Mumbai Namaz Row: मुंबई में सड़कों पर नमाज का विवाद, बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने की कार्रवाई की मांग; कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने पूछा- 'क्या नियम सभी धर्मों पर लागू होंगे?'
किरीट सोमैया (Photo Credits: File Image)

मुंबई, 2 जून: महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजधानी मुंबई (Mumbai) में सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर नमाज़ पढ़े जाने को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है. भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) (BJP) के वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया (Kirit Somaiya) ने मंगलवार को मुंबई के नगर निगम आयुक्त, पुलिस कमिश्नर, संयुक्त यातायात पुलिस आयुक्त और जिला कलेक्टरों को एक औपचारिक पत्र लिखकर सार्वजनिक सड़कों पर नमाज़ पढ़ने की प्रथा को रोकने के लिए तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है. सोमैया ने दलील दी है कि सड़कों पर होने वाले ऐसे धार्मिक आयोजनों से मुंबई की यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है, जिससे आम जनता और स्थानीय निवासियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है. यह भी पढ़ें: VIDEO: महाराष्ट्र में महिला सशक्तिकरण की अनोखी पहल, CM फडणवीस की पत्नी अमृता ने चलाया 'पिंक E-रिक्शा', बताया कैसे मिलेगा महिलाओं को रोजगार

ट्रैफिक जाम और अदालती दिशा-निर्देशों का दिया हवाला

किरीट सोमैया ने अपने पत्र में मुंबई के कुछ विशिष्ट इलाकों, विशेषकर रेलवे स्टेशनों के बाहर और व्यस्त चौराहों पर होने वाले जमावड़े को रेखांकित किया है. उन्होंने कहा कि विशेष रूप से शुक्रवार दोपहर की नमाज़ के दौरान सड़कों पर बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से प्रमुख जंक्शनों पर यातायात की गति पूरी तरह धीमी हो जाती है, जो दैनिक यात्रियों के लिए बड़ी चुनौती बनती है.

भाजपा नेता ने अपने रुख को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक पार्कों, मैदानों और सड़कों के उपयोग के संबंध में विभिन्न न्यायालयों द्वारा समय-समय पर दी गई टिप्पणियों और दिशा-निर्देशों का भी संदर्भ दिया. सोमैया ने जोर देकर कहा कि मुंबई जैसे घने बसे महानगर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, सुचारू यातायात सुनिश्चित करना और नागरिक सुविधाओं की रक्षा करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, इसलिए इन न्यायिक सिद्धांतों का कड़ाई से पालन किया जाए.

मस्जिदों में भीड़ के कारण बाहर पढ़ते हैं नमाज़: हुसैन दलवई

भाजपा नेता की इस मांग पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने कहा कि कई बार मस्जिदों के भीतर जगह कम पड़ जाने और अत्यधिक भीड़ होने के कारण मजबूरी में कुछ श्रद्धालुओं को बाहर सड़क पर नमाज़ पढ़नी पड़ती है. दलवई ने साझा किया कि उन्होंने स्वयं भी मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को यह सलाह दी है कि वे सड़कों पर नमाज़ का विस्तार करने के बजाय मस्जिदों के अंदर ही अलग-अलग पारियों (Congregations) में नमाज़ का आयोजन करें.

कांग्रेस का पलटवार: क्या नियम सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होंगे?

प्रशासनिक कार्रवाई की मांग पर सवाल उठाते हुए हुसैन दलवई ने पूछा कि क्या सार्वजनिक स्थानों को लेकर बनाए जाने वाले मानक सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होंगे. उन्होंने कहा, "मैं किरीट जी से पूछना चाहता हूं कि ऐसा कौन सा धर्म है जो अपनी गतिविधियों के लिए सार्वजनिक सड़कों का उपयोग नहीं करता? गणेश उत्सव के जुलूस सड़कों पर निकलते हैं, नवरात्रि के आयोजन सार्वजनिक स्थानों पर होते हैं, शादियों में सड़कें घिरती हैं और शवयात्राएं भी सार्वजनिक रास्तों से होकर गुजरती हैं."

कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि यदि प्रशासन सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर कोई नियम या प्रतिबंध लागू करता है, तो बिना किसी भेदभाव के उसे हर धर्म, सांस्कृतिक आयोजन और समुदाय पर समान और निष्पक्ष रूप से लागू किया जाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने आवास की कमी से जूझ रहे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मुद्दों को लेकर भी सोमैया की आलोचना की. फिलहाल इस पत्र के बाद मुंबई में सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक व सांस्कृतिक गतिविधियों की सीमाओं को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है.