Petrol Price Today, March 20, 2026: वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है. शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल की कीमतों (Petrol Prices) में कोई बदलाव नहीं किया गया है. तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies) (OMCs) ने खुदरा दरों को स्थिर रखा है, जिससे आम आदमी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते दबाव के बावजूद फिलहाल राहत मिली हुई है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये और मुंबई में 103.54 रुपये प्रति लीटर पर बरकरार है. आज, 20 मार्च को दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, अहमदाबाद, कोलकाता, जयपुर, लखनऊ और नोएडा जैसे प्रमुख शहरों में पेट्रोल की ताज़ा दरें देखें. यह भी पढ़ें: Petrol Price Today: भारत के लिए बड़ी राहत! जंग के बीच पेट्रोल की कीमतें स्थिर, जानें आज दिल्ली, मुंबई और आपके शहर में क्या हैं ताज़ा दाम
प्रमुख शहरों में आज के पेट्रोल रेट (प्रति लीटर)
देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय करों (VAT) के कारण पेट्रोल की कीमतों में अंतर देखा जाता है. आज की ताजा दरें इस प्रकार हैं:
| शहर | पेट्रोल की कीमत (रुपये/लीटर) |
| दिल्ली | ₹ 94.77 |
| मुंबई | ₹ 103.54 |
| चेन्नई | ₹ 100.80 |
| कोलकाता | ₹ 105.45 |
| बेंगलुरु | ₹ 102.99 |
| हैदराबाद | ₹ 107.46 |
| पुणे | ₹ 103.99 |
| अहमदाबाद | ₹ 94.68 |
| नोएडा/गुरुग्राम | ₹ 94.90 / ₹ 95.51 |
(नोट: लखनऊ, जयपुर और श्रीनगर जैसे शहरों में भी कीमतें पिछले स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं।)
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का दबाव
ईंधन की कीमतों में स्थिरता ऐसे समय में देखी जा रही है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में 'ब्रेंट क्रूड' (Brent Crude) 103 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुका है. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में इस साल अब तक लगभग 40% का उछाल आ चुका है. हाल ही में कीमतें 136.56 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर तक भी पहुंची थीं.
घरेलू बाजार पर प्रभाव और ओएमसी की भूमिका
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कोई भी बड़ी वृद्धि सीधे तौर पर महंगाई को प्रभावित करती है. हालांकि, सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL और HPCL) ने लंबे समय से खुदरा कीमतों को "फ्रीज" कर रखा है. विशेषज्ञ बताते हैं कि कंपनियां वर्तमान में बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद वहन कर रही हैं ताकि आम जनता को अचानक लगने वाले झटकों से बचाया जा सके. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय लागत और खुदरा कीमतों के बीच बढ़ता यह अंतर इन कंपनियों के बैलेंस शीट पर दबाव डाल सकता है.













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