Jharkhand Municipal Elections 2026: झारखंड में 48 नगर निकायों के लिए मतदान शुरू, 6,124 उम्मीदवार मैदान में; यहां जानें पल-पल का लाइव अपडेट

झारखंड में 48 नगर निकायों के लिए मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई है. करीब 43.43 लाख मतदाता 6,124 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला कर रहे हैं, जिसके परिणाम 27 फरवरी को घोषित किए जाएंगे.

(Credit-Pixabay)

Jharkhand Municipal Elections 2026: झारखंड में स्थानीय सरकार के गठन के लिए आज सोमवार, 23 फरवरी 2026 को सुबह 7 बजे से मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई है. राज्य के 48 शहरी स्थानीय निकायों में पार्षद, अध्यक्ष और महापौर पदों के लिए वोट डाले जा रहे हैं. सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की कतारें देखी जा रही हैं. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच शुरू हुई यह वोटिंग शाम 5 बजे तक चलेगी.

चुनावी समीकरण

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, यह चुनाव झारखंड के शहरी विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. कुल 48 निकायों में चुनाव कराए जा रहे हैं, जिनमें 9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायतें शामिल हैं. इन क्षेत्रों में कुल 43.43 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं.  यह भी पढ़े: Jharkhand Municipal Elections 2026: झारखंड में नगर निकाय चुनाव के लिए थमा प्रचार, 23 फरवरी को होगा मतदान

यहां देखें लाइव

उम्मीदवारों और वार्डों की स्थिति

इस चुनावी महाकुंभ में कुल 6,124 उम्मीदवार मैदान में हैं. हालांकि राज्य में कुल 1,087 वार्ड हैं, लेकिन मतदान केवल 1,042 वार्डों में ही आयोजित किया जा रहा है. इसकी मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं.

सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी

प्रशासन ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा घेरा तैयार किया है. राज्य भर में कुल 4,307 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील और अति-संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. इसके अलावा, मतदान की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कई केंद्रों पर वेबकास्टिंग और सीसीटीवी कैमरों के जरिए मुख्यालय से सीधी निगरानी की जा रही है.

27 फरवरी को घोषित होंगे परिणाम

आज शाम 5 बजे मतदान समाप्त होने के बाद सभी मतपेटियों और मशीनों को सील कर संबंधित जिलों के स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जाएगा. चुनाव परिणामों की घोषणा 27 फरवरी 2026 को मतगणना के बाद की जाएगी.

इन चुनावों को राज्य की मुख्यधारा की राजनीति के लिए भी एक लिटमस टेस्ट माना जा रहा है, क्योंकि यह शहरी क्षेत्रों में विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं की पकड़ को स्पष्ट करेगा.

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