Hindi Language Row: मराठी के लिए एकजुट हुए ठाकरे बंधु, हिंदी थोपने के खिलाफ 5 जुलाई को ऐतिहासिक मार्च; संजय राउत ने किया ऐलान
महाराष्ट्र में अब मराठी भाषा को लेकर सियासत गर्मा गई है. शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने एक बड़ी घोषणा करते हुए राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की एक साथ फोटो सोशल मीडिया पर साझा की है.
Hindi Language Row: महाराष्ट्र में अब मराठी भाषा को लेकर सियासत गर्मा गई है. शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने एक बड़ी घोषणा करते हुए राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की एक साथ फोटो सोशल मीडिया पर साझा की है. इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया है कि हिंदी भाषा थोपने के खिलाफ दोनों ठाकरे बंधु एकजुट होकर एक साझा मार्च निकालेंगे. यह मार्च 5 जुलाई को मुंबई के गिरगांव चौपाटी से आजाद मैदान तक निकाला जाएगा. खास बात यह है कि इस मार्च में किसी भी राजनीतिक पार्टी का झंडा नहीं होगा. केवल मराठी भाषा और महाराष्ट्र की अस्मिता के मुद्दे को लेकर यह कदम उठाया जा रहा है.
राज ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह आंदोलन सिर्फ राजनीति से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह हर उस मराठी व्यक्ति की आवाज है जो अपनी भाषा और संस्कृति को बचाना चाहता है.
'मराठी के लिए एकजुट हुए ठाकरे बंधु'
महाराष्ट्रतील शाळांत हिंदी सक्ती विरोधात एकच आणि एकत्र मोर्चा निघेल!
जय महाराष्ट्र! pic.twitter.com/A8ATq2ra0k
— Sanjay Raut (@rautsanjay61) June 27, 2025
हिंदी के खिलाफ राजठाकरे की खुली चुनौती
उन्होंने साफ कहा कि राज्य सरकार द्वारा स्कूलों में हिंदी थोपने की कोशिशों के खिलाफ यह एक खुली चुनौती. राज ठाकरे ने यह भी बताया कि राज्य के शिक्षा मंत्री दादा भुसे से उनकी बातचीत हुई, लेकिन मंत्री उनके सवालों का जवाब नहीं दे पाए. उन्होंने दोहराया कि उनका विरोध हिंदी के खिलाफ कल भी था, आज भी है और आगे भी रहेगा.
राज ठाकरे ने यह भी कहा कि इस मार्च में शिक्षाविद, लेखक, भाषाविद और आम लोग भी भाग लेंगे. एक अपील की गई है कि सभी अभिभावक और छात्र इस दिन शामिल होकर अपनी बात सरकार तक पहुंचाएं.
'मराठी' को लेकर एकजुट हुआ ठाकरे परिवार
इस आंदोलन में न सिर्फ राज ठाकरे, बल्कि उद्धव ठाकरे की भी भागीदारी अब तय मानी जा रही है. संजय राउत द्वारा साझा की गई दोनों भाइयों की तस्वीर और एकता का संदेश यह संकेत है कि अब मराठी भाषा को लेकर ठाकरे परिवार एक मंच पर आ गया है.
इस आंदोलन का मकसद है मराठी भाषा और संस्कृति को बचाना और यह बताना कि महाराष्ट्र की आत्मा मराठी में बसती है. अब देखना होगा कि यह एकता किस हद तक असर दिखाती है और क्या सरकार अपने फैसलों पर पुनर्विचार करती है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 27, 2025 09:42 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

