्रिया नायर, रोहित जावा की जगह लेंगी जो 31 जुलाई को पद छोड़ रहे हैं. खास बात यह है कि प्रिया HUL के इतिहास में इस पद पर पहुँचने वाली पहली महिला होंगी.

उनका यूनिलीवर के साथ लगभग 30 सालों का लंबा अनुभव है. इससे पहले भी वह HUL में होम केयर (घर की देखभाल से जुड़े प्रोडक्ट्स) और ब्यूटी (सौंदर्य) बिजनेस की प्रमुख रह चुकी हैं. उनके नेतृत्व में HUL के होम केयर सेगमेंट के मुनाफे में शानदार बढ़ोतरी हुई थी. अभी वह यूनिलीवर में ग्लोबल लेवल पर ब्यूटी और वेलबीइंग बिजनेस की प्रेसिडेंट हैं.

HUL को क्यों थी नए नेतृत्व की ज़रूरत?

पिछले कुछ समय से HUL की ग्रोथ धीमी पड़ गई है. कंपनी कई चुनौतियों से जूझ रही है, जैसे:

आलम यह है कि पिछले छह सालों में HUL की वॉल्यूम ग्रोथ (बिकने वाले सामान की संख्या) 5% से ज़्यादा नहीं बढ़ी है. पिछले दो साल से तो यह सिर्फ़ 2% पर अटकी हुई है.

नई CEO से क्या हैं उम्मीदें?

जानकारों का मानना है कि प्रिया नायर एक "आक्रामक MD" साबित हो सकती हैं. उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे कंपनी की ग्रोथ को फिर से रफ़्तार देंगी. विश्लेषकों ने नई CEO के लिए कुछ प्राथमिकताएँ भी बताई हैं:

  1. कोर बिजनेस को बचाना: साबुन, ब्यूटी और चाय जैसे अपने मुख्य प्रोडक्ट्स में बाज़ार हिस्सेदारी बनाए रखना.
  2. प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर ज़ोर: महंगे और ज़्यादा मुनाफ़े वाले प्रोडक्ट्स पर ध्यान देना.
  3. कमज़ोर ब्रांड्स को सुधारना: हॉर्लिक्स जैसे ब्रांड्स, जो अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं, उनके लिए नई रणनीति बनाना.
  4. डिस्ट्रीब्यूशन को आधुनिक बनाना: बदलते समय के साथ अपने सामान को ग्राहकों तक पहुँचाने के तरीकों को बेहतर बनाना.

पहले कंपनी का फ़ोकस मुनाफ़ा बढ़ाने पर ज़्यादा था, लेकिन अब जानकारों का मानना है कि ग्रोथ को प्राथमिकता देनी होगी, भले ही इसके लिए मुनाफ़े से थोड़ा समझौता करना पड़े.

आगे की राह मुश्किल

यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी कंज्यूमर गुड्स इंडस्ट्री ही सुस्त मांग और बढ़ती प्रतिस्पर्धा से जूझ रही है. ऑनलाइन कॉमर्स के आने से नए ज़माने के ब्रांड्स तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं, जिससे HUL जैसी बड़ी और पुरानी कंपनियों के लिए चुनौती बढ़ गई है.

अब सबकी निगाहें प्रिया नायर पर टिकी हैं कि वे इन चुनौतियों से कैसे निपटती हैं और HUL को फिर से तेज़ ग्रोथ की राह पर कैसे लाती हैं. उनका लंबा अनुभव और दमदार ट्रैक रिकॉर्ड निवेशकों में भरोसा तो जगा रहा है, लेकिन आगे की राह आसान नहीं है.

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