Bihar Voter List Row: 'गलत साबित हुआ तो रद्द हो सकती है संशोधन प्रक्रिया': बिहार वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट (Photo: Wikimedia Commons)

Bihar Voter List Row: बिहार में चल रहे ‘विशेष गहन संशोधन’ (Special Intensive Revision) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि अगर इस प्रक्रिया में कोई गैरकानूनी बात साबित होती है तो सितंबर तक इसके नतीजों को रद्द किया जा सकता है. यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इस वोटर लिस्ट संशोधन को लेकर विवाद और राजनीति गर्म है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान कई याचिकाएं दाखिल की गईं, जिनमें चुनाव आयोग के इस रिवेरिफिकेशन अभियान को चुनौती दी गई थी.

याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची में इस तरह का संशोधन संवैधानिक रूप से सही है या नहीं.

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कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने क्या तर्क दिया?

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि चुनाव आयोग नागरिकता साबित करने के लिए आधार कार्ड और अपने ही जारी किए गए वोटर आईडी कार्ड को मान्य नहीं मान रहा है, जबकि नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है. यह अधिकार केवल केंद्र सरकार, खासतौर पर गृह मंत्रालय के पास है.

उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग कह रहा है कि आधार नागरिकता का सबूत नहीं है, लेकिन यह तय करना कि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक है या नहीं, उनकी जिम्मेदारी ही नहीं है. अदालत पहले भी साफ कर चुकी है कि आयोग को सिर्फ मतदाताओं की पहचान की पुष्टि करनी है, न कि उनकी नागरिकता तय करनी."

क्या चुनावी तैयारियां हो सकती हैं प्रभावित?

बिहार में चल रहे इस ‘विशेष गहन संशोधन’ का मकसद वोटर लिस्ट से डुप्लीकेट, अपात्र या गलत नाम हटाना और नए योग्य मतदाताओं को जोड़ना बताया जा रहा है. लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि यह प्रक्रिया वोटरों को बाहर करने और चुनावी गणित प्रभावित करने के लिए की जा रही है.

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी अब इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना सकती है, क्योंकि अगर सितंबर तक किसी भी गैरकानूनी गतिविधि के सबूत मिलते हैं तो पूरी संशोधन प्रक्रिया रद्द हो सकती है. इससे बिहार चुनाव की तैयारियों पर सीधा असर पड़ेगा.

आगामी घटनाक्रम पर टिकी निगाहें

चुनाव आयोग की ओर से हालांकि यह कहा गया है कि यह अभ्यास आवश्यक है, क्योंकि 2004 से अब तक नियमित रूप से इस तरह की समीक्षा नहीं हुई थी और इस दौरान कई अपात्र लोग वोटर लिस्ट में जुड़ गए हैं. लेकिन अदालत के निर्देश के बाद अब सभी की निगाहें आने वाले हफ्तों में होने वाले घटनाक्रम पर टिकी रहेंगी.

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