PMCH Roof Collapse: पटना का पीएमसीएच (पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) बिहार के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक है. यहां हमेशा मरीजों की भीड़ लगी रहती है. सरकार का सपना है कि इसे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हॉस्पिटल बना दिया जाए, लेकिन हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. एक तरफ़ हज़ारों करोड़ के प्रोजेक्ट का ऐलान हो रहा है, तो दूसरी तरफ़ अस्पताल की छतें ही गिर रही हैं, जिससे डॉक्टरों और मरीजों की जान पर ख़तरा मंडरा रहा है.
सरकार का बड़ा सपना
मई 2025 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बहुत बड़ी घोषणा की थी. उन्होंने कहा कि पीएमसीएच को 5462 बेड वाले एक विशाल अस्पताल में बदला जाएगा, जिस पर 5540 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में 1050 बेड का एक ट्विन टावर ब्लॉक बनाया जाना है, जो 2027 तक भारत का सबसे बड़ा अस्पताल बन जाएगा. यही नहीं, यहां हेलीपैड और एयर एम्बुलेंस जैसी आधुनिक सुविधाएं भी होंगी. सुनने में तो यह किसी सपने जैसा लगता है, है ना?
लेकिन हकीकत क्या है?
सपना तो बहुत बड़ा है, लेकिन ज़मीनी हकीकत डरावनी है. जून 2025 में ही, इस बड़े ऐलान के कुछ ही दिनों बाद, अस्पताल के आईसीयू की फॉल्स सीलिंग गिर गई. इससे वहां हड़कंप मच गया और लोग निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप लगाने लगे. बात यहीं नहीं रुकी, उसी महीने महिला रोग विभाग (गायनेकोलॉजी वार्ड) की छत का एक हिस्सा भी ढह गया. इस हादसे में एक पीजी छात्र की आंख में चोट लग गई. हैरानी की बात यह है कि यह वार्ड हाल ही में रेनोवेट किया गया था.
आज PMCH में सर्जरी करते समय मेरे ठीक पीछे ऑपरेशन थिएटर का छत गिर गया। जिससे मेरे पैर में चोट लगी और वही पर खड़ी सिस्टर बाल बाल बच गई। ऐसे माहौल में कैसे काम किया जाए ? @mangalpandeybjp ji.@ForSuraaj @jansuraajonline @WithLoveBihar ऐसे कैसे बनेगा, विश्व का दूसरा सबसे बड़ा… pic.twitter.com/iuiXeyDOzL
— Dr_Ortho (@Dr_KD_MS) September 26, 2025
अब खुद एक डॉक्टर ने वीडियो जारी करते हुए बताया कि- आज PMCH में सर्जरी करते समय मेरे ठीक पीछे ऑपरेशन थिएटर का छत गिर गया। जिससे मेरे पैर में चोट लगी और वही पर खड़ी सिस्टर बाल बाल बच गई.
इन घटनाओं से डॉक्टर और स्टाफ बेहद परेशान हैं. उनका कहना है कि वे मरीजों की सेवा कैसे करें, जब उनकी खुद की जान खतरे में हो.
पुरानी है यह समस्या
पीएमसीएच में इस तरह की घटनाएं कोई नई नहीं हैं. साल 2013 में, एक नया ऑपरेशन थिएटर शुरू होने से पहले ही उसकी छत गिर गई थी. इसी तरह, 2019 में मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में चमकी बुखार (एनसेफलाइटिस) से पीड़ित बच्चों के वार्ड की छत गिर गई थी. बिहार के सरकारी अस्पतालों में यह एक आम समस्या बन गई है कि बड़े-बड़े प्रोजेक्ट तो शुरू हो जाते हैं, लेकिन रखरखाव और मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता. डॉक्टर और कर्मचारी शिकायत करते हैं, लेकिन बजट की कमी का हवाला देकर इसे टाल दिया जाता है.
And this is not the first time.... It has collapsed n number of times in last 1 year. This is criminal. https://t.co/u8WKN0Z5zv
— With Love Bihar (@WithLoveBihar) September 26, 2025
अब सवाल यह है
ऐसे हालात में कोई मरीज अस्पताल पर कैसे भरोसा करे? सरकार को समझना होगा कि सिर्फ बड़ी-बड़ी इमारतें बनाने से स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं सुधरती. सबसे पहले मौजूदा इमारतों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना ज़रूरी है. अगर छतें ही मज़बूत नहीं होंगी, तो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल बनाने का सपना कैसे पूरा होगा?
कुल मिलाकर, पीएमसीएच को एक विश्वस्तरीय अस्पताल बनाने की योजना शानदार है, लेकिन सरकार को पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि वहां इलाज कराने वाले मरीज और काम करने वाले डॉक्टर सुरक्षित महसूस करें. उम्मीद है कि प्रशासन इस पर जल्द ध्यान देगा ताकि बिहार के लोगों को बिना किसी डर के बेहतर इलाज मिल सके.












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