मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे की संभावित गठबंधन को लेकर है. दोनों नेता सीधे तौर पर गठबंधन का ऐलान तो नहीं कर रहे, लेकिन शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राऊत के हालिया बयान ने अटकलों को और हवा दे दी है. राऊत का मानना है कि अगर ठाकरे बंधु साथ आते हैं, तो मुंबई, ठाणे, नासिक, कल्याण और छत्रपति संभाजीनगर जैसी प्रमुख महापालिकाओं में जीत तय है.
एक मंच पर आने के संकेत
उद्धव और राज ठाकरे के बीच नजदीकी की चर्चा इस साल की शुरुआत में तब शुरू हुई जब दोनों ने मराठी भाषा के मुद्दे पर एकजुटता दिखाई. इसके बाद, राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे के निवास 'मातोश्री' पर जाकर जन्मदिन की बधाई दी, जिससे गठबंधन की संभावना और मजबूत मानी जाने लगी.
बीजेपी का तीखा हमला
बीजेपी नेता प्रवीण डेरेकर ने राऊत के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि उद्धव गुट ऐसे दूल्हे की तरह है जिसने दिमाग में पहले ही शादी कर ली है. उनका दावा है कि बिना राज ठाकरे के साथ गठबंधन के उद्धव गुट की स्थिति कमजोर हो सकती है.
राज ठाकरे की रणनीति
राज ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा कि मुंबई में सिर्फ दो पार्टियों शिवसेना (UBT) और MNS का जनाधार गहरा है. उन्होंने अपने नेताओं को मतदाता सूची की जांच और बीएमसी चुनाव की तैयारी पर तुरंत काम शुरू करने का निर्देश दिया.
महापालिका चुनाव पर असर
अगर ठाकरे बंधु साथ आते हैं, तो यह महाराष्ट्र के स्थानीय चुनावी समीकरण को पूरी तरह बदल सकता है. खासकर मुंबई और ठाणे जैसे शहरी क्षेत्रों में इसका बड़ा असर देखने को मिलेगा.













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