Seasonal Flu Vaccine: भारत में फ्लू टीकों की कोई कमी नहीं; ICMR ने खारिज की अफवाहें, कहा- H1N1 पर दोनों स्ट्रेन के टीके हैं प्रभावी
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने देश में मौसमी इन्फ्लूएंजा के टीकों की कमी संबंधी मीडिया खबरों का खंडन किया है. शीर्ष चिकित्सा अनुसंधान संस्था ने स्पष्ट किया है कि भारत की प्रमुख फार्मेसियों और खुदरा दवा दुकानों में मौसमी फ्लू के टीके पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं. आईसीएमआर ने बताया कि बाजार में उपलब्ध 'उत्तरी गोलार्ध' और 'दक्षिणी गोलार्ध' दोनों तरह के टीकों के फॉर्मूलेशन वर्तमान में फैल रहे H1N1 वायरस स्ट्रेन के खिलाफ पूरी तरह प्रभावी हैं.
नई दिल्ली: देश में मौसमी इन्फ्लूएंजा के बढ़ते मामलों के बीच स्वाइन फ्लू (H1N1) रोधी टीकों की कथित कमी को लेकर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने स्थिति स्पष्ट कर दी है. शीर्ष चिकित्सा अनुसंधान संस्था ने टीकों की कमी संबंधी दावों को निराधार बताते हुए कहा कि देश भर के प्रमुख मेडिकल स्टोर्स और फार्मेसियों में आवश्यक फ्लू शॉट्स पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं.
आईसीएमआर ने गुरुवार, 10 सितंबर को जारी बयान में कहा कि मौसमी इन्फ्लूएंजा से बचाव के लिए लोग स्वैच्छिक आधार पर यह टीका लगवा सकते हैं, विशेष रूप से वे लोग जो गंभीर संक्रमण के उच्च जोखिम (High-Risk Groups) के दायरे में आते हैं. यह भी पढ़ें: Karnataka H1N1 Cases: कर्नाटक में H1N1 इन्फ्लुएंजा के 4,200 से अधिक मामले, स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
दोनों वैक्सीन H1N1 पर प्रभावी; उत्तरी गोलार्ध को प्राथमिकता
टीकों के प्रकार और प्रभावशीलता को लेकर चल रहे संशय को दूर करते हुए परिषद ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा किया:
- उत्तरी गोलार्ध (NH) टीका पहली पसंद: चिकित्सीय दिशा-निर्देशों के अनुसार उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) फॉर्मूलेशन का टीका प्राथमिकता पर है, क्योंकि भारत में सक्रिय वायरस का स्ट्रेन इसके काफी करीब है.
- दक्षिणी गोलार्ध (SH) भी बेहतरीन विकल्प: आईसीएमआर ने साफ किया कि यदि किसी क्षेत्र में उत्तरी गोलार्ध का टीका तत्काल उपलब्ध न हो, तो दक्षिणी गोलार्ध (Southern Hemisphere) का टीका भी लिया जा सकता है.
- परिषद ने जोर दिया कि दोनों ही फॉर्मूलेशन वर्तमान में देश में फैल रहे H1N1 स्ट्रेन से सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम हैं. ऐसे में किसी विशेष फॉर्मूलेशन की अनुपलब्धता टीकाकरण में बाधा नहीं बननी चाहिए.
दो महीने पुराने क्लिनिकल नोट से फैला था भ्रम
आईसीएमआर ने बताया कि टीकों की कमी की भ्रामक खबरें परिषद द्वारा लगभग दो महीने पहले डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के मार्गदर्शन के लिए जारी एक क्लिनिकल नोट से जुड़ी हैं:
- कोई नई एडवाइजरी नहीं: यह नोट चिकित्सकों को इलाज और बचाव की सलाह देने के लिए जारी किया गया था और यह कोई नई सार्वजनिक नीति या प्रतिबंधात्मक एडवाइजरी नहीं थी.
- डब्ल्यूएचओ के मानकों पर आधारित: अनुसंधान संस्था ने दोहराया कि उसकी सभी सिफारिशें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वैश्विक दिशा-निर्देशों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के अनुरूप हैं.
- परिषद ने मीडिया संस्थानों से अपील की है कि वे स्वास्थ्य संबंधी तकनीकी जानकारियों को सही संदर्भ में ही प्रस्तुत करें.
'H1N1 के टीके उपलब्ध हैं'
किन लोगों के लिए फ्लू का टीका लेना अधिक जरूरी?
आईसीएमआर के अनुसार, इन्फ्लूएंजा वायरस में समय के साथ बदलाव (एंटीजेनिक ड्रिफ्ट) होता रहता है, इसलिए कुछ श्रेणियों के लोगों को सालाना बूस्टर के तौर पर यह टीका लगवाने की सलाह दी जाती है:
- वरिष्ठ नागरिक: 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग.
- गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के दौरान संक्रमण का खतरा अधिक होने के कारण.
- पुरानी बीमारियों से पीड़ित: मधुमेह (डायबिटीज), फेफड़ों के रोग (अस्थमा/सीओपीडी), हृदय रोग या किडनी की बीमारियों से ग्रस्त मरीज.
- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग: कैंसर या इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं पर निर्भर व्यक्ति.
परिषद ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि सामान्य निजी फार्मेसियों के माध्यम से कोई भी पात्र व्यक्ति डॉक्टर की सलाह पर आसानी से यह टीका लगवा सकता है.