2 दिसंबर की बड़ी खबरें और अपडेट्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

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-संचार साथी ऐप पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

-जासूसी की चिंताओं के बीच "संचार साथी" पर सरकार की सफाई

-पांच साल में यूरोपीय संघ का रक्षा खर्च बढ़कर करीब दोगुना हुआ

-कितना सफल हो पाएगा ऑस्ट्रेलिया में किशोरों के लिए सोशल मीडिया बैन

-2027 की जनगणना दो चरणों में होगी, लोकसभा में सरकार का बयान

"दूसरे विश्व युद्ध के बाद जर्मन अर्थव्यवस्था सबसे गहरे संकट में": जर्मन उद्योग महासंघ

जर्मन उद्योगों के बड़े संगठन ‘फेडरेशन ऑफ जर्मन इंडस्ट्रीज (बीडीआई) ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे गहरे संकट का सामना करना पड़ रहा है. मंगलवार (2 दिसंबर) को एक चेतावनी जारी करते हुए चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की गई.

बीडीआई के अध्यक्ष पेटर लाइबिंगर ने कहा, "यह अर्थव्यवस्था संघीय गणराज्य की स्थापना के बाद से सबसे गहरे संकट से गुजर रही है, बावजूद इसके संघीय सरकार पर्याप्त दृढ़ता से प्रतिक्रिया नहीं दे रही." जर्मनी की अर्थव्यवस्था दो साल से मंदी में है. स्थितियां ऐसी हैं कि अर्थव्यवस्था की रिकवरी आसान नहीं. इस दौरान देश में यूक्रेन युद्ध के बाद से ऊर्जा खर्च बढ़ा हुआ है, बड़े बाजारों में निर्यात की मांग कमजोर है, चीन एक औद्योगिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरा है, और अमेरिका के टैरिफ हमले जारी हैं.

पढ़ें: जर्मन कंपनियों के लिए चीन में अपना कारोबार बंद करना क्यों है मुश्किल

मई में सत्ता में आए कंजरवेटिव मैर्त्स ने यूरोजोन की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने का वादा किया है, जिसके लिए रक्षा और बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च एक अहम रास्ता होगा. जानकारों के मुताबिक, जर्मन अर्थव्यवस्था अगले साल गति पकड़ सकती है और सरकार भी 2026 में 1.3 % विकास दर का पूर्वानुमान लगा रही है.

मोटापे के इलाज के लिए ओजेम्पिक और वीगोवी जैसी दवाओं पर डब्ल्यूएचओ की पहली गाइडलाइन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मोटापे के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं से जुड़ी पहली गाइडलाइन जारी कर दी है. डब्ल्यूएचओ ने सोमवार (1 दिसंबर) को कहा है कि मोटापे के इलाज के लिए व्यायाम, सेहतमंद आहार और परामर्श के साथ-साथ वजन घटाने वाली दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है. ये सिफारिशें ऐसे समय में आई हैं जब ओजेम्पिक, वीगोवी और माउंजारो जैसी मोटापा-रोधी और मधुमेह की दवाओं के बारे में आम लोगों समेत डॉक्टरों और स्वास्थ्य प्रदाताओं के बीच काफी चर्चा है.

इन दवाओं से जुड़ी एक चिंता यह है कि जब लोग इन दवाओं का सेवन बंद कर देते हैं तो उनका वजन फिर से बढ़ जाता है. डब्ल्यूएचओ ने कहा कि उसकी सिफारिशें "सशर्त" हैं क्योंकि वजन कम करने वाली दवाएं मोटापे और मेटाबोलिक स्वास्थ्य समस्याओं का प्रभावी इलाज जरूर कर सकती हैं, लेकिन लंबी अवधि में इनके प्रभाव, लागत, स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव और अन्य कारकों पर डेटा अभी सीमित है.

संगठन के आंकड़ों के हिसाब से दुनिया में करीब 89 करोड़ लोग मोटापे का शिकार हैं. मोटापा शरीर में मधुमेह, पाचन, श्वसन समेत दिल की बीमारियों और कैंसर जैसे रोगों की वजह बन सकता है.

भारत में रूसी तेल आयात में गिरावट अस्थायी: क्रेमलिन

रूस ने कहा है कि भारत द्वारा रूसी तेल के आयात में हालिया गिरावट लंबे समय तक नहीं रहेगी क्योंकि मॉस्को नई दिल्ली को सप्लाई बढ़ाने की योजना बना रहा है. क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को भारतीय पत्रकारों से कहा कि रूस ऊर्जा क्षेत्र में भारत का अहम साझेदार बना रहेगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिखर वार्ता के लिए भारत आने वाले हैं.

पश्चिमी प्रतिबंधों के दबाव में भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद घटा दी है. अमेरिका ने हाल ही में रूस की शीर्ष तेल कंपनियों रॉसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके बाद भारतीय रिफाइनर जैसे मैंगलोर रिफाइनरी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है. इस महीने भारत का रूसी तेल आयात तीन साल के निचले स्तर पर पहुंचने की संभावना है.

हालांकि, इंडियन ऑयल ने गैर-प्रतिबंधित संस्थाओं से रूसी तेल खरीदने के लिए ऑर्डर दिए हैं और भारत पेट्रोलियम भी बातचीत के अंतिम चरण में है. रूस समर्थित नयारा एनर्जी पूरी तरह रूसी तेल प्रोसेस कर रही है, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा है कि वह केवल पूर्व-प्रतिबद्ध कार्गो को प्रोसेस करेगी. पेस्कोव ने कहा कि रूस ऐसे व्यापार तंत्र विकसित करने पर काम कर रहा है जिन्हें तीसरे देशों के दबाव से प्रभावित न किया जा सके.

2027 की जनगणना दो चरणों में होगी, लोकसभा में सरकार का बयान

भारत की अगली जनगणना 2027 में दो चरणों में आयोजित की जाएगी. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सवाल के जवाब में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा, जबकि दूसरा चरण फरवरी 2027 में संपन्न किया जाएगा. राय ने कहा कि पहले चरण में हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना की जाएगी. यह प्रक्रिया राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सुविधा के अनुसार 30 दिनों की अवधि में पूरी होगी. इस चरण का उद्देश्य देशभर में आवासीय ढांचे और सुविधाओं का विस्तृत डेटा तैयार करना है.

दूसरे चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना की जाएगी. यह प्रक्रिया भारत की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायदों में से एक है, जो नीति निर्माण, संसाधन आवंटन और विकास योजनाओं के लिए अहम आंकड़े उपलब्ध कराएगी. कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना स्थगित हो गई थी. उसके बाद यह पहली बार होगा जब देश में व्यापक जनगणना की जाएगी.

चुनाव आयोग का काम लोगों की नागरिकता जांचना नहीं: सिंघवी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की. याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21(3) के तहत किया गया पुनरीक्षण व्यक्तिगत होना चाहिए, न कि सामूहिक.

उन्होंने कहा कि प्रवासन एक मानवीय विशेषता है और इसे एसआईआर के लिए सामान्य आधार नहीं बनाया जा सकता.

सिंघवी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग नागरिकों को एक "अनुमानित नागरिकता सूची" में डाल रहा है, जिससे हर व्यक्ति को अपनी भारतीय नागरिकता साबित करनी पड़ रही है. उन्होंने कहा, "कानून यह है कि जब तक मैंने विदेशी नागरिकता हासिल नहीं की है, मुझे भारतीय नागरिक माना जाना चाहिए. चुनाव आयोग ने नागरिकता की जांच का अधिकार खुद को दे दिया है."

एसआईआर को लेकर बढ़ रहा है विवाद, यूपी में छोटे कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई

इस मामले में एमडीएमके प्रमुख वैको की याचिका पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा था. तमिलनाडु में एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ डीएमके और अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी तमिझागा वेत्री कलगम (टीवीके) सहित कई दलों ने भी याचिकाएं दायर की हैं. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बिना पूर्व सूचना नागरिकों को "गेस्ट लिस्ट" में डालना लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है.

100 दिन अलग-थलग रहने के लिए 24 लाख रुपये देगी स्पेस एजेंसी

जर्मनी के कोलोन में अंतरिक्ष यात्रा से जुड़े एक अध्ययन के लिए छह प्रतिभागियों की तलाश की जा रही है. यह 6 लोग एक साथ 100 दिनों तक दुनिया से अलग-थलग रहेंगे. इस अवधि (4 चरण, कुल 126 दिन) के लिए उन्हें 23 हजार यूरो (करीब 24 लाख रुपये) का भुगतान किया जाएगा. इस अध्ययन में शामिल होने के लिए प्रतिभागियों की उम्र 25 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए. उनका शारीरिक तौर पर स्वस्थ होना, हाई स्कूल पास होना और अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ रखना जरूरी है.

SOLIS100 नाम के इस अध्ययन का संचालन जर्मन एयरोस्पेस सेंटर (डीएलआर) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) कर रही है. और, यह 2026 की शुरुआत में चालू हो जाएगा.

इस अध्ययन का मकसद स्वास्थ्य, प्रदर्शन और तंदरुस्ती पर आइसोलेशन के प्रभावों को समझना है. प्रतिभागियों को साथ मिलकर काम करने होंगे, व्यायाम करना होगा और स्टेशन की देखभाल करनी होगी. इच्छुक लोग 12 दिसंबर तक यहां आवेदन कर सकते हैं: डीएलआर वेबसाइट

रक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिए साथ आ रहे हैं जर्मनी और पोलैंड

जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने कहा है कि जर्मनी और पोलैंड रक्षा सहयोग समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं और इस पर अगले साल दस्तखत हो सकते हैं. सोमवार (1 दिसंबर) को बर्लिन में जर्मनी और पोलैंड के मंत्रिमंडलों के बीच बैठक हुई, जिसमें इस मुद्दे पर भी चर्चा की गई.

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टुस्क के साथ एक प्रेस वार्ता में मैर्त्स ने कहा, "हमने अपने मंत्रियों को रक्षा सहयोग समझौता तैयार करने का निर्देश दिया है." उन्होंने कहा कि वे अगले साल पोलिश-जर्मन साझेदारी समझौते की 35वीं वर्षगांठ के मौके पर इसे अंतिम रूप देना चाहेंगे.

टुस्क ने इस बैठक का इस्तेमाल नाजी कब्जे के दौरान पोलैंड को हुए नुकसान से जुड़े दावों के लिए किया. उन्होंने जर्मनी से नाजी कब्जे से जीवित बचे पीड़ितों की मदद करने की मांग दोहराई. जर्मनी की ओर से पोलैंड को युद्ध क्षतिपूर्ति का मुद्दा दोनों पड़ोसियों के बीच लंबे समय से तनाव का कारण रहा है.

पढ़ें: मौत के शिविर से आजादी की 80वीं सालगिरह

बर्लिन का तर्क है कि यह मुद्दा 1953 में हुए एक समझौते में कानूनी रूप से सुलझा दिया गया था, लेकिन वारसॉ का मानना है कि यह समझौता अमान्य है क्योंकि यह कम्युनिस्ट शासन के दौरान सोवियत दबाव में हुआ था. हालांकि टुस्क की सेंटर-लेफ्ट सरकार ने क्षतिपूर्ति की मांग छोड़ दी है, फिर भी वह नाजी प्रताड़ना के शिकार बने जीवित लोगों के लिए जर्मनी से मदद की उम्मीद करती है.

सऊदी अरब में गैर-मुस्लिमों के लिए शराब बिक्री के नियमों में नरमी

सऊदी अरब में शराब बिक्री पर लगी सख्त पाबंदियों में और नरमी आई है. सऊदी अरब में रहने वाले विदेशी निवासियों ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि अब गैर-मुस्लिम विदेशी निवासी, जिनकी मासिक आय कम से कम 50,000 रियाल है, रियाद के एकमात्र लिकर स्टोर से शराब खरीद सकते हैं. यह बदलाव उस समय आया है जब हाल ही में प्रीमियम वीजा धारकों को पहली बार शराब खरीदने की अनुमति दी गई थी.

70 सालों में पहली बार सऊदी अरब में खुली शराब की दुकान

नए नियमों के तहत खरीदारों को अपनी रेजिडेंसी डिटेल्स और वेतन जानकारी एक सऊदी प्लेटफॉर्म पर सत्यापित करानी होती है. कई प्रवासियों ने बताया कि वे व्हाट्सऐप मैसेजों के जरिए इस खबर से हैरान हुए और बाद में शराब खरीदने में कामयाब रहे. एएफपी के अनुसार, नियमों में ढील के बाद बिक्री में तेजी आई है और अब तक 12,500 से अधिक प्रीमियम वीजा धारक शराब खरीद चुके हैं.

सूत्रों के मुताबिक, 2026 तक जेद्दाह और धहरान में भी शराब की दुकानें खोलने की योजना है. यह कदम सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की आर्थिक विविधीकरण और विदेशी निवेश आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा है. हालांकि, शराब का मुद्दा देश में धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से संवेदनशील बना हुआ है, जहां 1952 से शराब पर प्रतिबंध लागू है.

कितना सफल हो पाएगा ऑस्ट्रेलिया में किशोरों के लिए सोशल मीडिया बैन

ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया में पहली बार 16 वर्ष से कम उम्र के किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने का फैसला किया है. यह कानून 10 दिसंबर से लागू होगा और इसका उद्देश्य युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर तकनीक के प्रभाव को कम करना है. सरकार का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बच्चों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और अब समय आ गया है कि इस पर रोक लगाई जाए.

कई अध्ययनों ने सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल को नींद की कमी, खराब बॉडी इमेज और भावनात्मक तनाव से जोड़ा है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ठोस सबूत अभी भी नहीं हैं. मनोवैज्ञानिक एमी ऑर्बेन ने कहा कि यह प्रतिबंध एक "प्राकृतिक प्रयोग" होगा, जिससे पता चल सकेगा कि सोशल मीडिया पर रोक का किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है. वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बहुत कठोर है और इससे उल्टा नुकसान हो सकता है.

इंटरनेट की लत रोकने के लिए ग्रीस ने शुरू किया अभियान

एक सर्वे के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के तीन-चौथाई वयस्क इस कानून का समर्थन करते हैं. लेकिन 140 से अधिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि प्रतिबंध से हाशिए पर रहने वाले युवाओं की ऑनलाइन कम्यूनिटी तक पहुंच बाधित हो सकती है और वे चरमपंथी साइटों की ओर जा सकते हैं. इसके बावजूद प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीजी ने कहा, "सोशल मीडिया हमारे बच्चों को नुकसान पहुंचा रहा है, इसलिए अब इसे रोकने का समय है."

"संचार साथी" ऐप पर भारत सरकार की सफाई

भारत सरकार के संचार साथी ऐप को लेकर बढ़े विवाद के बीच सरकार ने इस मुद्दे पर मंगलवार को सफाई दी है. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि संचार साथी ऐप, जिसे सरकार ने सभी स्मार्टफोन पर प्री-लोड करने का निर्देश दिया है, उसे उपयोगकर्ता अपनी इच्छा से डिलीट कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि यह ऐप उपभोक्ता सुरक्षा के लिए है और इसमें किसी तरह की कॉल मॉनिटरिंग या जासूसी जैसे फीचर नहीं हैं. सिंधिया ने बताया कि संचार साथी पोर्टल के 20 करोड़ से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं, जबकि ऐप को 1.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया है.

उन्होंने यह भी बताया कि इस प्लेटफॉर्म की मदद से अब तक करीब 1.75 करोड़ फर्जी मोबाइल (सिम) कनेक्शन बंद किए गए हैं. इसके अलावा, लगभग 20 लाख चोरी हुए फोन का पता लगाया गया है और 7.5 लाख फोन उनके मालिकों को वापस सौंपे गए हैं.

उन्होंने आगे कहा, "हमारा कर्तव्य उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. विपक्ष जब मुद्दे नहीं ढूंढ पाता तो ऐसे सवाल उठाता है. संचार साथी ऐप उपभोक्ता को सुरक्षा का विकल्प देता है. इसे एक्टिवेट या डिएक्टिवेट करना पूरी तरह यूजर की इच्छा पर निर्भर है."

हालांकि, अधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने संभावित गंभीर परिणामों को लेकर चेतावनी दी है. एडवोकेसी समूह इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (आईएफएफ) ने मंगलवार को कहा कि वे नए निर्देश को लेकर चिंतित हैं. आईएफएफ ने एक्स पर जारी एक बयान में कहा, आदेश "व्यक्तिगत डिजिटल डिवाइसों पर एग्जिक्यूटिव कंट्रोल के तेजी और बहुत गहराई से चिंताजनक विस्तार को दिखाता है."

पांच साल में यूरोपीय संघ का रक्षा खर्च बढ़कर करीब दोगुना हुआ

बीते पांच सालों में, यूरोपीय संघ में रक्षा खर्च बढ़कर लगभग दोगुना हो चुका है. यूरोपीय रक्षा एजेंसी (ईडीए) का अनुमान है कि 2025 में खर्च का आंकड़ा 392 अरब यूरो तक पहुंच जाएगा. 2020 में यूरोपीय संघ के सदस्य देशों का कुल रक्षा खर्च 198 अरब यूरो था. यानी ताजा अनुमानों में करीब 98 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है. महंगाई को ध्यान में रखते हुए 2020 से 2025 के बीच यह वृद्धि 63 प्रतिशत रही, जो 5 साल के अंतराल में काफी बड़ा इजाफा है.

ईडीए के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में यूरोपीय संघ के देशों ने रक्षा पर 343.2 अरब यूरो खर्च किए. इसमें जर्मनी सबसे आगे रहा जिसने 90.6 अरब यूरो खर्च किए. यह यूरोपीय संघ के कुल रक्षा खर्च का 26.4 प्रतिशत है. दूसरे स्थान पर फ्रांस रहा, जिसने 59.6 अरब यूरो खर्च किए. 32.7 अरब यूरो के साथ इटली तीसरे स्थान पर है, जबकि 31.9 अरब यूरो खर्च करके पोलैंड चौथे स्थान पर रहा.

समाजवादी सरकार वाला स्पेन पांचवें स्थान पर है, लेकिन अन्य प्रमुख यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले इसका रक्षा खर्च कम रहा. स्पेन ने 2024 में रक्षा पर 22.7 अरब यूरो खर्च किए. इस साल की शुरुआत में, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने खासतौर पर स्पेन को नाटो से निकालने की धमकी दी थी क्योंकि उसने अपने सैन्य खर्च को जीडीपी के 5% तक बढ़ाने की प्रतिबद्धता से इनकार किया था. कुछ अन्य मौकों पर भी ट्रंप रक्षा संबंधी मामलों में स्पेन को निशाने पर लेते रहे हैं.

चेन्नई में रेड अलर्ट, चक्रवात "दित्वाह" के कारण भारी बारिश का खतरा

चेन्नई और आसपास के जिलों में मंगलवार को भारी बारिश का खतरा बढ़ गया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेन्नई और तिरुवल्लुर के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. यह चेतावनी बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के कारण दी गई है, जो चक्रवाती तूफान "दित्वाह" से पैदा हुआ है. कई जिलों में अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई गई है.

मौसम विभाग के साप्ताहिक पूर्वानुमान के अनुसार, चेन्नई और तिरुवल्लुर में अधिकतम तापमान लगभग 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है. मौसम विभाग ने बताया कि गहरा दबाव अगले 12 घंटों में कमजोर होकर कम दबाव में बदल सकता है.

चक्रवात "दित्वाह" के कारण पड़ोसी देश श्रीलंका में भारी तबाही मची है और वहां सैकड़ों लोगों की मौत हुई है.

लोकसभा में एसआईआर के मुद्दे पर हंगामा

मंगलवार, 2 दिसंबर को संसद की कार्यवाई के दौरान विपक्षी दलों के सांसद ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर चर्चा की मांग की और जोरदार नारेबाजी की. विपक्षी सांसदों ने चुनावी धांधली के आरोप लगाते हुए बार-बार “वोट चोर, गद्दी छोड़” के नारे लगाए और देशभर में चल रही एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा की मांग की.

सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी नेताओं ने संसद के मकर द्वार के सामने विरोध प्रदर्शन किया और चुनाव सुधारों पर तत्काल बहस कराने की मांग उठाई. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी समेत इंडिया गठबंधन के सांसदों ने संसद के मकर द्वार के सामने प्रदर्शन कर सरकार से इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की. कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा, "62 लाख मतदाता बिहार में हटाए गए हैं. यह प्रक्रिया 12 राज्यों में लागू हो चुकी है. यह लोकतंत्र के लिए खतरा है, इसलिए संसद में बहस जरूरी है." उन्होंने आरोप लगाया कि कई बीएलओ आत्महत्या कर रहे हैं और मताधिकार पर संकट मंडरा रहा है.

वहीं, बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने उन्हें "नाटक" करने पर आईना दिखाया है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विपक्ष ऐसे ही "बेकार मुद्दों" पर हंगामा करता रहा तो नतीजे बिहार चुनाव जैसे ही होंगे.

मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे से शुरू हुई लेकिन हंगामे के चलते यह दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई.

संचार साथी ऐप पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के निर्देश पर भारत में निर्मित या आयातित सभी मोबाइल फोन में संचार साथी ऐप को अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करने के फैसले ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. सरकार का दावा है कि यह कदम साइबर धोखाधड़ी रोकने और खोए हुए फोन को ट्रैक करने के लिए उठाया गया है. लेकिन विपक्षी दलों ने इसे नागरिकों की निजता पर हमला बताते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की है.

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इस कदम को "असंवैधानिक" करार देते हुए कहा कि "बिग ब्रदर हमें नहीं देख सकता. निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है." उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा ऐप, जिसे हटाया नहीं जा सकता, हर नागरिक की गतिविधियों पर नजर रखने का औजार है.

वहीं शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इसे "बिग बॉस BOSS निगरानी" बताते हुए विरोध का एलान किया. उन्होंने कहा, "व्यक्तिगत फोनों में घुसने के ऐसे संदिग्ध तरीकों का विरोध और प्रतिरोध किया जाएगा, और यदि आईटी मंत्रालय यह सोचता है कि मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली बनाने के बजाय वह निगरानी प्रणाली बनाएगा, तो उसे विरोध के लिए तैयार रहना चाहिए."

दूरसंचार विभाग का कहना है कि संचार साथी ऐप चोरी हुए फोन को ब्लॉक करने और आईएमईआई सत्यापन में मदद करता है. सरकार का दावा है कि यह कदम नागरिकों की सुरक्षा के लिए है, न कि निगरानी के लिए. हालांकि, ऐप को अनइंस्टॉल न कर पाने की शर्त ने डेटा सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.