6 अप्रैल 1980- जब भारतीय राजनीति में हुआ कमल का उदय! भाजपा की स्थापना दिवस पर जानें BJP का इतिहास, संघर्ष और सफलताओं की कहानी

भारतीय जनता पार्टी की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई थी, जिसने केवल दो सीटों से शुरुआत कर आज देश की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत का रूप ले लिया है. अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर नरेंद्र मोदी तक, पार्टी ने कई ऐतिहासिक मोड़ और जनआंदोलन देखे हैं. यह कहानी सिर्फ राजनीति की नहीं, विचारधारा, संघर्ष और परिवर्तन की भी है.

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कुछ तारीखें सिर्फ कैलेंडर पर निशान नहीं होतीं, वे समय की धारा मोड़ने वाले मोड़ बन जाती हैं. 6 अप्रैल ऐसी ही एक तारीख है – भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का स्थापना दिवस. आज जब भाजपा देश की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन चुकी है, तो आइए जानते हैं कि कैसे यह पार्टी 2 सीटों से शुरू होकर 300 से ज्यादा सीटों तक पहुंची और भारत की सियासत की धुरी बन गई.

जनसंघ से शुरू हुआ सफर: 1951 में बोया गया बीज  

बीजेपी की जड़ें 1951 में स्थापित भारतीय जनसंघ से जुड़ी हैं. इसकी स्थापना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी. जनसंघ का उद्देश्य था – भारत को एक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की विचारधारा पर खड़ा करना.

जनसंघ का नारा था – "एक देश, एक संविधान", जो जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के विरोध से भी जुड़ा हुआ था.

डॉ. मुखर्जी की रहस्यमयी मृत्यु (1953) के बाद पार्टी धीरे-धीरे बढ़ती रही, लेकिन कांग्रेस के वर्चस्व के बीच इसका दायरा सीमित ही रहा.

1977: जनता पार्टी में विलय और उथल-पुथल का दौर

1975 में जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया, तो देशभर में विरोध हुआ. आपातकाल के बाद 1977 में जनसंघ, कांग्रेस (O), लोकदल, समाजवादी पार्टी समेत कई दलों ने मिलकर जनता पार्टी बनाई और पहली बार कांग्रेस को हराया. मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने. मगर यह गठबंधन ज्यादा दिन नहीं टिक पाया. एक बड़ा विवाद था – डुअल मेंबरशिप (जनसंघ के सदस्य RSS से जुड़े रहते थे). इसके चलते जनता पार्टी में दरार पड़ी और जनसंघ से निकले नेताओं ने नया राजनीतिक संगठन बनाने का फैसला लिया.

6 अप्रैल 1980: भारतीय जनता पार्टी का जन्म 

1984 की हार: सिर्फ 2 सीटें और ‘अटल’ धैर्य

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की लहर थी. बीजेपी को पूरे देश में सिर्फ 2 सीटें मिलीं.

तब अटल जी ने संसद में कहा था – "अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा."

और सचमुच, ये भविष्यवाणी सच साबित हुई.

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अटल युग: सरकारें आईं, गिरीं, और फिर टिकीं

2004 की हार और आत्ममंथन का दौर

2004 में "India Shining" कैंपेन के बावजूद बीजेपी हार गई. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस दो बार सत्ता में आई. यह बीजेपी के लिए आत्ममंथन का समय था. पार्टी ने संगठन को मजबूत किया, युवा नेताओं को बढ़ावा दिया, और जनता से जुड़ने की रणनीति पर काम किया.

मोदी युग की शुरुआत: 2014 का सत्ता विस्फोट

2013 में बीजेपी ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया.

2014 के चुनाव में ‘अबकी बार मोदी सरकार’ नारा देशभर में छा गया.

बीजेपी को अकेले 282 सीटें मिलीं – पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी दल को पूर्ण बहुमत.

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भाजपा की ताकत: संगठन, विचारधारा और सेवा कार्य

स्थापना दिवस क्यों है खास?

6 अप्रैल को देशभर में बीजेपी कार्यकर्ता झंडा रोहण, प्रभात फेरी, पद यात्रा, सेवा अभियान आदि के जरिए स्थापना दिवस मनाते हैं. प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हैं, पार्टी के मूल्यों की याद दिलाते हैं और आगे की रणनीति साझा करते हैं.

 

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